अमेरिकी संसद से कड़ा प्रतिबंध विधेयक पास, भारत-चीन पर कड़ी कार्रवाई की तैयारी में ट्रंप सरकार
वॉशिंगटन में अमेरिकी कांग्रेस ने गुरुवार को एक बेहद सख्त और दूरगामी असर डालने वाले प्रतिबंध विधेयक को आधिकारिक मंजूरी दे दी है। यह कानून अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रूस की अर्थव्यवस्था पर नकेल कसने के साथ-साथ रूसी कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस का व्यापार करने वाले भारत और चीन जैसे प्रमुख साझीदार देशों पर भारी टैरिफ लगाने का व्यापक अधिकार सौंपता है।
'लिंडसे ओ ग्राहम सैंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026' को पिछले महीने सीनेट की मंजूरी मिलने के बाद अब प्रतिनिधि सभा ने भी 262 के मुकाबले 159 मतों से पारित कर दिया है। अंतिम मंजूरी और कानून की शक्ल देने के लिए यह मसौदा अब राष्ट्रपति ट्रंप के दस्तखत के लिए व्हाइट हाउस भेजा जाएगा।
प्रतिनिधि सभा में वोटिंग का गणित और डेमोक्रेट्स का विरोध
प्रतिनिधि सभा में हुए मतदान के दौरान 203 रिपब्लिकन सांसदों के साथ 58 डेमोक्रेट और एक निर्दलीय सदस्य ने विधेयक का पुरजोर समर्थन किया, जबकि सात रिपब्लिकन और 152 डेमोक्रेट सांसदों ने इसके खिलाफ वोट डाला। विपक्षी डेमोक्रेट्स का प्राथमिक विरोध मुख्य रूप से राष्ट्रपति ट्रंप को टैरिफ संबंधी असीमित अधिकार दिए जाने को लेकर था। बहस के दौरान वरिष्ठ डेमोक्रेट सांसद रिचर्ड नील ने दो टूक शब्दों में कहा कि वे मौजूदा राष्ट्रपति को आयात शुल्क से जुड़े और अधिक मनमाने अधिकार सौंपने के पक्ष में नहीं हैं।
दिवंगत सीनेटर लिंडसे ग्राहम के नाम पर रखा गया विधेयक
इस ऐतिहासिक विधेयक का नामकरण दक्षिण कैरोलिना के कद्दावर रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम के नाम पर किया गया है, जिनका निधन जुलाई में हुआ था। सीनेटर ग्राहम ने इस सख्त प्रतिबंध नीति के लिए करीब एक साल से ज्यादा समय तक संसद के दोनों सदनों में समर्थन जुटाने के लिए काम किया था। यह कानून सीधे तौर पर रूस के शीर्ष नेतृत्व और ऊर्जा क्षेत्र को निशाना बनाने के साथ-साथ उन जहाजों के 'अदृश्य बेड़े' (Shadow Fleet) पर कड़े प्रतिबंध लगाने का प्रावधान करता है, जिनकी मदद से मॉस्को अंतरराष्ट्रीय पाबंदियों को धता बताकर कच्चे तेल की आपूर्ति जारी रखे हुए है।
'भारत और चीन कहीं और से खरीदें तेल': अमेरिकी सीनेटरों की दो टूक चेतावनी
विधेयक के पारित होते ही डेमोक्रेटिक सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने प्रेस से बातचीत में सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि भारत और चीन के लिए बेहतर यही होगा कि वे अपनी तेल और गैस की जरूरतें कहीं और से पूरी करना शुरू करें। वहीं सीनेटर जीन शाहीन ने स्पष्ट किया कि रूस अपने सीक्रेट जहाजी बेड़ों के जरिए अंतरराष्ट्रीय बाजार भाव से काफी कम दरों पर तेल बेच रहा है, जिसकी सबसे ज्यादा खरीद चीन और भारत द्वारा की जा रही है। उन्होंने कहा कि चीन रूसी ऊर्जा का सबसे बड़ा ग्राहक बना हुआ है और अब व्लादिमीर पुतिन के साथ-साथ रूसी ईंधन खरीदने वाले हर मुल्क को यह कड़ा संदेश देना जरूरी हो गया है कि इस व्यापार की भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। यह घटनाक्रम चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की अमेरिका की आधिकारिक यात्रा से ठीक पहले सामने आया है।
क्या भारत पर तुरंत लग जाएगा 100% टैरिफ? जानिए पूरा कानूनी तंत्र
इस कानून के लागू होने से भारतीय सामानों पर अपने-आप सीधे 100 प्रतिशत आयात शुल्क लागू नहीं होगा। यह कानून दरअसल अमेरिकी राष्ट्रपति को एक ऐसा कार्यकारी तंत्र मुहैया कराता है, जिसके आधार पर वे रूसी मूल का क्रूड ऑयल या गैस खरीदने वाले और पाबंदियों को कमजोर करने वाले मुल्कों पर 100 प्रतिशत तक का द्वितीयक शुल्क (Secondary Tariffs) लगाने का विवेकाधीन निर्णय ले सकते हैं। डेमोक्रेटिक प्रतिनिधि स्टेनी होयर द्वारा पेश किए गए संशोधन के अंतर्गत प्राथमिक स्तर पर 10 देशों को इस 100 प्रतिशत टैरिफ दायरे के लिए पात्र मुल्कों के तौर पर नामित किया गया है:
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भारत
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चीन
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संयुक्त अरब अमीरात (UAE)
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तुर्किये
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अज़रबैजान
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हंगरी
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सिंगापुर
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कजाकिस्तान
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किर्गिस्तान
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स्लोवाक गणराज्य
यह विधेयक 3 नवंबर के आगामी अमेरिकी चुनावों से ठीक पहले सदन के अंतिम कार्यदिवस पर पारित हुआ है, जब यूक्रेन समर्थक संगठनों ने रूसी ऊर्जा व्यापार पर पूर्ण रोक लगाने के लिए कैपिटल हिल में अपनी पैरवी काफी तेज कर दी थी।