PoK Elections Exposed: पाकिस्तान के चुनावी ड्रामे पर भारत ने फेरा पानी, 7 सीटों पर मतदान अनिश्चितकाल के लिए स्थगित

PoK Elections Exposed: पाकिस्तान के चुनावी ड्रामे पर भारत ने फेरा पानी, 7 सीटों पर मतदान अनिश्चितकाल के लिए स्थगित

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर यानी PoK में पाकिस्तान का चुनावी ढोंग एक बार फिर दुनिया के सामने बेनकाब हो गया है। गंभीर प्रशासनिक नाकामी और बढ़ते तनाव के बीच PoK निर्वाचन आयोग ने बड़ा कदम उठाते हुए आने वाले दिनों में होने वाले चुनावों को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया है। खासकर पुंछ और सुधनोटि की पलंदरी समेत कुल 7 विधानसभा सीटों पर होने वाले मतदान को अगले आदेश तक रोक दिया गया है। इस बीच भारत ने पाकिस्तान के इस पूरे सियासी ड्रामे को सिरे से खारिज करते हुए इसे महज एक 'मजाक' और कोरा दिखावा करार दिया है।

PoK में चुनाव टलने की असली वजह और बिगड़ते हालात

पाकिस्तान-अधिकृत कश्मीर में विधानसभा चुनाव के तीसरे चरण के तहत कुल 11 सीटों पर मतदान होना था। लेकिन इससे पहले शुरुआती दो चरणों के दौरान भड़की हिंसक झड़पों, सुरक्षा संकट और आम जनता के कड़े विरोध प्रदर्शनों ने प्रशासनिक दावों की पोल खोल दी। ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के नेतृत्व में चल रहे व्यापक विरोध प्रदर्शनों और चुनाव बहिष्कार के आह्वान के बाद वहां के हालात पूरी तरह बेकाबू हो चुके थे। बिगड़ती कानून-व्यवस्था को देखते हुए निर्वाचन आयोग को अंततः चुनाव टालने का यह कड़ा फैसला लेना पड़ा। हालांकि, बाग और हवेली जिलों की कुछ सीटों पर मतदान तय शेड्यूल के मुताबिक ही कराने की बात कही जा रही है।

भारत का कड़ा रुख: PoK के चुनाव एक कोरा ढकोसला और फरेब

भारत सरकार ने PoK में हो रहे इन तथाकथित चुनावों पर बेहद कड़ी प्रतिक्रिया दी है। नई दिल्ली ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में आयोजित होने वाले ये चुनाव किसी लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा नहीं बल्कि एक 'पूर्ण प्रहसन' हैं। भारत ने दो टूक कहा है कि इस तरह के छद्म और खोखले चुनावी ड्रामे से पाकिस्तान इस क्षेत्र पर अपने अवैध कब्जे और वहां हो रहे गंभीर मानवाधिकारों के दमन को छिपा नहीं सकता। भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी अपील की है कि वे इस्लामाबाद के इन पाखंडपूर्ण और झूठे राजनीतिक हथकंडों के झांसे में बिल्कुल न आएं।

जनता का फूटा गुस्सा और पाकिस्तान की फजीहत

विशेषज्ञों का मानना है कि PoK की आवाम बुनियादी अधिकारों, सब्सिडी और स्थानीय प्रशासनिक सुधारों की मांग को लेकर लंबे समय से सड़कों पर उतरी हुई है। पाकिस्तानी हुकूमत और वहां की सेना द्वारा प्रदर्शनकारियों पर लगातार दमनकारी नीतियां अपनाई जा रही हैं, जिससे जनता का गुस्सा सातवें आसमान पर है। विस्थापितों के लिए आरक्षित सीटों और चुनाव में धांधली के खिलाफ पनपा यह जनआक्रोश इस बात का साफ सबूत है कि वहां के आम नागरिक पाकिस्तानी शासन से पूरी तरह तंग आ चुके हैं। अनिश्चितकाल के लिए टले ये चुनाव पाकिस्तान के उस झूठे चेहरे को उजागर करते हैं, जिसे वह दुनिया के सामने लोकतंत्र का चोला पहनाने की कोशिश करता है।

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