उत्तराखंड में स्वास्थ्य सेवाएं ठप होने के आसार: 1200 रेजिडेंट और इंटर्न डॉक्टर 7 सितंबर से करेंगे हड़ताल, जानें क्यों

उत्तराखंड में स्वास्थ्य सेवाएं ठप होने के आसार: 1200 रेजिडेंट और इंटर्न डॉक्टर 7 सितंबर से करेंगे हड़ताल, जानें क्यों

उत्तराखंड के सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पतालों में इलाज के लिए आने वाले मरीजों के लिए आने वाला हफ्ता बेहद मुश्किल भरा साबित हो सकता है। स्टाइपेंड में बढ़ोतरी की लंबित मांग को लेकर राज्य के लगभग 1200 युवा 'जेन जी' (Gen Z) डॉक्टर सोमवार, 7 सितंबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने की पूरी तैयारी कर चुके हैं।

इस आंदोलन में करीब 600 पोस्ट ग्रेजुएट (पीजी) रेजिडेंट डॉक्टर और लगभग 600 एमबीबीएस इंटर्न डॉक्टर एकजुट होकर आर-पार की लड़ाई के मूड में मैदान में उतर आए हैं। 'रेजीडेंट डॉक्टर यूनाइटेड' और 'वॉइस ऑफ इंटर्न' के बैनर तले सोशल मीडिया पर शुरू हुई यह मुहिम अब जमीनी स्तर पर बड़े कार्य बहिष्कार का रूप ले चुकी है।

दून मेडिकल कॉलेज प्राचार्य को सौंपा हड़ताल का अल्टीमेटम

गुरुवार को दून मेडिकल कॉलेज के रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (RDA) के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने कॉलेज की प्राचार्य डॉ. गीता जैन से औपचारिक मुलाकात की और सोमवार से पूरी तरह कार्य ठप करने का अंतिम नोटिस थमा दिया। आरडीए के अध्यक्ष डॉ. अभिजीत राठी, उपाध्यक्ष डॉ. राहुल, सचिव डॉ. हिमांशु और सह-सचिव डॉ. नीरज ने प्रशासनिक अधिकारियों के समक्ष अपनी मांगें पुरजोर ढंग से रखीं। रेजिडेंट डॉक्टरों ने साफ किया कि उनका मौजूदा मासिक स्टाइपेंड 71 हजार रुपये से बढ़ाकर कम से कम 1.1 लाख रुपये (1,10,000 रुपये) किया जाना चाहिए।

आश्वासनों से तंग आए डॉक्टर, पड़ोसी राज्यों के मानदेय का दिया हवाला

आंदोलनकारी रेजिडेंट डॉक्टरों का कहना है कि वे इस ज्वलंत मुद्दे को लेकर दो बार प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री और स्वास्थ्य महानिदेशक से सीधे मुलाकात कर चुके हैं। हर बार वार्ता के दौरान केवल कोरे आश्वासन ही मिले, लेकिन धरातल पर शासनादेश जारी नहीं किया गया। डॉक्टरों का तर्क है कि उत्तराखंड जैसे विषम भौगोलिक परिस्थितियों वाले राज्य के मुकाबले पड़ोसी राज्यों में रेजिडेंट डॉक्टरों को कहीं अधिक सम्मानजनक और बेहतर स्टाइपेंड प्रदान किया जा रहा है।

हल्द्वानी में एमबीबीएस इंटर्न का विरोध, 30 हजार रुपये स्टाइपेंड की मांग

उधर कुमाऊं के सबसे बड़े राजकीय मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी में भी एमबीबीएस इंटर्न डॉक्टरों ने मोर्चा खोल दिया है। इंटर्न्स ने अपने वर्तमान मानदेय 17 हजार रुपये प्रति माह को बेहद नाकाफी बताते हुए इसे बढ़ाकर न्यूनतम 30 हजार रुपये करने की मांग उठाई है। ‘वॉयस ऑफ इंटर्न्स-उत्तराखंड’ संगठन ने सीधे मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर बढ़ती महंगाई और अस्पतालों में काम के भारी दबाव का विस्तार से हवाला दिया है। अपनी नाराजगी दर्ज कराने के लिए सुशीला तिवारी राजकीय अस्पताल (STH) में कार्यरत इंटर्न डॉक्टरों ने बांह पर काली पट्टी बांधकर मरीजों का उपचार किया और शांतिपूर्ण विरोध दर्ज कराया।