दुष्यंत गौतम की छुट्टी, राम माधव की एंट्री; उत्तराखंड चुनाव से पहले BJP का बड़ा दांव

दुष्यंत गौतम की छुट्टी, राम माधव की एंट्री; उत्तराखंड चुनाव से पहले BJP का बड़ा दांव

उत्तराखंड विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी (BJP) के केंद्रीय नेतृत्व ने प्रदेश संगठन में बड़ा फेरबदल करते हुए सियासी हलचल तेज कर दी है। पार्टी आलाकमान ने मौजूदा प्रदेश प्रभारी दुष्यंत गौतम को पद से हटा दिया है।

दुष्यंत गौतम की जगह अनुभवी रणनीतिकार और बीजेपी के नवनियुक्त राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राम माधव को उत्तराखंड का नया प्रदेश प्रभारी नियुक्त किया गया है। इसके साथ ही पार्टी ने युवा नेतृत्व को आगे बढ़ाते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री स्वर्गीय सुषमा स्वराज की बेटी और तेजतर्रार नेता बांसुरी स्वराज को उत्तराखंड का सह प्रभारी बनाया है। इससे पहले रेखा वर्मा राज्य में सह प्रभारी की भूमिका संभाल रही थीं। इस बड़े संगठनात्मक बदलाव में दुष्यंत गौतम को फिलहाल कोई नई जिम्मेदारी नहीं सौंपी गई है।

राम माधव की राष्ट्रीय राजनीति में मजबूत वापसी

राम माधव की यह नियुक्ति भाजपा के भीतर उनके बढ़ते कद और रणनीतिक उपयोगिता को दर्शाती है। उत्तराखंड का प्रभारी बनाए जाने से ठीक पहले उन्हें पार्टी की नई राष्ट्रीय टीम में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष का महत्वपूर्ण दायित्व सौंपा गया था।

राम माधव वर्ष 2014 में उस समय राष्ट्रीय फलक पर तेजी से उभरे थे, जब अमित शाह के भाजपा अध्यक्ष बनने के बाद उन्हें पार्टी का राष्ट्रीय महासचिव नियुक्त किया गया था। हालांकि, जेपी नड्डा के कार्यकाल के दौरान सितंबर 2020 में उन्हें राष्ट्रीय महासचिव के पद से मुक्त कर दिया गया था, लेकिन अब चुनावी राज्यों की बागडोर देकर उन्हें फिर से फ्रंटलाइन पर लाया गया है।

जम्मू-कश्मीर के सियासी रण में भी निभा चुके हैं बड़ी भूमिका

चुनावी प्रबंधन और कठिन राजनीतिक परिस्थितियों को साधने में राम माधव को पार्टी का संकटमोचक माना जाता है। इससे पहले भी वह जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव के दौरान चुनाव प्रभारी के तौर पर बेहद अहम जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। जेपी नड्डा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहते हुए उन्हें घाटी और जम्मू संभाग के सियासी समीकरणों को साधने का जिम्मा मिला था। इसके अलावा वह राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय नीतियों पर मंथन करने वाले प्रतिष्ठित थिंक टैंक 'इंडिया फाउंडेशन' के अध्यक्ष भी हैं, जिससे उनकी बौद्धिक और रणनीतिक पकड़ काफी गहरी मानी जाती है।

इंजीनियरिंग से लेकर संघ प्रचारक तक का सियासी सफर

मूल रूप से आंध्र प्रदेश के रहने वाले राम माधव का शैक्षिक और सांगठनिक पृष्ठभूमि बेहद मजबूत रही है। उन्होंने इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा करने के बाद राजनीति विज्ञान (Political Science) में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की। बेहद कम उम्र में ही वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़ गए थे और 20 वर्ष की आयु पूरी करने से पहले ही पूर्णकालिक संघ प्रचारक बन गए थे। संघ में लंबे समय तक मीडिया और बौद्धिक विभाग की कमान संभालने के बाद उन्हें भाजपा की मुख्यधारा की राजनीति में भेजा गया था। अब उत्तराखंड चुनाव में पार्टी को जीत की हैट्रिक दिलाने की चुनौती उनके कंधों पर होगी।