140 करोड़ लोगों का सवाल है, ट्रंप के नए बिल पर भारत ने अमेरिका को दिया मुंहतोड़ जवाब
अमेरिकी संसद द्वारा रूस और ईरान पर नकेल कसने के लिए पारित किए गए सख्त प्रतिबंध विधेयक पर भारत ने कूटनीतिक और स्पष्ट रुख अपनाया है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने गुरुवार को आधिकारिक बयान जारी करते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने अमेरिकी कांग्रेस में इस कानून के पारित होने का संज्ञान लिया है और पूरे मामले के आगामी घटनाक्रमों पर लगातार पैनी नजर बनाई हुई है।
भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी पुरानी प्रतिबद्धता दोहराते हुए दो टूक कहा कि देश अपनी 1.4 अरब आबादी की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह से संकल्पित है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि भारत बदलते वैश्विक बाजार के समीकरणों को देखते हुए विभिन्न और विविध स्रोतों से ऊर्जा आपूर्ति हासिल करने की अपनी नीति पर अडिग रहेगा।
भारतीय उद्योग जगत के साथ मिलकर रणनीति बनाएगी सरकार: विदेश मंत्रालय
रूस से जुड़े ऊर्जा प्रतिबंधों के संभावित प्रभावों पर विदेश मंत्रालय ने कहा कि केंद्र सरकार किसी भी नई चुनौती से निपटने के लिए भारतीय व्यापार और उद्योग निकायों के साथ मिलकर काम करेगी। सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि वैश्विक व्यापार और घरेलू औद्योगिक हितों पर किसी भी बाहरी पाबंदी का प्रतिकूल असर न पड़े। यह बयान ऐसे नाजुक समय पर आया है जब अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने 'लिंडसे ओ ग्राहम सैंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026' को हरी झंडी दिखाई है।
इस कानून के तहत राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रूस पर कड़े प्रतिबंध लगाने और भारत व चीन जैसे तेल-गैस आयातक साझीदारों पर भारी आयात शुल्क थोपने के विशेष अधिकार मिल रहे हैं। सीनेट से पिछले महीने 86-11 के भारी मतों से मंजूरी मिलने के बाद बुधवार शाम प्रतिनिधि सभा ने इसे 262 के मुकाबले 159 वोटों से पास कर दिया, जिसके बाद इसे अंतिम हस्ताक्षर के लिए ट्रंप के पास भेजा गया है।
सदन में मतदान का समीकरण और डेमोक्रेट्स की चिंताएं
प्रतिनिधि सभा में हुए मतदान के दौरान 203 रिपब्लिकन, 58 डेमोक्रेट और एक निर्दलीय सांसद ने विधेयक का समर्थन किया, जबकि 7 रिपब्लिकन और 152 डेमोक्रेट सांसदों ने इसके विरोध में मतदान किया। डेमोक्रेटिक सांसदों का मुख्य विरोध प्रतिबंधों को लेकर नहीं, बल्कि राष्ट्रपति ट्रंप को टैरिफ से जुड़े असीमित और असाधारण अधिकार सौंपने को लेकर था।
सदन की बहस में डेमोक्रेट सांसद रिचर्ड नील ने तीखा सवाल उठाते हुए कहा कि वे राष्ट्रपति को आयात शुल्क लगाने के और अधिक अनियंत्रित अधिकार देने के पक्ष में बिल्कुल नहीं हैं। यह विधेयक दक्षिण कैरोलिना के दिवंगत रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम के नाम पर तैयार किया गया है, जिनका जुलाई में निधन हो गया था और जिन्होंने इस कानून के लिए साल भर से ज्यादा समय तक समर्थन जुटाया था।
रूसी 'गुप्त बेड़े' पर शिकंजा और सीनेटर की भारत-चीन को चेतावनी
इस नए कानून का सीधा लक्ष्य रूस के शीर्ष नेतृत्व और ऊर्जा ढांचे को पंगु बनाने के साथ-साथ उन जहाजों के 'गुप्त बेड़े' (Shadow Fleet) पर प्रहार करना है, जिनकी मदद से मॉस्को प्रतिबंधों को बाईपास कर तेल की आपूर्ति कर रहा है। विधेयक में रूस के तेल और गैस पर निर्भरता घटाने के लिए भारत और चीन सहित कई देशों पर कड़े टैरिफ लगाने का रास्ता साफ किया गया है। कानून पास होते ही डेमोक्रेटिक सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने प्रेस के सामने बेहद कड़ा बयान देते हुए कहा कि चीन और भारत के लिए बेहतर यही होगा कि वे अपनी तेल और गैस की जरूरतें रूस के बजाय किसी अन्य विकल्प से पूरी करना शुरू करें।
शी जिनपिंग के दौरे और 3 नवंबर के चुनावों से ठीक पहले टाइमिंग का खेल
इस विधेयक का पारित होना अंतरराष्ट्रीय और अमेरिकी घरेलू राजनीति के लिहाज से बेहद अहम मोड़ पर हुआ है। यह विधायी मंजूरी चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की अमेरिका की आधिकारिक यात्रा से ठीक कुछ दिन पहले सामने आई है। साथ ही प्रतिनिधि सभा ने इस बिल को 3 नवंबर के आगामी चुनावों से ठीक पहले सदन के अंतिम कार्यदिवस पर मंजूरी दी है। यह पूरा घटनाक्रम ऐसे वक्त में घटा है जब यूक्रेन समर्थक लॉबी वॉशिंगटन में बेहद सक्रिय हो चुकी है और 'यूक्रेन के लिए अमेरिकी गठबंधन' द्वारा आयोजित 'यूक्रेन एक्शन समिट' के तहत सांसद लगातार कीव के पक्ष में और रूस के खिलाफ सख्त आर्थिक फैसलों के लिए पैरवी कर रहे हैं।