नेपाल बाढ़ पर उत्तराखंड सरकार अलर्ट, हेल्पलाइन जारी; सीएम धामी ने जताया गहरा दुख
पड़ोसी देश नेपाल में हाल ही में मूसलाधार बारिश और प्राकृतिक आपदा के कारण मचे भयंकर कोहराम और जलप्रलय ने हर किसी को झकझोर कर रख दिया है। नेपाल के विभिन्न हिस्सों में आई इस भीषण बाढ़ के कारण न केवल स्थानीय जनजीवन अस्त-व्यस्त हुआ है, बल्कि वहां पर्यटन, तीर्थाटन या व्यावसायिक कार्यों के सिलसिले में गए कई भारतीय और विशेष रूप से उत्तराखंड के नागरिक भी गंभीर रूप से फंस गए हैं। इस नाज़ुक और आपातकालीन स्थिति को गंभीरता से लेते हुए उत्तराखंड सरकार ने तुरंत कड़े कदम उठाए हैं और राज्य स्तर पर हाई अलर्ट घोषित कर दिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी (Pushkar Singh Dhami) ने इस प्राकृतिक त्रासदी पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए नेपाल में फंसे उत्तराखंड के सभी नागरिकों की सुरक्षित वतन वापसी और उन्हें हरसंभव मदद पहुंचाने के लिए युद्ध स्तर पर राहत अभियान शुरू करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही सरकार की ओर से आधिकारिक हेल्पलाइन नंबर भी जारी कर दिए गए हैं ताकि प्रभावित परिवारों को सहायता मिल सके। आइए इस विस्तृत, भौगोलिक रूप से अनुकूलित और गहराई से रची गई रिपोर्ट में जानते हैं कि नेपाल में फंसे लोगों के लिए सरकार ने क्या व्यवस्था की है और मुख्यमंत्री धामी ने क्या निर्देश जारी किए हैं।
नेपाल की प्राकृतिक आपदा और उत्तराखंड के नागरिकों की चिंता
हिमालयी क्षेत्रों और नेपाल की वादियों में हाल के दिनों में जिस तरह से लगातार मूसलाधार बारिश और नदियों के उफान पर आने से तबाही मची है, उसने चारों तरफ डर का माहौल पैदा कर दिया है। नेपाल और भारत के बीच सांस्कृतिक, धार्मिक और पारिवारिक रिश्ते बहुत गहरे हैं, जिसके चलते उत्तर प्रदेश, बिहार और विशेष रूप से उत्तराखंड के तमाम नागरिक किसी न किसी काम से नेपाल आते-जाते रहते हैं। नेपाल के विभिन्न पर्यटन स्थलों और यात्रा मार्गों पर अचानक आई इस बाढ़ के कारण कई लोग होटलों, ऊंचे स्थानों या सुरक्षित शिविरों में फंस गए हैं। जब उत्तराखंड के इन नागरिकों के परिवारों तक वहां के हालात की खबरें पहुंचीं, तो उनके घरों में बेचैनी बढ़ गई और उन्होंने तुरंत राज्य सरकार से मदद की गुहार लगाई। लोगों की इसी चिंता को समझते हुए उत्तराखंड प्रशासन ने बिना एक पल गंवाए तुरंत एक्शन प्लान तैयार किया।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का गहरा दुख और त्वरित निर्देश
नेपाल में हुई इस भारी जनहानि और प्राकृतिक तबाही की खबर मिलते ही उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की है। मुख्यमंत्री कार्यालय से जारी एक आधिकारिक बयान में उन्होंने कहा कि नेपाल की यह आपदा बेहद दुखद है और सरकार वहां फंसे अपने राज्य के प्रत्येक नागरिक की सुरक्षा को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री ने राज्य के मुख्य सचिव, आपदा प्रबंधन विभाग और पुलिस महानिदेशक (DGP) के साथ एक उच्च स्तरीय आपातकालीन बैठक की और निर्देश दिए कि नेपाल स्थित भारतीय दूतावास (Indian Embassy in Nepal) और केंद्र सरकार के साथ लगातार समन्वय स्थापित किया जाए। उन्होंने अधिकारियों से स्पष्ट कहा कि नेपाल में फंसे उत्तराखंड के लोगों की सूची तैयार कर उन्हें सुरक्षित निकालने के लिए हरसंभव राजनयिक और व्यावहारिक प्रयास किए जाएं ताकि किसी भी नागरिक को असुविधा का सामना न करना पड़े।
राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र और हेल्पलाइन नंबर जारी
नेपाल में फंसे लोगों और उनके चिंतित परिजनों की सहायता के लिए उत्तराखंड सरकार ने देहरादून स्थित राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (State Emergency Operation Centre) को 24 घंटे एक्टिव कर दिया है। सरकार की ओर से विशेष हेल्पलाइन नंबर जारी किए गए हैं ताकि कोई भी नागरिक या उसका परिजन तुरंत संपर्क करके अपनी समस्या बता सके। प्रशासन द्वारा जारी किए गए इन नंबरों पर लगातार फोन आ रहे हैं और नोडल अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे हर एक कॉल को गंभीरता से लें और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करें। इसके अलावा, उत्तर प्रदेश और नेपाल की सीमा से लगे जिलों के जिलाधिकारियों को भी यह निर्देश दिए गए हैं कि यदि नेपाल से कोई भी नागरिक सुरक्षित लौटकर सीमा पर पहुंचता है, तो उसके ठहरने, खाने और उनके गंतव्य तक पहुंचाने के लिए उचित परिवहन की मुफ्त व्यवस्था की जाए।
केंद्र सरकार और दूतावास के साथ समन्वय से राहत कार्य तेज
इस अंतरराष्ट्रीय स्तर की आपदा और बचाव अभियान को सुचारू रूप से चलाने के लिए उत्तराखंड सरकार केंद्रीय विदेश मंत्रालय और काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास के साथ लगातार संपर्क में है। नेपाल के स्थानीय प्रशासन के सहयोग से उन इलाकों में राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है जहां संपर्क मार्ग टूट चुके हैं। हेलीकॉप्टर और बचाव दलों की मदद से फंसे हुए लोगों को सुरक्षित स्थानों पर लाने के प्रयास जारी हैं। उत्तराखंड सरकार का यह त्वरित और संवेदनशील कदम यह साबित करता है कि प्रदेश का मुखिया और शासनतंत्र अपने नागरिकों की सुरक्षा के प्रति कितना गंभीर है। संकट की इस घड़ी में जारी किए गए हेल्पलाइन नंबर और प्रशासनिक मुस्तैदी ने नेपाल में फंसे लोगों के परिवारों को एक बड़ा मानसिक संबल प्रदान किया है, और सभी लोग यही उम्मीद कर रहे हैं कि जल्द से जल्द सभी प्रदेशवासी सुरक्षित अपने घर लौट आएंगे।