उत्तराखंड में चमत्कार: 7 दिनों की मूसलाधार बारिश और घने जंगल के बीच मौत को मात देकर लौटी लापता युवती, SDRF का हैरतअंगेज रेस्क्यू

उत्तराखंड में चमत्कार: 7 दिनों की मूसलाधार बारिश और घने जंगल के बीच मौत को मात देकर लौटी लापता युवती, SDRF का हैरतअंगेज रेस्क्यू

उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में इन दिनों कुदरत का कहर बरस रहा है। सात दिनों से जारी लगातार भीषण मानसून की बारिश और बेहद दुर्गम हालातों के बीच रानीखेत के घने जंगलों से एक ऐसी खबर आई है, जिसे सुनकर हर कोई दंग है।

पुलिस और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) के एक बेहद कठिन और संयुक्त बचाव अभियान के बाद, जंगल में कई दिनों से भूखी-प्यासी, शारीरिक रूप से कमजोर और गंभीर रूप से घायल एक युवती को सुरक्षित बचा लिया गया है। इस रेस्क्यू ने उसके चिंतित परिवार को एक नई जिंदगी दी है।

1 जुलाई से लापता थी बेटी, पिता ने दर्ज कराई थी रिपोर्ट

यह पूरी घटना रानीखेत क्षेत्र की है। यहां रहने वाली युवती 1 जुलाई को बिना किसी को कुछ बताए अचानक अपने घर से कहीं निकल गई थी। जब काफी समय बीत जाने के बाद भी वह घर नहीं लौटी, तो परेशान परिवार वालों ने उसकी हर संभावित जगह तलाश की।

तमाम कोशिशें नाकाम होने के बाद आखिरकार 3 जुलाई को युवती के लाचार पिता गिरीश पुजारी ने पुलिस में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के सख्त निर्देशों पर जिला नियंत्रण कक्ष की निगरानी में तुरंत एक बड़ा संयुक्त सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया।

फिसलन भरे पहाड़, ड्रोन और डॉग स्क्वायड की मदद से महाअभियान

उत्तराखंड का मौसम इस वक्त बेहद चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। लगातार सात दिनों से हो रही भारी बारिश के कारण पहाड़ी रास्तों पर भयंकर फिसलन थी। ऐसे जानलेवा हालातों के बावजूद पुलिस, SDRF, अग्निशमन सेवा (फायर ब्रिगेड), पीएसी (PAC), वन विभाग, डॉग स्क्वाड और आधुनिक ड्रोन कैमरों की एक बड़ी टीम ने मोर्चा संभाला। रेस्क्यू टीमों ने माजखली, कालिका, दलमोती, सुंदरखाल और बुबुधाम के बेहद घने और खतरनाक वन क्षेत्रों में एक विशाल तलाशी अभियान चलाया, ताकि लड़की का कोई सुराग मिल सके।

सुंदरखाल के घने जंगल में 5 किमी अंदर मिली युवती

रेस्क्यू टीम को आखिरकार एक बड़ी कामयाबी तब मिली जब सुंदरखाल गांव से करीब पांच किलोमीटर दूर जंगल के बेहद घने हिस्से में तलाशी के दौरान वह युवती दिखाई दी। इतने दिनों तक भूखे रहने और जंगली हालातों का सामना करने के कारण वह बेहद कमजोर हो चुकी थी और चोटिल भी थी।

रेस्क्यू टीम ने बिना वक्त गंवाए उसे मौके पर ही प्राथमिक उपचार (First Aid) दिया। इसके बाद, जवानों ने स्ट्रेचर तैयार किया और उस बेहद कठिन, संकरे व फिसलन भरे 5 किलोमीटर के रास्ते से पैदल चलते हुए उसे मुख्य सड़क तक सुरक्षित पहुंचाया।

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