जब-जब नेपाल पर आई आफत, तब तब भारत बना ढाल; जानें कब कब की है मदद
नेपाल और तिब्बत सीमा पर बुधवार सुबह अचानक आए जलप्रलय ने भारी तबाही मचाई है, जिसमें 210 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई जबकि 1500 से अधिक लोग अब भी लापता हैं। इस भीषण प्राकृतिक आपदा ने एक बार फिर दोनों देशों के सदियों पुराने 'रोटी-बेटी' और गहरे कूटनीतिक रिश्तों को उजागर कर दिया है।
संकट की इस घड़ी में भारत ने बिना देर किए पड़ोसी देश की ओर मदद का हाथ बढ़ाया है। अकेले केंद्रीय बजट 2026-27 में भारत सरकार ने नेपाल के विकास और सहायता के लिए 12.8 बिलियन रुपये यानी लगभग ₹1280 करोड़ का भारी-भरकम फंड आवंटित किया है। आइए सिलसिलेवार जानते हैं कि भारत ने कब-कब नेपाल को संकट से उबारा और विकास कार्यों पर कितना बजट खर्च किया।
अगस्त 2026 की बाढ़ में सबसे पहले पहुंचा भारत, वायुसेना ने उतारे विमान
अगस्त 2026 में भोटे कोशी नदी में आए उफान और भीषण बाढ़ के तुरंत बाद भारत 'फर्स्ट रिस्पॉन्डर' (सबसे पहले मदद पहुंचाने वाला देश) बनकर सामने आया। भारतीय वायु सेना के विशेष सी-130जे (C-130J) हरक्यूलिस विमान के जरिए 10 टन से ज्यादा जरूरी राहत सामग्री और जीवन रक्षक दवाएं काठमांडू पहुंचाई गईं। इसके अतिरिक्त भारत पूर्वी नेपाल के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में संपर्क बहाल करने के लिए ₹73 करोड़ की लागत वाले 10 आधुनिक प्री-फैब्रिकेटेड स्टील बेली ब्रिज भी उपलब्ध करा रहा है ताकि टूटे मार्गों को तत्काल जोड़ा जा सके।
2015 के महाभूकंप में दिया 1 बिलियन डॉलर का ऐतिहासिक पैकेज
अप्रैल 2015 में आए विनाशकारी भूकंप के दौरान भारत ने नेपाल के पुनर्निर्माण के लिए 1 बिलियन अमेरिकी डॉलर (अरबों रुपये) की ऐतिहासिक सहायता की घोषणा की थी। यह मदद केवल शुरुआती राशन-दवा तक सीमित नहीं रही, बल्कि भारत ने जमीन पर 50,000 भूकंप-रोधी पक्के मकानों का निर्माण कराया। इसके साथ ही 132 आधुनिक स्वास्थ्य केंद्र और 71 प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों की इमारतों का दोबारा निर्माण करवाकर मिसाल पेश की।
सितंबर 2024 की आपदा और बेली ब्रिज का तोहफा
सितंबर 2024 में जब नेपाल में भारी बारिश और भूस्खलन ने तबाही मचाई थी, तब भारत ने तत्काल 25 टन से ज्यादा मानवीय सहायता, टेंट, दवाइयां और राशन सामग्री भेजी थी। इतना ही नहीं, नदियों पर बहे पुलों की जगह तुरंत यातायात बहाल करने के लिए भारत ने ₹41 करोड़ से अधिक मूल्य के 10 प्री-फैब्रिकेटेड स्टील बेली ब्रिज पूरी तरह अनुदान के रूप में नेपाल को सौंपे थे।
वैक्सीन मैत्री से लेकर बड़े अस्पतालों के निर्माण तक स्वास्थ्य में बड़ा योगदान
वैश्विक कोरोना महामारी के समय भारत ने 'वैक्सीन मैत्री' मिशन के तहत नेपाल को कोविड टीकों की 95 लाख से ज्यादा खुराकें उपलब्ध कराई थीं, जिसमें से पहली 10 लाख डोज भारत में टीकाकरण शुरू होने के एक हफ्ते के भीतर पूरी तरह मुफ्त दी गई थीं। स्वास्थ्य ढांचे की बात करें तो भारत ने ₹100 करोड़ की लागत से काठमांडू में अत्याधुनिक 'नेपाल-भारत फ्रेंडशिप इमरजेंसी एंड ट्रॉमा सेंटर' बनाया और धरान स्थित बीपी कोइराला इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ साइंसेज में ₹125 करोड़ की लागत से नए कॉलेज ब्लॉक का निर्माण किया।
हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट और ऐतिहासिक मोतिहारी-अमलेखगंज पेट्रोलियम पाइपलाइन
नेपाल के ऊर्जा और ईंधन क्षेत्र में भारत का सहयोग दशकों पुराना है। 1976 में भारत ने 21 मेगावाट क्षमता के त्रिशूली हाइड्रो पावर स्टेशन के निर्माण के लिए ₹14 करोड़ का अनुदान दिया था। वहीं द्विपक्षीय सहयोग का सबसे बड़ा मील का पत्थर 2019 में शुरू हुई 'मोतिहारी-अमलेखगंज पेट्रोलियम पाइपलाइन' बनी। लगभग ₹324 करोड़ की लागत से तैयार इस पाइपलाइन ने नेपाल को सुरक्षित, सस्ती और निर्बाध ईंधन आपूर्ति सुनिश्चित की। इसके अलावा भारत शिक्षा, कृषि और ग्रामीण विकास के कई हाई-इम्पैक्ट कम्युनिटी प्रोजेक्ट्स (HICDP) को लगातार फंड कर रहा है।
सालाना बजट में नेपाल को कितनी आर्थिक मदद देता है भारत?
भारत अपने विदेश मंत्रालय (MEA) के वार्षिक बजट में नेपाल के लिए हमेशा विशेष अनुदान रखता है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए भारत ने नेपाल को ₹12.8 अरब (₹1280 करोड़) का बजट आवंटित किया है, जबकि 2025-26 के संशोधित अनुमान में यह आंकड़ा ₹13.28 अरब था। भारत की मदद सिर्फ सालाना बजट तक सीमित नहीं है, बल्कि दशकों से सड़क, रेल, ऊर्जा, अस्पताल और आपदा प्रबंधन जैसे हर मोर्चे पर भारत नेपाल का सबसे मजबूत रणनीतिक और मानवीय साझेदार बना हुआ है।