22 लाख टन मलबे के नीचे दबी 2359 इमारतें, खौफनाक तस्वीरों ने दहलाया दिल

22 लाख टन मलबे के नीचे दबी 2359 इमारतें, खौफनाक तस्वीरों ने दहलाया दिल

पड़ोसी देश नेपाल से इस वक्त बेहद दर्दनाक और डराने वाली तस्वीरें सामने आ रही हैं, जिसने पूरी दुनिया को झकझोर कर रख दिया है। नेपाल इन दिनों एक भीषण और अकल्पनीय जल-प्रलय (Water Disaster in Nepal) के दौर से गुजर रहा है, जहां प्राकृतिक आपदा ने भारी तबाही मचाते हुए जनजीवन को पूरी तरह से अस्त-व्यस्त कर दिया है। मूसलाधार बारिश, अचानक आए भयंकर भूस्खलन और बाढ़ के चलते देश के कई हिस्से मलबे के ढेर में तब्दील हो चुके हैं। स्थिति इतनी भयावह है कि सरकारी आंकड़ों और शुरुआती रिपोर्टों के मुताबिक करीब 22 लाख टन भारी-भरकम मलबे के नीचे हजारों घर और इमारतें पूरी तरह दब चुकी हैं। इस विनाशकारी जल-प्रलय ने न केवल संपत्ति को भारी नुकसान पहुंचाया है, बल्कि हजारों परिवारों को आसमान के नीचे लाने के साथ-साथ उनके जीने का सहारा भी छीन लिया है।

22 लाख टन मलबे के नीचे जमींदोज हुईं इमारतें

नेपाल के आपदा प्रबंधन प्राधिकरण से मिली जानकारी के अनुसार, इस बार का जल-प्रलय पिछले कई दशकों के रिकॉर्ड तोड़ चुका है। पहाड़ों से खिसकती चट्टानों और उफनती नदियों के कारण आई बाढ़ के साथ आए मलबे ने रिहायशी इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया है। ताजा ग्राउंड रिपोर्ट्स बताती हैं कि नेपाल के विभिन्न प्रभावित क्षेत्रों में कुल 2,359 से अधिक इमारतें और पक्के मकान इस 22 लाख टन मलबे के नीचे पूरी तरह समा चुके हैं। मिट्टी और पत्थरों के बड़े-बड़े ढेर जम जाने के कारण राहत और बचाव दलों को मलबे के भीतर दबे लोगों तक पहुंचने में भारी मशक्कत का सामना करना पड़ रहा है। कई इलाकों में तो सड़कों और रास्तों का नामोनिशान मिट चुका है, जिससे राहत सामग्री पहुंचाना भी एक बड़ी चुनौती बन गया है।

84 हजार से अधिक लोग हुए बेघर, खुले आसमान के नीचे रात बिताने को मजबूर

इस भयंकर प्राकृतिक आपदा का सबसे बड़ा और क्रूर असर आम जनता पर पड़ा है। अपने आशियानों को पल भर में मलबे में तब्दील होते देखने वाले करीब 84,000 लोग पूरी तरह बेघर हो चुके हैं। इनमें छोटे-छोटे मासूम बच्चों से लेकर बुजुर्ग और महिलाएं शामिल हैं, जो अब राहत शिविरों या सड़कों के किनारे खुले आसमान के नीचे शरण लेने को मजबूर हैं। खाने-पीने की चीजों, साफ पीने के पानी और बुनियादी दवाओं की भारी किल्लत के कारण स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। स्थानीय प्रशासन और नेपाल सरकार प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने और उन्हें फौरी राहत मुहैया कराने के लिए युद्धस्तर पर जुटी हुई है, लेकिन आपदा का दायरा इतना बड़ा है कि सरकारी संसाधन कम पड़ते नजर आ रहे हैं।

खौफनाक और दिल दहला देने वाली तस्वीरें वायरल

सोशल मीडिया से लेकर मुख्यधारा की मीडिया तक, नेपाल से सामने आ रही जल-प्रलय की तस्वीरें और वीडियो किसी के भी रोंगटे खड़े करने के लिए काफी हैं। तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि कैसे कभी गुलजार रहने वाले इलाके अब मिट्टी और कीचड़ के समंदर में तब्दील हो चुके हैं। कई मंजिला इमारतें मलबे के बोझ से झुक गई हैं या पूरी तरह जमींदोज हो चुकी हैं। नदियों का पानी खतरे के निशान से ऊपर बह रहा है और पुल तथा रास्ते बह जाने के कारण कई गांव पूरी तरह से देश के बाकी हिस्सों से कट चुके हैं। इन खौफनाक दृश्यों को देखकर हर किसी की आंखें नम हैं और पूरी मानवता इस संकट की घड़ी में नेपाल के साथ खड़ी नजर आ रही है।

नेपाल सरकार और अंतरराष्ट्रीय मदद की गुहार

इस अभूतपूर्व राष्ट्रीय संकट से निपटने के लिए नेपाल सरकार ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय और पड़ोसी देशों से बड़े पैमाने पर मदद की अपील की है। सेना, पुलिस और स्थानीय स्वयंसेवक मिलकर दिन-रात रेस्क्यू ऑपरेशन चला रहे हैं, ताकि मलबे में फंसे संभावित जीवित लोगों को बाहर निकाला जा सके और घायलों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया जा सके। हालांकि, लगातार खराब मौसम और बारिश के कारण राहत कार्यों में बार-बार बाधा उत्पन्न हो रही है। मौसम विभाग ने आने वाले कुछ दिनों तक और अधिक बारिश की आशंका जताई है, जिससे प्रशासन और स्थानीय नागरिकों की चिंताएं और अधिक बढ़ गई हैं।