एक ही स्वतंत्रता सेनानी का नाम इस्तेमाल कर 6 अभ्यर्थियों ने हथिया लीं सीटें, मचा हड़कंप

एक ही स्वतंत्रता सेनानी का नाम इस्तेमाल कर 6 अभ्यर्थियों ने हथिया लीं सीटें, मचा हड़कंप

देवभूमि उत्तराखंड के चिकित्सा शिक्षा जगत से एक बेहद चौंकाने वाला और सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने मेडिकल दाखिलों की पारदर्शी व्यवस्था पर बहुत बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। उत्तराखंड के विभिन्न सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों में नीट-यूजी 2026 काउंसलिंग (NEET-UG 2026 Counselling) की प्रक्रिया के दौरान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित कोटे (Freedom Fighter Dependent Quota) के तहत एक बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर हुआ है। मिली जानकारी के अनुसार, इस कोटे के तहत कुल 9 एमबीबीएस सीटें आवंटित की गई थीं, जिनमें से 6 अभ्यर्थियों ने सफलतापूर्वक दाखिला भी ले लिया था। लेकिन जब इन सभी छह अभ्यर्थियों के प्रवेश दस्तावेजों और आवेदन पत्रों की गहराई से जांच की गई, तो जो सच सामने आया उसने अधिकारियों के भी होश उड़ा दिए। इन सभी छह अलग-अलग अभ्यर्थियों के दस्तावेजों में एक ही स्वतंत्रता संग्राम सेनानी का नाम बतौर पूर्वज या आश्रिता दाता दर्ज पाया गया, जिसके बाद इस पूरे फर्जी खेल का पर्दाफाश हुआ और प्रशासनिक गलियारों में भारी खलबली मच गई।

नीट-यूजी 2026 काउंसलिंग में कैसे खुला इस बड़े कोटे के दुरुपयोग का राज?

किसी भी राज्य में आरक्षित कोटे की सीटें केवल उन्हीं पात्र और वास्तविक हकदार अभ्यर्थियों के लिए होती हैं जो कानूनन उस श्रेणी के दायरे में आते हैं, लेकिन इस बार उत्तराखंड की मेडिकल काउंसलिंग में कुछ ऐसा हुआ जिसने नियमों की धज्जियां उड़ा दीं। नीट-यूजी 2026 के माध्यम से राज्य के कोटे की सीटों पर प्रवेश प्रक्रिया चल रही थी, जिसमें स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के आश्रितों के लिए भी सीटें आरक्षित थीं। काउंसलिंग के दौरान जब कोटे के तहत आवंटित सीटों का मिलान किया जा रहा था, तब अधिकारियों का ध्यान इस बात पर गया कि एक ही कोटे के अंतर्गत कई आवेदन ऐसे आए हैं जिनमें पारिवारिक विवरण और सेनानी का प्रमाण पत्र संदिग्ध प्रतीत हो रहा है। जब कड़ाई से दस्तावेजों की छंटनी की गई और आवेदनों की फाइलों को खंगाला गया, तो यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि जिन छह अभ्यर्थियों ने दाखिला लिया था, उन सभी ने अपने फॉर्म में एक ही स्वतंत्रता सेनानी का नाम इस्तेमाल किया था। एक ही सेनानी के नाम पर फर्जी तरीके से या कागजों में हेरफेर करके एक से अधिक परिवारों द्वारा लाभ उठाने का यह मामला सीधे तौर पर सुनियोजित धोखाधड़ी की ओर इशारा करता है।

फर्जी दस्तावेजों और एक ही नाम के सहारे एमबीबीएस सीट पाने का पूरा खेल

मेडिकल जैसी प्रतिष्ठित और कठिन पढ़ाई के लिए हर साल लाखों छात्र दिन-रात एक करके मेहनत करते हैं, लेकिन कुछ लोग शॉर्टकट और फर्जी दस्तावेजों के सहारे कोटे का गलत लाभ उठाकर योग्य और मेहनती छात्रों का हक मार लेते हैं। इस मामले में भी यही खेल खेला गया जहां स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया में कहीं न कहीं गंभीर चूक या मिलीभगत रही होगी, तभी एक ही सेनानी के नाम पर छह अलग-अलग लोगों ने अपने दावे ठोक दिए और सीटें हासिल कर लीं। काउंसलिंग बोर्ड और संबंधित विभागों के सामने यह सवाल सबसे बड़ा बन गया है कि आखिर बिना उचित सत्यापन के इतने बड़े स्तर पर ये दाखिले कैसे संभव हो गए। क्या इन अभ्यर्थियों ने फर्जी प्रमाण पत्र बनवाए थे या फिर प्रशासनिक स्तर पर दस्तावेजों की जांच के दौरान आंखें मूंद ली गई थीं? इन तमाम सवालों के जवाब तलाशने के लिए अब उच्च स्तर पर जांच बिठा दी गई है ताकि इस रैकेट के असली मास्टरमाइंड तक पहुंचा जा सके।

प्रशासन में हड़कंप, दस्तावेजों की हो रही है सघन जांच और हो सकती है बड़ी कार्रवाई

उत्तराखंड के मेडिकल कॉलेजों में हुए इस फर्जीवाड़े के सामने आने के बाद राज्य के चिकित्सा शिक्षा विभाग और काउंसलिंग कमेटी में अफरा-तफरी का माहौल है। जिन छह अभ्यर्थियों ने एक ही स्वतंत्रता सेनानी के नाम पर एमबीबीएस की सीटें हासिल की हैं और वर्तमान में कॉलेजों में अध्ययनरत हैं, उनके प्रवेश की वैधता पर अब तलवार लटक गई है। प्रशासन ने इन सभी मामलों की नए सिरे से मजिस्ट्रियल या उच्चस्तरीय जांच के आदेश दे दिए हैं, और यदि जांच में इनके दस्तावेज फर्जी पाए जाते हैं, तो न केवल इनके दाखिले तुरंत प्रभाव से रद्द किए जाएंगे बल्कि उनके खिलाफ आपराधिक मुकदमे दर्ज करके कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी। इसके अलावा, उन प्रमाण पत्र जारी करने वाले प्राधिकारियों और दलालों की भी संलिप्तता की जांच की जा रही है जिन्होंने इस तरह के फर्जीवाड़े को अंजाम देने में मदद की थी, ताकि भविष्य में इस तरह की धांधलियों को पूरी तरह से रोका जा सके।