अमेरिका में हनुमान जी की 90 फीट ऊंची मूर्ति को तोड़ने की धमकी

अमेरिका में हनुमान जी की 90 फीट ऊंची मूर्ति को तोड़ने की धमकी

अंतरराष्ट्रीय राजनीति और सामाजिक सौहार्द के मोर्चे पर एक बेहद संवेदनशील और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। दुनिया के सबसे ताकतवर देश अमेरिका में इन दिनों राजनीतिक सरगर्मी अपने चरम पर है और आगामी चुनावों का माहौल पूरी तरह से गर्माया हुआ है। इसी चुनावी गहमागहमी के बीच अमेरिका की धरती पर भारतीय प्रवासियों और सनातन संस्कृति की आस्था को सीधी चुनौती देने वाली एक घटना घटी है। अमेरिका के एक प्रमुख स्थान पर स्थापित की जाने वाली भगवान हनुमान जी की भव्य और विशाल 90 फीट ऊंची मूर्ति को असामाजिक तत्वों द्वारा तोड़ने और अपवित्र करने की धमकियां दी गई हैं। इस सनसनीखेज धमकी के सामने आने के बाद से ही प्रवासी भारतीय समुदाय में भारी रोष व्याप्त है और यह सवाल उठने लगा है कि आखिर इस संवेदनशील समय में अमेरिकी समाज के भीतर हिंदुओं के खिलाफ सुनियोजित तरीके से नफरत का जहर कौन घोल रहा है। आइए इस गंभीर और चिंताजनक मामले के हर एक पहलू को गहराई से समझते हैं।

अमेरिका के न्यू जर्सी (New Jersey) या अन्य चुनिंदा प्रतिष्ठित राज्यों में हिंदू संस्कृति और आध्यात्मिक मूल्यों को बढ़ावा देने के लिए भगवान हनुमान की एक विशाल और भव्य 90 फीट ऊंची प्रतिमा स्थापित करने की योजना पर काम चल रहा था। इस मूर्ति को 'स्टैचू ऑफ यूनियन' (Statue of Union) के रूप में देखा जा रहा था, जो विभिन्न संस्कृतियों के बीच सामंजस्य और शांति का प्रतीक बनने वाली थी। इस महत्वाकांक्षी धार्मिक परियोजना के लिए भारतीय-अमेरिकी समुदाय और विभिन्न हिंदू मंदिरों के संगठनों ने मिलकर लंबी तैयारी की थी। लेकिन जैसे ही इस मूर्ति के निर्माण और स्थापना से जुड़ी तैयारियां अंतिम चरण में पहुंचीं, वैसे ही कुछ कट्टरपंथी और असामाजिक तत्वों ने इसका विरोध करना शुरू कर दिया। देखते ही देखते विरोध का यह स्वर खुली धमकियों में बदल गया, जिससे स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ गई है।

विशेषज्ञों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का मानना है कि अमेरिका में इस तरह की घटनाएं किसी सुनियोजित राजनीतिक साजिश का हिस्सा हो सकती हैं। अमेरिका में जब भी आम चुनाव नजदीक आते हैं, तब ध्रुवीकरण की राजनीति तेज हो जाती है और कुछ चरमपंथी समूह राजनीतिक रोटियां सेकने के लिए अल्पसंख्यकों और प्रवासियों को निशाना बनाते हैं। पिछले कुछ वर्षों में अमेरिका के भीतर हिंदूफोबिया (Hinduphobia) और हिंदू विरोधी नफरती अपराधों (Hate Crimes) में लगातार इजाफा देखने को मिला है। मंदिरों में तोड़फोड़, धार्मिक प्रतीकों का अपमान और अब भगवान हनुमान की विशाल मूर्ति को गिराने की धमकी देना इसी बढ़ती हुई असहिष्णुता और नस्लीय व धार्मिक द्वेष का एक बेहद भद्दा और खतरनाक रूप है।

इस धमकी के सामने आने के बाद अमेरिका में रह रहे लाखों भारतीय प्रवासियों और हिंदू संगठनों ने कड़ा रुख अपनाते हुए स्थानीय पुलिस, मेयर और फेडरल एजेंसियों से सख्त कार्रवाई की मांग की है। समुदाय के प्रतिनिधियों का कहना है कि अमेरिका एक बहुसांस्कृतिक और धर्मनिरपेक्ष देश है, जहां हर नागरिक को अपनी आस्था और संस्कृति के अनुसार जीने की आजादी है। कुछ कट्टरपंथी तत्वों द्वारा फैलाई जा रही इस नफरत से प्रवासी भारतीय डरने वाले नहीं हैं, बल्कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं। हिंदू संगठनों ने अमेरिकी प्रशासन से यह सुनिश्चित करने की मांग की है कि हनुमान जी की इस पवित्र प्रतिमा की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएं और धमकियां देने वाले असामाजिक तत्वों को जल्द से जल्द सलाखों के पीछे भेजा जाए।

मामले की गंभीरता को देखते हुए अमेरिकी कानून प्रवर्तन एजेंसियों और स्थानीय पुलिस प्रशासन ने जांच का दायरा बढ़ा दिया है। जिन ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स और सोशल मीडिया हैंडल्स के जरिए ये धमकियां दी गई हैं, उनकी तकनीकी जांच की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस नफरत के पीछे कौन लोग या कौन सा संगठन सक्रिय है। इसके साथ ही, मूर्ति स्थापना स्थल के आसपास सुरक्षा व्यवस्था को बेहद कड़ा कर दिया गया है ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना को रोका जा सके। यह घटना न केवल अमेरिका में रह रहे भारतीयों के लिए चिंता का विषय है, बल्कि यह पूरी दुनिया के सामने यह सवाल भी खड़ा करती है कि आधुनिक लोकतांत्रिक समाजों में धार्मिक सहिष्णुता का दायरा क्यों सिकुड़ता जा रहा है।