उत्तराखंड की पहाड़ियों में क्यों उतरे अमेरिकी सैनिक? जंगलों के बीच छिपकर चला रहे हैं गोलियां

उत्तराखंड की पहाड़ियों में क्यों उतरे अमेरिकी सैनिक? जंगलों के बीच छिपकर चला रहे हैं गोलियां

देवभूमि उत्तराखंड की खूबसूरत और शांत वादियों से इस समय एक ऐसी सनसनीखेज और रोमांच से भरी खबर सामने आ रही है, जिसने रक्षा गलियारों से लेकर अंतरराष्ट्रीय मीडिया तक हलचल मचा दी है। आमतौर पर पर्यटक बनकर आने वाले विदेशी सैलानियों की जगह इन दिनों उत्तराखंड के दुर्गम जंगलों और बर्फीली पहाड़ियों के बीच अमेरिका के विशेष प्रशिक्षित सैनिक (US Special Forces) पूरी युद्धक सामग्री और अत्याधुनिक हथियारों के साथ डेरा डाले हुए नजर आ रहे हैं। पहाड़ों की इन वादियों में अचानक गूंजती गोलियों की तड़तड़ाहट, जंगलों के बीच छिपकर दुश्मन को मात देने की रणनीति और हेलीकॉप्टर्स की गर्जना ने स्थानीय लोगों और देश भर के रक्षा प्रेमियों के मन में यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर अमेरिकी सैनिक भारत की इन पहाड़ियों में क्या कर रहे हैं और उनके यहां उतरने के पीछे का असली मकसद क्या है। इस पूरी सैन्य गतिविधि ने एक बार फिर भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते रणनीतिक और रक्षा सहयोग को दुनिया के सामने ला खड़ा किया है, जिससे चीन और पाकिस्तान जैसे पड़ोसी देशों की नींद उड़ना लाजिमी है।

क्या है उत्तराखंड के जंगलों में चल रहे इस सीक्रेट और हाई-वोल्टेज युद्धाभ्यास की असली कहानी?

उत्तराखंड की पहाड़ियों में चल रहे इस खूफिया और रोमांचक घटनाक्रम के पीछे कोई जंग या तनाव नहीं, बल्कि दोनों देशों की सेनाओं के बीच होने वाला एक उच्चस्तरीय और बेहद गोपनीय संयुक्त सैन्य अभ्यास है। भारत और अमेरिका के बीच हर साल होने वाले प्रसिद्ध युद्धाभ्यास 'युद्ध अभ्यास' (Yudh Abhyas) के तहत इस बार अमेरिकी सेना के विशेष कमांडो और भारतीय सेना के जांबाज पर्वतारोही सैनिक एक साथ मिलकर उत्तराखंड के ऊंचे और कठिन पहाड़ी इलाकों में पसीना बहा रहे हैं। इस संयुक्त सैन्य अभ्यास का मुख्य उद्देश्य भारत-चीन सीमा के करीब स्थित पर्वतीय क्षेत्रों की भौगोलिक परिस्थितियों से तालमेल बिठाना, उच्च ऊंचाई वाले क्षेत्रों में युद्ध लड़ने की कला सीखना और दोनों देशों की सेनाओं के बीच आपसी तालमेल को मजबूत करना है। जंगलों के बीच छिपकर गोरिल्ला युद्ध शैली में हमले करना, दुश्मन के ठिकानों को पलक झपकते ही नेस्तनाबूद करना और कठिन से कठिन रास्तों पर हथियारों के साथ मार्च करना इस ट्रेनिंग का सबसे अहम हिस्सा है, जिसे देखने वाले हर व्यक्ति की सांसें थम जाती हैं।

पहाड़ी इलाकों और घने जंगलों में अमेरिकी सैनिकों के लिए क्यों जरूरी है भारत की यह ट्रेनिंग?

अमेरिकी सेना दुनिया की सबसे ताकतवर और आधुनिक हथियारों से लैस सेना मानी जाती है, जिसके पास दुनिया भर के रेगिस्तानों और मैदानी इलाकों में लड़ने का भारी अनुभव है, लेकिन भारत जैसी ऊबड़-खाबड़ और बेहद खतरनाक पहाड़ियों का मुकाबला करना हर किसी के बस की बात नहीं है। उत्तराखंड की यह हिमालयी श्रृंखलाएं अपनी अत्यधिक ठंड, ऑक्सीजन की कमी, अचानक बदलने वाले मौसम और बेहद संकरे रास्तों के लिए जानी जाती हैं, जहां युद्ध लड़ना किसी भी बाहरी सेना के लिए सबसे बड़ी चुनौती होती है। यही वजह है कि अमेरिकी सैनिक भारत के इस कठिन भौगोलिक इलाके में आकर यहां के कमांडोज से पर्वतीय युद्ध (Mountain Warfare) के गुर सीख रहे हैं। भारतीय सेना दुनिया में पर्वतीय युद्ध और ऊंचाई वाले इलाकों में लड़ने के मामले में सबसे अनुभवी और माहिर मानी जाती है, और अमेरिकी सेना का यहां आकर अभ्यास करना इस बात का सबूत है कि वे भारतीय सेना की सामरिक क्षमता और अनुभव का कितना लोहा मानते हैं।

गोलियों की तड़तड़ाहट और हेलीकॉप्टर्स की गूंज से थर्राई वादियां, स्थानीय लोगों में उत्साह

उत्तराखंड के इन शांत और प्राकृतिक नजारों वाले जंगलों में इन दिनों गोलियों की दनादन आवाजें और आधुनिक असॉल्ट राइफलों की गूंज सुनाई दे रही है, जिसे सुनकर एक पल के लिए ऐसा लगता है कि जैसे कोई वास्तविक युद्ध छिड़ गया हो। हालांकि, स्थानीय निवासियों को अब इस बात की जानकारी है कि यह देश की सुरक्षा को और अधिक मजबूत करने के लिए किया जा रहा एक महाअभ्यास है, इसलिए वे इस सैन्य अभ्यास को देखने और देश के सैनिकों का हौसला बढ़ाने में पूरी रुचि ले रहे हैं। अभ्यास के दौरान भारतीय और अमेरिकी सैनिक मिलकर हेलीकॉप्टर असॉल्ट, खोज और बचाव अभियान (Search and Rescue Operations), तथा आतंकवाद विरोधी अभियानों का लाइव सिमुलेशन कर रहे हैं। जिस सटीकता और फुर्ती के साथ दोनों देशों के कमांडो घने जंगलों के बीच से अपने लक्ष्यों को भेद रहे हैं, वह किसी भी फिल्मी एक्शन सीक्वेंस से कहीं ज्यादा खतरनाक और रोमांचक है।

इस महाअभ्यास से भारत और अमेरिका के मजबूत होते रिश्तों पर क्या पड़ेगा रणनीतिक असर?

उत्तराखंड की पहाड़ियों में अमेरिकी सैनिकों की यह मौजूदगी और दोनों देशों की सेनाओं का यह संयुक्त युद्धाभ्यास भू-राजनीतिक (Geopolitical) नजरिए से बहुत बड़े संदेश देता है। इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति बनाए रखने और चीन की बढ़ती विस्तारवादी नीतियों तथा आक्रामकता को लगाम कसने के लिए भारत और अमेरिका का यह रक्षा गठबंधन अब एक मजबूत दीवार बन चुका है। जब अमेरिकी सैनिक भारतीय जवानों के कंधे से कंधा मिलाकर उत्तराखंड की बर्फीली चोटियों और जंगलों में पसीना बहाते हैं, तो यह पूरी दुनिया को यह साफ संदेश देता है कि जरूरत पड़ने पर दोनों महाशक्तियां कंधे से कंधा मिलाकर हर मोर्चे पर खड़ी नजर आएंगी। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के संयुक्त अभ्यासों से दोनों देशों की सेनाओं को एक-दूसरे की आधुनिक तकनीक, हथियारों और रणनीतिक कौशल को नजदीक से समझने का बेहतरीन मौका मिलता है, जिससे भविष्य की हर चुनौती का सामना करने के लिए हमारी सेनाएं पहले से कहीं अधिक घातक और तैयार हो जाती हैं।