South China Sea पर फिर छिड़ा भयंकर घमासान! जापान समेत 14 देशों के इस एक बयान से पूरी तरह बिलबिला उठा 'ड्रैगन'
रणनीतिक और आर्थिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माने जाने वाले दक्षिण चीन सागर (South China Sea) को लेकर वैश्विक महाशक्तियों के बीच एक बार फिर से भयंकर घमासान छिड़ गया है। हमेशा दादागीरी दिखाने वाले और इस पूरे समुद्री क्षेत्र पर अपना एकाधिकार जताने वाले चीन को इस बार अंतरराष्ट्रीय मंच पर बहुत बड़ा झटका लगा है। जापान समेत दुनिया के 14 प्रमुख लोकतांत्रिक देशों ने एक साथ सुर में सुर मिलाते हुए चीन की विस्तारवादी नीतियों और सैन्य आक्रामकता के खिलाफ एक बेहद कड़ा और साझा बयान (Joint Statement) जारी कर दिया है। 14 देशों की इस जबरदस्त लामबंदी को देखकर बीजिंग (ड्रैगन) पूरी तरह से बिलबिला उठा है और उसने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी है।
बीजिंग की दादागीरी के खिलाफ एकजुट हुईं 14 वैश्विक शक्तियां
अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक हलकों से आ रही रिपोर्टों के अनुसार, जापान की अगुवाई में अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, फिलीपींस और कई यूरोपीय व एशियाई देशों ने दक्षिण चीन सागर में जारी सैन्य गतिरोध पर गहरी चिंता व्यक्त की है। 14 देशों द्वारा जारी किए गए इस संयुक्त घोषणापत्र में बिना किसी लाग-लपेट के सीधे तौर पर चीन का नाम लिया गया है। देशों ने स्पष्ट कहा है कि अंतरराष्ट्रीय कानूनों (UNCLOS) को ताक पर रखकर समुद्र में कृत्रिम द्वीप बनाना, दूसरे देशों के जहाजों को धमकाना और नौवहन की स्वतंत्रता (Freedom of Navigation) को बाधित करना अब किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यह साझा बयान सीधे तौर पर चीन के अवैध दावों को खारिज करता है।
फिलीपींस और ताइवान के साथ चीन के बढ़ते टकराव पर बढ़ा वैश्विक तनाव
पिछले कुछ महीनों के दौरान दक्षिण चीन सागर के भीतर, विशेष रूप से फिलीपींस के विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) और ताइवान जलडमरूमध्य में चीनी कोस्ट गार्ड के जहाजों द्वारा की गई हिंसक हरकतों ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा था। चीन लगातार पानी की बौछारें छोड़कर और जानबूझकर टक्कर मारकर छोटे देशों के जहाजों को डराने की कोशिश कर रहा था। 14 देशों के रक्षा और विदेश मंत्रियों ने इस बात को रेखांकित किया है कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की शांति पूरे वैश्विक व्यापार के लिए रीढ़ की हड्डी है। ऐसे में किसी एक देश की गुंडागर्दी के कारण पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को खतरे में नहीं डाला जा सकता।
14 देशों के वार से बौखलाया चीन, आंतरिक मामलों में दखल का लगाया आरोप
इस संयुक्त बयान के आते ही चीनी विदेश मंत्रालय और बीजिंग के रक्षा प्रवक्ता पूरी तरह भड़क गए हैं। चीन ने हमेशा की तरह रोना रोते हुए इस बयान को पूरी तरह से राजनीति से प्रेरित और पूर्वाग्रह से ग्रसित बताया है। चीनी प्रशासन ने तीखे शब्दों में कहा है कि बाहरी शक्तियों को दक्षिण चीन सागर के क्षेत्रीय विवादों में दखल देने का कोई अधिकार नहीं है और वे अपने संप्रभुता की रक्षा करना अच्छे से जानते हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि 14 देशों की इस अभूतपूर्व एकजुटता ने चीन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पूरी तरह अलग-थलग (Isolate) कर दिया है और अब ड्रैगन के लिए समुद्र में मनमानी करना पहले जितना आसान नहीं रहने वाला है।