ईरान की तगड़ी चाल, अमेरिका को ऐसी जगह लगी चोट कि संभलना हुआ मुश्किल

ईरान की तगड़ी चाल, अमेरिका को ऐसी जगह लगी चोट कि संभलना हुआ मुश्किल

ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने एक नई चिंता को जन्म दिया है। सवाल सिर्फ युद्ध का नहीं है बल्कि इस बात का भी है कि अगर संघर्ष लंबे समय तक जारी रहा तो अमेरिका अपनी सैन्य ताकत को कितने समय तक बनाए रख पाएगा। ताजा रिपोर्ट में दावा किया गया है कि निरंतर सैन्य कार्रवाई का असर अब अमेरिका के हथियारों के भंडार पर भी दिखने लगा है।

मिसाइलों का स्टॉक तेजी से घट रहा

सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका के पास मौजूद कई महत्वपूर्ण रक्षा प्रणालियों का स्टॉक तेजी से कम हो रहा है। खासतौर पर THAAD और पैट्रियट इंटरसेप्टर जैसी मिसाइल रक्षा प्रणालियों का भंडार लगभग आधा रह गया है। ये सिस्टम दुश्मन की मिसाइलों को हवा में ही नष्ट करने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं और अमेरिका की रक्षा रणनीति का अहम हिस्सा माने जाते हैं।

भविष्य के युद्धों पर पड़ सकता है असर

रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि मौजूदा गति से सैन्य अभियान जारी रहता है तो अमेरिका के लिए भविष्य में किसी बड़े संघर्ष का सामना करना मुश्किल हो सकता है। विशेष रूप से चीन या उत्तर कोरिया जैसे संभावित प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ सैन्य क्षमता बनाए रखना चुनौती बन सकता है। रक्षा विशेषज्ञ इसी वजह से हथियारों की निरंतर हो रही खपत को लेकर चिंता जता रहे हैं।

संघर्षविराम खत्म होने के बाद बढ़ी चिंता

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले ही संकेत दे चुके हैं कि ईरान के साथ संघर्षविराम अब समाप्त हो चुका है। ऐसे में आने वाले दिनों में सैन्य कार्रवाई तेज होने की आशंका जताई जा रही है। यदि ऐसा होता है तो हथियारों की मांग और खपत दोनों में और बढ़ोतरी हो सकती है।

शुरुआती अभियान में हुआ बड़े पैमाने पर इस्तेमाल

रिपोर्ट के अनुसार युद्ध के शुरुआती चरण में अमेरिकी सेना ने लंबी दूरी तक सटीक हमला करने वाली और मिसाइल रक्षा के लिए इस्तेमाल होने वाली हजारों आधुनिक मिसाइलों का उपयोग किया। यही वजह है कि अब हथियारों के उपलब्ध भंडार पर दबाव बढ़ता दिखाई दे रहा है।

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