कोरोना के बाद महामारी बन रहा इबोला? WHO ने बताई बीमारी फैलने की वजह

कोरोना के बाद महामारी बन रहा इबोला? WHO ने बताई बीमारी फैलने की वजह

दुनिया भर में स्वास्थ्य को लेकर एक बार फिर गहरी चिंता और खौफ का माहौल बनता जा रहा है। कोरोना वायरस के खौफनाक दौर के बाद अब एक बार फिर इबोला वायरस (Ebola Virus) ने विकराल रूप धारण करना शुरू कर दिया है। पिछले कुछ महीनों के भीतर अफ्रीका के कई हिस्सों में इस खतरनाक बीमारी की वजह से हजारों लोगों की मौत हो चुकी है, जिसके बाद विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) समेत तमाम देशों की सरकारें पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गई हैं। यह तेजी से फैलता हुआ संक्रमण अब एक गंभीर वैश्विक चुनौती बनता जा रहा है, जिस पर तुरंत नियंत्रण पाना बेहद आवश्यक हो गया है।

क्या है इबोला वायरस का ताजा संकट और आंकड़े

सेंट्रल अफ्रीकी देश डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) से सामने आए ताजा सरकारी आंकड़े बेहद डराने वाले हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय और वैश्विक रिपोर्टों के अनुसार, पिछले चार महीनों यानी मई के मध्य से लेकर अब तक इबोला के 6,100 से अधिक मामलों की आधिकारिक पुष्टि हो चुकी है। इनमें से 3,000 से ज्यादा लोगों की दर्दनाक मौत हो चुकी है। संक्रमण की यह रफ्तार इतनी तेज है कि पिछले कुछ हफ्तों में मरने वालों का आंकड़ा तेजी से ऊपर गया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के जानकारों का मानना है कि साल 2026 का यह इबोला प्रकोप पिछले तमाम रिकॉर्ड तोड़ते हुए इतिहास के सबसे खतरनाक रूपों में शामिल होता जा रहा है।

डब्ल्यूएचओ (WHO) और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चेतावनी

विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस एडनॉम घेब्रेयेसस ने इस स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए स्पष्ट किया है कि जब तक संक्रमण की हर एक कड़ी (Transmission Chains) को खोजकर पूरी तरह तोड़ा नहीं जाएगा, तब तक इस महामारी पर काबू पाना नामुमकिन होगा। अमेरिकी रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र (CDC) की रिपोर्ट के मुताबिक भी इस वायरस को रोकने के लिए किए जा रहे प्रयास जमीनी स्तर पर नाकाफी साबित हो रहे हैं। कई इलाकों में यह बीमारी बेकाबू होकर लगातार फैल रही है, जिससे कांगो के साथ-साथ उसके पड़ोसी देशों और पूरे अफ्रीकी क्षेत्र पर बड़ा संकट मंडरा रहा है।

बीमारी के तेजी से फैलने की मुख्य वजहें

स्वास्थ्य विशेषज्ञों और प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, इस बार इबोला के इस कदर बेकाबू होने के पीछे कई जमीनी और सामाजिक कारण जिम्मेदार हैं। सबसे बड़ा कारण यह है कि प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी तंत्र (Surveillance System) काफी कमजोर है। इसके अलावा इलाकों में फैली असुरक्षा, स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्यकर्मियों का विरोध और जागरूकता की भारी कमी के कारण संक्रमित मरीजों की शुरुआती दौर में पहचान नहीं हो पा रही है। एक रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 60 फीसदी से ज्यादा मौतें अस्पतालों के बाहर हो रही हैं, जिससे समय रहते मरीजों का इलाज और ट्रैकिंग करना प्रशासन के लिए असंभव सा बनता जा रहा है।

बंडिबुग्यो (Bundibugyo) स्ट्रेन और मेडिकल चुनौतियों का असर

इस बार फैल रहे इबोला प्रकोप के पीछे मुख्य रूप से 'बंडिबुग्यो वायरस' (Bundibugyo Virus) स्ट्रेन सक्रिय है। सबसे बड़ी मेडिकल चुनौती यह है कि इस विशेष स्ट्रेन के खिलाफ अभी तक कोई भी पुख्ता वैक्सीन या अचूक इलाज बाजार में उपलब्ध नहीं है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक और दवा निर्माता कंपनियां तेजी से प्रभावी टीकों और उपचार के विकल्पों को विकसित करने और उनका परीक्षण करने में जुटी हुई हैं, लेकिन तब तक यह वायरस आम जनता की जिंदगी के लिए गंभीर खतरा बना हुआ है।

आम जनजीवन पर भारी असर और आवाजाही पर पहरा

इबोला के इस भीषण प्रकोप ने स्थानीय लोगों के रोजमर्रा के जीवन को पूरी तरह से ठप कर दिया है। सबसे ज्यादा प्रभावित प्रांतों जैसे किटुरी (Ituri) और उत्तरी किवु से लोग अपनी जान बचाने के लिए सुरक्षित स्थानों की तरफ पलायन करने को मजबूर हो चुके हैं। सार्वजनिक परिवहन सेवाएं लगभग बंद सी हो चुकी हैं और बाजारों में सन्नाटा पसरा हुआ है। संक्रमित शवों के अंतिम संस्कार और देखरेख में सुरक्षा मानकों की अनदेखी के चलते संक्रमण और अधिक तीव्र गति से पैर पसार रहा है।

वैश्विक स्तर पर सतर्कता और बचाव के उपाय

चूंकि वैश्विक व्यापार और अंतरराष्ट्रीय आवाजाही के चलते किसी भी महामारी के एक देश से दूसरे देश तक फैलने का खतरा हमेशा बना रहता है, इसलिए यूएन (UN) और तमाम देशों के स्वास्थ्य विभाग सीमावर्ती क्षेत्रों में विशेष निगरानी रख रहे हैं। भारत समेत कई अन्य देशों ने भी अपने यहां एयरपोर्ट्स और यात्रा मार्ग पर एडवाइजरी तथा स्क्रीनिंग प्रक्रिया को लेकर सतर्कता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने मिलकर तुरंत बड़े पैमाने पर राहत सामग्री, मेडिकल स्टाफ और वित्तीय सहायता नहीं पहुंचाई, तो यह क्षेत्रीय संकट पूरी दुनिया के लिए एक विकराल महामारी का रूप ले सकता है।