नेपाल में कुदरत का कहर! 469 मौतें, 1400+ लापता… अब भी जारी है तबाही
हिमालयी देश नेपाल में अचानक आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन ने भारी तबाही मचाई है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक इस जल प्रलय में अब तक 469 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। शुक्रवार सुबह स्थानीय पुलिस और सुरक्षा बलों ने राहत एवं बचाव कार्य युद्धस्तर पर तेज कर दिया है।
मलबे और तेज बहाव के बीच जीवित बचे लोगों की तलाश जारी है। अधिकारियों ने गंभीर चिंता जताई है कि मृतकों की संख्या में अभी और इजाफा हो सकता है, क्योंकि 1,400 से ज्यादा लोग अब भी लापता दर्ज हैं।
288 भारतीयों समेत 30 देशों के नागरिक लापता
नेपाली प्रशासन की रिपोर्ट के अनुसार, बुधवार को आए इस संकट के बाद से दुनिया भर के 30 से अधिक देशों के नागरिक लापता हैं। इसमें सबसे बड़ा आंकड़ा भारत का है, जहां के 288 नागरिकों की तलाश जारी है। लापता भारतीयों में एक स्थानीय बिजली परियोजना में कार्यरत 73 कामगार भी शामिल हैं। भारत सरकार का विदेश मंत्रालय काठमांडू स्थित अधिकारियों के साथ निरंतर संपर्क बनाए हुए है और लापता नागरिकों की खोज एवं रेस्क्यू ऑपरेशन में हरसंभव सहायता प्रदान कर रहा है।
तिब्बत में 3 की मौत, नई बनी झील से मंडराया बड़ा खतरा
इस प्राकृतिक आपदा का असर सीमा पार तिब्बत तक जा पहुंचा है। चीनी सरकारी मीडिया के अनुसार तिब्बत क्षेत्र में 3 लोगों की जान चली गई है। वहां बिगड़ती स्थिति को देखते हुए संवेदनशील इलाकों से 499 स्थानीय निवासियों और 555 पर्यटकों को सुरक्षित ठिकानों पर शिफ्ट किया गया है। बुधवार को हुए भारी भूस्खलन के चलते नदी का रास्ता रुकने से एक नई कृत्रिम झील बन गई है, जिससे निचले इलाकों में गंभीर खतरा पैदा हो गया है। मौसम विभाग ने अगले तीन दिनों तक मूसलाधार बारिश का अलर्ट जारी किया है, जिससे झील का जलस्तर तेजी से बढ़ सकता है।
30 लाख घन मीटर पानी का दबाव, बांध टूटने की चेतावनी
चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार, लगातार बारिश से झील में लगभग 30 लाख घन मीटर पानी जमा होने का अनुमान है। अगर यह प्राकृतिक बांध टूटता है, तो भारी मात्रा में पानी नीचे की ओर बहेगा। इससे ग्यिरोंग बंदरगाह सहित निचले नदी तटीय क्षेत्रों में भारी तबाही हो सकती है। प्रशासन ने जलप्रलय और भारी क्षति के उच्च जोखिम को लेकर रेड अलर्ट जारी किया है।