ब्रिटेन के आसमान में अचानक लगा 'टेक्निकल लॉकडाउन', सिस्टम फेल होने से उड़ानें रद्द, मचा हड़कंप

ब्रिटेन के आसमान में अचानक लगा 'टेक्निकल लॉकडाउन', सिस्टम फेल होने से उड़ानें रद्द, मचा हड़कंप

अंतरराष्ट्रीय हवाई यात्रा और विमानन जगत के इतिहास में एक बार फिर से एक ऐसा बड़ा तकनीकी संकट खड़ा हो गया है जिसने पूरी दुनिया की एविएशन इंडस्ट्री को हिलाकर रख दिया है। ब्रिटेन (United Kingdom) के आसमान पर इस समय मानो ब्रेक सा लग गया है और वहां की राष्ट्रीय हवाई यातायात प्रबंधन प्रणाली में आई एक गंभीर तकनीकी खराबी के चलते पूरे देश में आपातकालीन 'टेक्निकल लॉकडाउन' जैसी स्थिति पैदा हो गई है। ब्रिटेन के मुख्य एयर ट्रैफिक कंट्रोलर 'नैट्स' (NATS) के कंप्यूटर और रडार सिस्टम में अचानक आई इस तकनीकी गड़बड़ी ने ब्रिटिश एयरस्पेस को पूरी तरह से पंगु बना दिया है। इस अप्रत्याशित और भीषण संकट के कारण ब्रिटेन के हीथ्रो (Heathrow), गैटविक (Gatwick) और स्टैनsted सहित तमाम बड़े अंतरराष्ट्रीय और घरेलू हवाई अड्डों पर हजारों की संख्या में उड़ानें या तो अनिश्चितकाल के लिए रद्द कर दी गई हैं या फिर उन्हें भारी देरी का सामना करना पड़ रहा है। इस महा-जाम के कारण ब्रिटेन और यूरोप के विभिन्न एयरपोर्ट्स पर लाखों की संख्या में यात्री फंस गए हैं, जिससे चारों तरफ अफरा-तफरा और भारी गुस्से का माहौल देखने को मिल रहा है।

क्या है पूरा मामला और कैसे अचानक ठप हुआ ब्रिटेन का एयर ट्रैफिक सिस्टम

यह पूरी सनसनीखेज और चिंताजनक घटना उस समय शुरू हुई जब ब्रिटेन के आसमान को नियंत्रित करने वाले नेशनल एयर ट्रैफिक सर्विस (NATS) के मुख्य कंप्यूटर सर्वर और फ्लाइट प्लान प्रोसेसिंग सिस्टम में अचानक से तकनीकी फॉल्ट आ गया। आम दिनों की तरह हजारों विमान तय रूट पर उड़ान भर रहे थे और यात्री अपनी यात्रा की योजना बना रहे थे, तभी अचानक एयर ट्रैफिक कंट्रोलर्स की स्क्रीन से विमानों की लाइव ट्रेकिंग और डिजिटल सिग्नल गायब होने लगे। यात्रियों की सुरक्षा से कोई भी खिलवाड़ न हो, इसलिए एटीसी अधिकारियों ने तुरंत एहतियाती कदम उठाते हुए ब्रिटिश एयरस्पेस में आने वाली और यहाँ से बाहर जाने वाली तमाम उड़ानों पर पूरी तरह से रोक लगा दी। तकनीकी भाषा में इस प्रकार के अचानक पूर्ण प्रतिबंध को 'टेक्निकल लॉकडाउन' कहा जाता है, जिसके तहत कंप्यूटर अपने आप नए उड़ान मार्गों को प्रोसेस करना बंद कर देता है और मानवीय हस्तक्षेप के बिना विमानों को सुरक्षित संभालना नामुमकिन हो जाता है।

1000 से अधिक उड़ानें रद्द, हीथ्रो और गैटविक एयरपोर्ट पर मची भारी तबाही

इस तकनीकी आपदा का सबसे भयावह असर यह हुआ कि एक ही दिन के भीतर ब्रिटेन भर में 1,000 से अधिक उड़ानें या तो रद्द कर दी गईं या उन्हें कई घंटों की लंबी देरी के फेर में डाल दिया गया। लंदन के हीथ्रो एयरपोर्ट, जो दुनिया के सबसे व्यस्त हवाई अड्डों में से एक है, वहां का नजारा किसी महा-संकट जैसा बन गया। हजारों की संख्या में यात्री चेक-इन काउंटर के बाहर लंबी कतारों में खड़े होकर अपनी फ्लाइट्स के चालू होने का इंतजार करते रहे, लेकिन एयरलाइंस के पास भी कोई पुख्ता जवाब नहीं था। अमेरिका, यूरोप और एशिया के विभिन्न देशों से लंदन आने वाली कनेक्टिंग फ्लाइट्स बीच रास्ते में ही दूसरे देशों के एयरपोर्ट्स पर डायवर्ट कर दी गईं। इस अवांछित व्यवधान के कारण ग्लोबल एविएशन शेड्यूल पूरी तरह से चरमरा गया है और एयरलाइंस कंपनियों को भारी-भरकम वित्तीय नुकसान के साथ-साथ यात्रियों के भारी आक्रोश का भी सामना करना पड़ रहा है।

यात्रियों का फूटा गुस्सा, एयरपोर्ट्स पर रात गुजारने को हुए मजबूर

जब यात्रियों को यह बताया गया कि कंप्यूटर सिस्टम फेल होने के कारण उनकी उड़ानें अनिश्चितकाल के लिए रद्द कर दी गई हैं, तो उनका धैर्य जवाब दे गया। कई यात्रियों की महत्वपूर्ण व्यावसायिक बैठकें, पारिवारिक कार्यक्रम और छुट्टियां बीच में ही अधूरी रह गईं। छोटे बच्चों और बुजुर्गों के साथ यात्रा कर रहे लोगों को एयरपोर्ट के फर्श पर ही रात गुजारने पर मजबूर होना पड़ा। एयरलाइंस और एयरपोर्ट अथॉरिटी की तरफ से शुरुआती घंटों में यात्रियों को पर्याप्त पानी, खाना या सही जानकारी उपलब्ध कराने में भारी प्रशासनिक विफलता देखने को मिली, जिससे लोगों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर यात्रियों ने अपने वीडियो और तस्वीरें शेयर करते हुए ब्रिटेन की इस लचर तकनीकी व्यवस्था के खिलाफ जमकर भड़ास निकाली है, जो अब इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रही है।

ब्रिटिश सरकार और एविएशन एक्सपर्ट्स की आपातकालीन बैठक

इस राष्ट्रीय स्तर की बड़ी तकनीकी विफलता के सामने आने के बाद ब्रिटिश सरकार तुरंत हरकत में आ गई है। देश के परिवहन मंत्री (Transport Secretary) ने इस मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए एविएशन रेगुलेटर और 'नैट्स' (NATS) के शीर्ष अधिकारियों के साथ एक आपातकालीन उच्चस्तरीय बैठक बुलाई है। इस बैठक में इस बात की गहराई से जांच की जा रही है कि आखिर दुनिया के सबसे उन्नत देशों में शुमार ब्रिटेन में एयर ट्रैफिक कंट्रोल जैसी अति-संवेदनशील प्रणाली अचानक कैसे पूरी तरह से क्रैश हो सकती है। क्या इसके पीछे किसी प्रकार का कोई बाहरी साइबर हमला (Cyber Attack) था या फिर यह केवल एक सामान्य सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर से जुड़ी तकनीकी खराबी थी? सरकार ने जनता को आश्वस्त किया है कि इस तकनीकी खामी की तह तक जाया जाएगा और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए पुख्ता सुरक्षा कवच तैयार किए जाएंगे।

सिस्टम को बहाल करने की प्रक्रिया जारी, सामान्य होने में लग सकते हैं कई दिन

नैट्स (NATS) के इंजीनियरों और तकनीकी विशेषज्ञों की टीमों ने रात-दिन एक करके इस जटिल सॉफ्टवेयर और रडार फॉल्ट को दूर करने का काम युद्धस्तर पर शुरू कर दिया है। हालांकि, तकनीकी जानकारों का कहना है कि भले ही मुख्य कंप्यूटर सिस्टम को धीरे-धीरे ऑनलाइन लाया जा रहा हो, लेकिन इतने बड़े पैमाने पर फंसे हुए विमानों और यात्रियों के शेड्यूल को पूरी तरह से सामान्य (Normal Operations) होने में अभी कम से कम दो से तीन दिनों का समय और लग सकता है। एयरलाइंस कंपनियां यात्रियों से यह अपील कर रही हैं कि वे एयरपोर्ट आने से पहले अपनी फ्लाइट की स्थिति ऑनलाइन जरूर चेक कर लें ताकि उन्हें बेवजह की परेशानियों का सामना न करना पड़े। ब्रिटिश विमानन इतिहास के इस सबसे बड़े तकनीकी संकट ने एक बार फिर पूरी दुनिया की एयरलाइंस को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि उन्हें अपनी बैकअप डिजिटल प्रणालियों को और कितना अधिक मजबूत करने की आवश्यकता है।