ईरान से टकराव के बीच अमेरिका में हथियारों की कमी! पेंटागन की रिपोर्ट से मचा हड़कंप

ईरान से टकराव के बीच अमेरिका में हथियारों की कमी! पेंटागन की रिपोर्ट से मचा हड़कंप

अमेरिका और ईरान के बीच सामरिक दृष्टि से बेहद संवेदनशील होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के आसपास टकराव चरम पर पहुंच गया है। दोनों देशों के मध्य लंबे समय से बने इस सैन्य गतिरोध का सीधा और गंभीर असर अब अमेरिकी सेना के शस्त्रागार पर दिखने लगा है।

पेंटागन के अधिकारियों और अमेरिकी रक्षा विभाग के इंस्पेक्टर जनरल ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि की है कि ईरान के साथ जारी इस खींचतान के कारण अमेरिका गंभीर हथियारों व गोला-बारूद की कमी और सप्लाई चेन में भारी रुकावटों का सामना कर रहा है। हालांकि पूर्व में डोनाल्ड ट्रंप ने किसी भी प्रकार की सैन्य कमी के दावों को पूरी तरह खारिज किया था, लेकिन स्वतंत्र निगरानी संस्थाओं की पड़ताल में सामने आया है कि फरवरी से जून के बीच ही अमेरिका ने अपने गोला-बारूद पर 22 अरब डॉलर से अधिक की भारी धनराशि फूंक दी है, जिससे उसका रणनीतिक सैन्य भंडार काफी हद तक खाली हो चुका है।

सप्लाई चेन में औद्योगिक बाधाएं, व्हाइट हाउस ने खारिज की रिपोर्ट

पेंटागन के इंस्पेक्टर जनरल द्वारा जारी की गई विस्तृत रिपोर्ट में सुरक्षा कारणों से बचे हुए हथियारों के सटीक आंकड़े तो साझा नहीं किए गए हैं, लेकिन इस बात पर कड़ा जोर दिया गया है कि हथियारों का बैकअप खतरनाक स्तर तक कम हुआ है। रिपोर्ट में रेखांकित किया गया है कि देश के रक्षा-औद्योगिक आधार में गोला-बारूद की आपूर्ति को दोबारा भरने में गंभीर अड़चनों का सामना करना पड़ रहा है। आपातकालीन परिस्थितियों में तुरंत प्रतिक्रिया देने की क्षमता को बनाए रखने के लिए रक्षा विभाग अब खरीद प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने और उत्पादन की समय-सीमा में सुधार लाने के लिए युद्धस्तर पर काम कर रहा है। दूसरी ओर, व्हाइट हाउस ने निगरानी संस्था के इस चिंताजनक आकलन को आधिकारिक तौर पर नकार दिया है।

चार महीनों में 33.4 अरब डॉलर खर्च, मिसाइल डिफेंस सिस्टम का अंधाधुंध इस्तेमाल

सामने आई एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार, 28 फरवरी से 30 जून की अवधि के दौरान अमेरिका ने ईरान के साथ सैन्य टकराव और गतिविधियों पर कुल 33.4 अरब डॉलर खर्च किए हैं। 28 फरवरी को संघर्ष शुरू होने के बाद से ही अमेरिकी सेना ने ईरानी हमलों, ड्रोन और मिसाइल गतिविधियों को नाकाम करने के लिए लंबी दूरी के जमीनी हमलावर सिस्टमों के साथ-साथ अपने सबसे उन्नत वायु एवं मिसाइल रक्षा प्रणालियों (Air & Missile Defense Systems) का अंधाधुंध इस्तेमाल किया। इसी आक्रामक तैनाती और लगातार चले इंटरसेप्शन अभियानों ने अमेरिकी सैन्य डिपो को अप्रत्याशित दबाव में ला खड़ा किया है।