पाकिस्तान का अफगानिस्तान पर बड़ा हवाई हमला: कंधार में हुए जोरदार धमाकों से दहल उठा इलाका
दक्षिण एशिया के भू-राजनीतिक परिदृश्य में इस समय एक ऐसी दहला देने वाली और गंभीर बड़ी खबर सामने आ रही है, जिसने एक बार फिर से दो पड़ोसी देशों के बीच सुलग रही आग को भड़का दिया है। पाकिस्तान की वायुसेना ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय सीमाओं और संप्रभुता के तमाम नियमों को दरकिनार करते हुए पड़ोसी देश अफगानिस्तान की सीमा के भीतर घुसकर ताबड़तोड़ हवाई हमले (Airstrikes) किए हैं। प्राप्त शुरुआती और सनसनीखेज रिपोर्टों के अनुसार, अफगानिस्तान के रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण शहर कंधार और उसके आसपास के इलाकों में एक के बाद एक कई जोरदार धमाके सुने गए हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में भारी दहशत और अफरा-तफरी का माहौल पैदा हो गया है। पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों द्वारा इस सैन्य कार्रवाई में लगभग 10 अलग-अलग प्रमुख ठिकानों और अड्डों को निशाना बनाए जाने की पुष्टि की गई है, जिससे दोनों देशों के बीच पहले से ही खराब चल रहे कूटनीतिक और सैन्य संबंध अब टूटने की कगार पर पहुंच गए हैं। आइए इस विशेष अंतरराष्ट्रीय और सामरिक रिपोर्ट में गहराई से जानते हैं कि इस अचानक हुए खूनी हवाई हमले के पीछे की पूरी इनसाइड स्टोरी क्या है और इसके क्षेत्रीय राजनीति पर क्या गंभीर परिणाम हो सकते हैं।
कंधार में अचानक गूंजे धमाके और पाकिस्तानी एयरस्ट्राइक से दहल उठी अफगान सीमा
घटनाक्रम के मुताबिक, जब आम दिनों की तरह कंधार और उससे सटी सीमाई पट्टियों पर लोग अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में व्यस्त थे, तभी अचानक आसमान को चीरते हुए पाकिस्तानी सैन्य विमानों की गड़गड़ाहट सुनाई दी। इसके कुछ ही पलों के भीतर कंधार के विभिन्न इलाकों में एक के बाद एक कई भयंकर बम धमाके हुए, जिनकी गूंज दूर-दूर तक सुनाई दी। चश्मदीदों और स्थानीय सूत्रों के अनुसार, इन हवाई हमलों में आवासीय बस्तियों के पास स्थित संदिग्ध ठिकानों और चौकियों को टारगेट किया गया था। इस अचानक हुई सैन्य कार्रवाई से स्थानीय नागरिकों के बीच भारी डर बैठ गया है और लोग अपनी जान बचाने के लिए सुरक्षित ठिकानों की तरफ भागते हुए नजर आए। इस एयरस्ट्राइक के बाद से अफगानिस्तान की सत्ता पर काबिज तालिबान प्रशासन और पाकिस्तानी सेना के बीच किसी भी वक्त एक बड़े और खूनी सैन्य टकराव छिड़ने की आशंका पूरी तरह से गहरा गई है।
सीमा पर बढ़ते तनाव और आतंकवाद के मुद्दे पर दोनों देशों के बीच छिड़ी खुली जंग
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच पिछले कुछ महीनों से सीमा पार आतंकवाद, तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) की गतिविधियों और घुसपैठ को लेकर लगातार जुबानी जंग और झड़पें देखने को मिल रही थीं। इस्लामाबाद लगातार यह आरोप लगाता रहा है कि अफगान धरती का इस्तेमाल पाकिस्तान के खिलाफ आतंकवादी हमलों को अंजाम देने के लिए किया जा रहा है, जबकि काबुल प्रशासन इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करता आया है। दोनों पक्षों के बीच कूटनीतिक वार्ताओं के तमाम दरवाजे बंद होने के बाद अब पाकिस्तान ने सीधे तौर पर सैन्य बल का इस्तेमाल करते हुए अफगानिस्तान के भीतर एयरस्ट्राइक करने का रास्ता चुन लिया है। जानकारों का यह मानना है कि इस प्रकार के एकतरफा हवाई हमलों से आतंकवाद का सफाया तो दूर की बात है, बल्कि इससे दोनों देशों के आम नागरिकों और सैनिकों के बीच आपसी दुश्मनी और नफरत की खाई और अधिक गहरी होती चली जाएगी।
क्षेत्रीय शांति के लिए बड़ा खतरा: मध्य एशिया और खाड़ी देशों की पैनी नजर
इस ताज़ा हवाई हमले और कंधार में हुए धमाकों ने केवल पाकिस्तान और अफगानिस्तान की सीमाओं को ही नहीं हिलाया है, बल्कि इसने पूरी क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के सामने एक बहुत बड़ा और गंभीर संकट खड़ा कर दिया है। अमेरिका के अफगानिस्तान छोड़ने के बाद से इस पूरे क्षेत्र में भारत, चीन, ईरान और रूस जैसे बड़े देशों की सामरिक और कूटनीतिक दिलचस्पी लगातार बनी हुई है। यदि इन दोनों पड़ोसी देशों के बीच का यह सैन्य संघर्ष और अधिक विकराल रूप धारण करता है, तो इससे शरणार्थियों का एक नया संकट पैदा हो सकता है और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था पूरी तरह चरमरा सकती है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय और संयुक्त राष्ट्र ने भी इस प्रकार के सीमा पार हमलों पर गहरी चिंता व्यक्त की है और दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील की है, लेकिन जमीनी हालात को देखकर ऐसा बिल्कुल नहीं लग रहा है कि फिलहाल हथियार थामने का कोई इरादा दोनों तरफ से है।
आने वाले दिनों में क्या होंगे इसके भू-राजनीतिक परिणाम और क्या है अफगानिस्तान का रुख?
पाकिस्तान के इस आक्रामक हवाई हमले के बाद अब अफगान तालिबान सरकार की तरफ से किसी भी वक्त एक कड़ा और सैन्य पलटवार देखने को मिल सकता है। तालिबान के शीर्ष सैन्य कमांडरों ने पहले ही चेतावनी दी है कि वे अपनी संप्रभुता और देश की सीमाओं की रक्षा करने के लिए हर संभव कदम उठाने को तैयार हैं। कंधार और आसपास के इलाकों में सुरक्षा बलों को हाई अलर्ट पर रख दिया गया है और मलबे से घायलों को निकालने का काम तेजी से जारी है। यह घटना इस बात का जीता-जागता प्रमाण है कि दक्षिण एशिया का यह हिस्सा अभी भी शांति और स्थिरता से कोसों दूर है, जहां कभी भी कोई चिंगारी एक बड़े युद्ध की आग में बदल सकती है। दुनिया भर की खुफिया एजेंसियों की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि काबुल इस एयरस्ट्राइक का कूटनीतिक या सैन्य रूप से क्या जवाब देता है।