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ticket confirmation probability: इंडियन रेलवे में सफर करने का सपना हर किसी का होता है, मगर आजकल ट्रेन में कंफर्म टिकट हासिल करना किसी जादू से कम नहीं। टिकट बुक करते ही स्क्रीन पर 'वेटिंग लिस्ट' का नंबर देखकर दिल बैठ जाता है। मगर क्या आपने कभी सोचा कि वेटिंग लिस्ट का कौन सा नंबर आखिरकार कंफर्मेशन की मंजिल तक पहुंच सकता है? रेलवे का एक खास फॉर्मूला इस रहस्य को सुलझाने में मदद कर सकता है।

रेलवे के आंकड़े बताते हैं कि औसतन 21% यात्री आखिरी मौके पर अपनी बुकिंग कैंसिल कर देते हैं। यानी स्लीपर डिब्बे की 71 सीटों में से करीब 14 सीटें खाली हो जाती हैं। इसके अलावा चार से पांच प्रतिशत यात्री ऐसे भी होते हैं जो टिकट होने के बावजूद सफर पर नहीं निकलते। नतीजा? कुल मिलाकर लगभग 25% सीटें खाली रह जाती हैं। अब अगर गणित लगाएं तो वेटिंग लिस्ट में 180वें नंबर तक का टिकट भी कंफर्म होने की उम्मीद रखता है। जी हां, आपने सही सुना—180 तक!

तत्काल कोटा- उम्मीद की आखिरी किरण

रेलवे के पास एक और तुरुप का इक्का है- इमरजेंसी कोटा। हर क्लास के लिए कुछ सीटें इस कोटे में आरक्षित होती हैं, जो आखिरी समय पर जरूरतमंद यात्रियों को दी जाती हैं। मगर ये कोटा कितना और किसे मिलेगा, ये रेलवे का अपना गुप्त खेल है। फिर भी इस फॉर्मूले को समझकर आप अपने टिकट के कंफर्म होने की संभावना का अंदाजा लगा सकते हैं।

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