ईरान पर ट्रंप का बड़ा दांव, ‘फाइनल डील’ के लिए रख दी कड़ी शर्त
अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी सैन्य और कूटनीतिक गतिरोध के बीच मध्य पूर्व की सियासत में एक संभावित नए मोड़ के संकेत मिले हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दोनों देशों के बीच जारी भारी तनाव को समाप्त करने के उद्देश्य से ईरान के साथ एक दूरगामी और "अंतिम समझौते" (फाइनल डील) की दिशा में आगे बढ़ने की स्पष्ट इच्छा जताई है।
प्रस्तावित समझौते की रूपरेखा के तहत अमेरिका ईरान पर लगे कड़े आर्थिक प्रतिबंधों को हटाने और उसकी वैश्विक स्तर पर फ्रीज (जब्त) की गई वित्तीय संपत्तियों को बहाल करने पर राजी हो सकता है। हालांकि, व्हाइट हाउस ने इसके लिए एक अत्यंत सख्त और गैर-परक्राम्य शर्त रखी है, जिसके तहत तेहरान को अपने परमाणु कार्यक्रम को सीमित करने और अंतरराष्ट्रीय निगरानी के संबंध में पहले ठोस और सत्यापन योग्य प्रगति दिखानी होगी।
मध्यस्थों के जरिए बैकचैनल वार्ताएं तेज, ट्रंप की कोर टीम संभाल रही कमान
एक वरिष्ठ अमेरिकी प्रशासनिक अधिकारी के हवाले से सामने आई जानकारी के अनुसार, दोनों देशों के बीच मध्यस्थ देशों की मदद से परोक्ष रूप से सकारात्मक और सघन बातचीत का दौर जारी है। वाशिंगटन की ओर से इस वार्ता प्रक्रिया का नेतृत्व राष्ट्रपति ट्रंप की बेहद करीबी कोर टीम कर रही है, जिसमें विशेष दूत स्टीव विटकॉफ, जेरेड कुशनर, उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस और विदेश मंत्री मार्को रुबियो जैसे प्रमुख चेहरे शामिल हैं। राष्ट्रपति ट्रंप ने स्वयं संकेत दिए हैं कि दोनों पक्षों के मध्य गतिरोध को दूर करने के लिए इसी सप्ताह एक नए दौर की उच्चस्तरीय कूटनीतिक चर्चा हो सकती है।
होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने का ईरानी प्रस्ताव खारिज, ट्रंप बोले- शर्तें नामंजूर
अमेरिका, इजरायल और ईरान के त्रिकोणीय सैन्य टकराव के चलते वैश्विक तेल व्यापार की जीवनरेखा माने जाने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) के मार्ग पर जहाजों की आवाजाही ठप पड़ी है। इस रणनीतिक जलमार्ग को फिर से खोलने के लिए ईरान की ओर से हाल ही में एक औपचारिक प्रस्ताव रखा गया था, जिसे राष्ट्रपति ट्रंप ने सिरे से खारिज कर दिया है। ट्रंप ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि हालांकि ईरान इस समय समझौता करने के लिए उत्सुक नजर आ रहा है, लेकिन उसने इसके एवज में अत्यधिक शर्तें लगा दी हैं जो अमेरिका को किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि ईरान की इन मौजूदा शर्तों पर शायद एक साल पहले विचार किया जा सकता था, मगर आज के बदले हालात में ये बिल्कुल अव्यावहारिक हैं।
परमाणु कार्यक्रम पर लचीलेपन के संकेत, लेकिन पहले रियायत देने से अमेरिका का इनकार
तेहरान की ओर से भी अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर कुछ हद तक लचीला रुख अपनाने के कूटनीतिक संकेत मिले हैं, जिससे समझौते की उम्मीदें पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं। इसके बावजूद, परमाणु पाबंदियों को कब, किस क्रम में और कैसे जमीन पर लागू किया जाएगा, इस मूल फॉर्मूले पर दोनों पक्षों के बीच गहरा अविश्वास बना हुआ है। ट्रंप प्रशासन का मानना है कि ईरानी नेतृत्व अभी भी पूरी तरह ईमानदारी से वार्ता की मेज पर नहीं आया है। संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत माइक वाल्ट्ज ने स्पष्ट रुख अपनाते हुए कहा कि अमेरिका ऐसे किसी भी प्रस्ताव को स्वीकार नहीं करेगा, जिसमें ईरान बिना कोई जमीनी और ठोस प्रगति दिखाए पहले ही प्रतिबंधों में ढील और वित्तीय रियायतें हासिल करना चाहता हो।