15 देशों की वो 'सीक्रेट' काउंसिल, जहां जगह बनाने के लिए भारत ने झोंकी पूरी ताकत

15 देशों की वो 'सीक्रेट' काउंसिल, जहां जगह बनाने के लिए भारत ने झोंकी पूरी ताकत

वैश्विक कूटनीति के मंच से भारत ने एक बार फिर दुनिया को अपनी ताकत और इरादों का अहसास कराया है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र (UN) मुख्यालय में आयोजित एक बेहद खास और भव्य कार्यक्रम में 'शांति: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद 2028-29 के लिए भारत' अभियान का आधिकारिक शंखनाद कर दिया है।

यूएन के दूतों, दिग्गज राजनयिकों और आला अधिकारियों की मौजूदगी में शुरू हुआ यह अभियान 'मानदंड, विश्वास और अखंडता' के मूल मंत्र पर आधारित है। भारत का साफ कहना है कि वैश्विक प्रगति तभी संभव है जब पूरी दुनिया में शांति और विश्वास का माहौल हो।

अगले साल जून में कड़ा मुकाबला, मैदान में आमने-सामने होंगे भारत और ताजिकिस्तान

सुरक्षा परिषद के इस बेहद महत्वपूर्ण कार्यकाल (2028-29) के लिए अगले साल जून में चुनाव होने जा रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि एशिया-प्रशांत समूह श्रेणी की इकलौती सीट के लिए इस बार भारत और ताजिकिस्तान के बीच सीधा और कड़ा मुकाबला देखने को मिलेगा।

अपनी इस न्यूयॉर्क यात्रा के दौरान विदेश मंत्री जयशंकर संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस से भी मुलाकात कर वैश्विक मुद्दों पर चर्चा करेंगे। आपको बता दें कि कतर, बहरीन, कुवैत और ओमान के सफल आधिकारिक दौरे के बाद जयशंकर सीधे न्यूयॉर्क पहुंचे हैं, जहां से वे ब्रुसेल्स में होने वाली तीसरी भारत-ईयू व्यापार और प्रौद्योगिकी परिषद की बैठक में हिस्सा लेने के लिए रवाना होंगे।

वैश्विक मंच पर भारत के लिए क्यों बेहद अहम है यह चुनाव?

यह अभियान महज एक चुनावी प्रक्रिया नहीं है, बल्कि साल 2027 में होने वाले संयुक्त राष्ट्र महासभा चुनावों से पहले नई दिल्ली की सोची-समझी कूटनीतिक रणनीति का पहला और सबसे मजबूत कदम है। भारत इस चुनाव को जीतकर नौवीं बार सुरक्षा परिषद के अस्थायी सदस्य के रूप में अपनी जगह पक्की करना चाहता है।

यह समय इसलिए भी गंभीर है क्योंकि पूरी दुनिया इस वक्त यूक्रेन युद्ध, गाजा संघर्ष और ईरान-अमेरिका-इजरायल के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और बड़े संकटों से जूझ रही है। ऐसे अशांत माहौल में भारत की उपस्थिति वैश्विक संतुलन के लिए बेहद जरूरी मानी जा रही है।

पीएम मोदी की दोटूक: अब और नहीं टाले जा सकते संयुक्त राष्ट्र में सुधार

हाल ही में इंडोनेशिया की संसद को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी वैश्विक व्यवस्था में आ रहे तेजी से बदलावों का जिक्र किया था। पीएम मोदी ने स्पष्ट शब्दों में कहा था कि भारत जैसे विकासशील देश अब वैश्विक मामलों में समान भागीदारी और बड़ी भूमिका की मांग कर रहे हैं।

उन्होंने जोर देकर कहा कि मौजूदा वैश्विक परिदृश्य को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधारों को अब और ज्यादा समय के लिए टाला नहीं जा सकता। भारत लंबे समय से इस बात की वकालत करता रहा है कि साल 1945 में बनी यह 15 देशों की परिषद 21वीं सदी की समकालीन वास्तविकताओं और जमीनी सच को नहीं दर्शाती।

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