मिडटर्म के बाद अब ईरान खत्म कर देगा ट्रंप की बची-खुची ताकत, मोजतबा खामेनेई ने किया ‘बहुत बड़ा’ ऐलान
अंतरराष्ट्रीय राजनीति के गलियारों से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है, जहां पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक समीकरण एक बार फिर पूरी तरह से बदलते हुए दिखाई दे रहे हैं। ईरान की ओर से अमेरिका और खास तौर पर डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के खिलाफ एक बेहद आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया गया है। ईरान के शीर्ष नेतृत्व से जुड़े घटनाक्रमों के बीच मोजतबा खामेनेई की ओर से एक ऐसा बड़ा ऐलान किया गया है, जिसने अमेरिकी राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है। इस ताजा घोषणा के बाद यह कयास लगाए जाने लगे हैं कि आने वाले दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच का संघर्ष एक नए और बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच सकता है।
मोजतबा खामेनेई का वह विस्फोटक बयान जिसने अमेरिका और ट्रंप खेमे में मचा दी भारी हलचल
ईरान के भीतर मोजतबा खामेनेई की बढ़ती भूमिका और उनके हालिया बयानों ने वैश्विक स्तर पर कूटनीतिक हलकों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। सामने आ रही रिपोर्ट्स के मुताबिक, मिडटर्म चुनावों के बाद के राजनीतिक परिदृश्य को देखते हुए मोजतबा खामेनेई ने स्पष्ट शब्दों में यह चेतावनी दी है कि ईरान अब अमेरिकी धमकियों या प्रतिबंधों के आगे झुकने वाला नहीं है। इस ऐलान में सीधे तौर पर यह कहा गया है कि ट्रंप प्रशासन की नीतियों और उनकी बची-खुची कूटनीतिक तथा आर्थिक ताकत को अब पश्चिम एशिया से पूरी तरह नेस्तनाबूद कर दिया जाएगा। इस कड़े रुख के बाद से दोनों देशों के बीच तनाव अपने चरम पर पहुंच गया है और विश्लेषक इसे एक बड़े टकराव की शुरुआत मान रहे हैं।
मिडटर्म चुनावों के बाद क्यों बदल गए हैं तेहरान और वॉशिंगटन के बीच कूटनीतिक समीकरण
अमेरिका में हुए हालिया मिडटर्म चुनावों के नतीजों ने वहां की आंतरिक राजनीति के साथ-साथ विदेश नीति पर भी गहरा असर डाला है। डोनाल्ड ट्रंप और उनके समर्थकों द्वारा ईरान को लेकर अपनाई जाने वाली सख्त नीतियों का तेहरान में लगातार कड़ा विरोध होता रहा है। ईरान के रणनीतिकारों का मानना है कि अमेरिकी चुनावों के बाद घरेलू मोर्चे पर व्यस्तताओं का फायदा उठाकर वे अपने क्षेत्रीय प्रभाव को और अधिक मजबूत कर सकते हैं। मोजतबा खामेनेई का यह बयान इसी सोची-समझि रणनीति का एक हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें वे अमेरिका की बदलती हुई राजनीतिक स्थिति का पूरा लाभ उठाकर उसे वैचारिक और रणनीतिक रूप से पटखनी देने की बात कह रहे हैं।
अमेरिकी नीतियों और प्रतिबंधों के खिलाफ ईरान की नई और आक्रामक सैन्य व रणनीतिक रणनीति
पिछले कुछ वर्षों में अमेरिका द्वारा ईरान पर लगाए गए कड़े आर्थिक प्रतिबंधों ने वहां की आम जनता और अर्थव्यवस्था को प्रभावित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। इसके बावजूद, ईरान ने घुटने टेकने के बजाय अपने रक्षा क्षेत्र, मिसाइल कार्यक्रम और प्रॉक्सी नेटवर्क को और अधिक मजबूत करने का रास्ता चुना है। मोजतबा खामेनेई के इस ताजा ऐलान के पीछे यही मुख्य संदेश है कि अमेरिकी दबाव अब तेहरान की नीतियों को प्रभावित नहीं कर सकता। ईरान के सैन्य और रणनीतिक विशेषज्ञ अब इस बात पर काम कर रहे हैं कि कैसे अमेरिकी और पश्चिमी ताकतों के प्रभाव को खाड़ी देशों और मध्य पूर्व के अन्य हिस्सों से धीरे-धीरे पूरी तरह से कमजोर कर दिया जाए।
पश्चिम एशिया में मंडरा रहे बड़े युद्ध के बादल और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाला इसका गंभीर असर
ईरान और अमेरिका के बीच चल रहा यह वाकयुद्ध केवल दोनों देशों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और तेल बाजारों पर पड़ सकता है। पश्चिम एशिया दुनिया का सबसे बड़ा ऊर्जा आपूर्ति केंद्र है, और यदि यहां किसी भी प्रकार का बड़ा सैन्य संघर्ष भड़कता है, तो कच्चे तेल की कीमतों में बेतहाशा उछाल आ सकता है। मोजतबा खामेनेई के इस कड़े ऐलान के बाद अंतरराष्ट्रीय समुदाय के तमाम देश बेहद चिंता में हैं। संयुक्त राष्ट्र और अन्य शांतिप्रिय देश दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील कर रहे हैं, लेकिन ज़मीन पर हालात लगातार बिगड़ते हुए नजर आ रहे हैं और कोई भी पक्ष पीछे हटने को तैयार नहीं है।
अंतरराष्ट्रीय राजनीति और कूटनीति के जानकारों की इस भू-राजनीतिक घटनाक्रम पर क्या है बड़ी राय
दुनियाभर के रक्षा विशेषज्ञ और भू-राजनीतिक विश्लेषक इस बात का आकलन कर रहे हैं कि मोजतबा खामेनेई का यह बयान महज एक जुबानी जंग है या फिर इसके पीछे कोई ठोस और खौफनाक सैन्य योजना छिपी हुई है। अमेरिकी प्रशासन भी इस मामले को लेकर पूरी तरह सतर्क हो गया है और अपने क्षेत्रीय सहयोगियों की सुरक्षा को पुख्ता करने में जुट गया है। ईरान की यह आक्रामकता आने वाले समय में वैश्विक राजनीति के नक्शे को पूरी तरह बदल सकती है। जैसे-जैसे दिन बीत रहे हैं, इस मुद्दे पर दुनिया की निगाहें टिकी हुई हैं कि आखिर ट्रंप प्रशासन इस खुली चुनौती का जवाब किस अंदाज में देता है और क्या मध्य पूर्व एक बार फिर किसी बड़े विध्वंस की ओर बढ़ने जा रहा है।