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मछुआरों के गांव में हुआ समझौता

चालू जून महीने को विश्व शांति के लिए बहुत याद किया जाएगा. उत्तर, दक्षिण कोरिया  अमेरिका के बीच ऐतिहासिक समझौते के बाद अब बाल्कन एरिया से अच्छी समाचार आई है. यहां ग्रीस  मेसेडोनिया ने पिछले 27 वर्षों से चल रहे ‘नाम’ के टकराव को हल कर लिया. दोनों राष्ट्रों ने रविवार को समझौते पर हस्ताक्षर किए. मेसेडोनिया से संसदीय औपचारिकता के बाद अब रिपब्लिक ऑफ मेसेडोनिया को रिपब्लिक ऑफ नॉर्थ मेसेडोनिया के नाम से जा सकता है. यूगोस्लाविया से 1991 में अलगाव के बाद से ही इन दोनों राष्ट्रों के बीच मेसेडोनिया नाम को लेकर टकराव चल रहा था.

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इस ऐतिहासिक संधि का गवाह बनी वो झील जो दोनों राष्ट्रों के बीच की कुदरती सीमा है. मेसेडोनिया के पीएम जोरान जीव अपने कई मंत्रियों के साथ इस झील किनारे स्थित मछुआरों के खूबसूरत गांव साराडेस में स्पीडबोट द्वारा पहुंचे. यह गांव ग्रीस की सीमा में है. यहां पर ग्रीस के पीएम एलेक्सिस सिप्रास उनका इंतजार कर रहे थे. दोनों राष्ट्रों के विदेश मंत्रियों ने संधि पर हस्ताक्षर किये. इस मौके पर संयुक्त देश  यूरोपीय संघ के कई वरिष्ठ ऑफिसर भी मौजूद थे. संधि लेटर पर हस्ताक्षर हो जाने के बाद सिप्रास दूसरे किनारे पर स्थित गांव प्रेस्पा पहुंचे दोनों राष्ट्र के अधिकारियों ने साथ में लंच किया.

क्या था विवाद

1991 में युगोस्लाविया से अलग होकर मेसेडोनिया संप्रभु गणराज्य बना. ग्रीस के उत्तरी एरिया को भी मेसेडोनिया नाम से जाना जाता है. बाल्कन से सटे इस एरिया के चलते ग्रीस ने नाम को लेकर असहमति जताई  उसे बदलने की बात कही.

विवाद: परत दर परत

– 1992 में ग्रीस की अधिसंख्य जनता इस टकराव के कारण थैसालोंकी शहर में सड़कों पर उतर आई थी.

– 2004 में रिपब्लिक ऑफ मेसेडोनिया ने अपनी राजधानी स्कोजे में एयरपोर्ट का नाम अलेक्जेंडर द ग्रेट रख दिया.

– 2011 में स्कोजे में ही घोड़े पर एक योद्धा की विशाल मूर्ति लगाई गई. यह मूर्ति सिकंदर के पिता फिलिप द्वितीय की थी.

राष्ट्रपति करते रहे हैं विरोध

मेसेडोनिया के राष्ट्रपति इवानोव अपने राष्ट्र का नाम बदलने पर सहमत नहीं हैं. इवानोव 2017 से पहले सत्ता में रही राष्ट्रवादी पार्टी के कट्टर समर्थक माने जाते हैं. नाम में इस परिवर्तन के बिल को अब संसद में पेश किया जाएगा. जहां इसे दो तिहाई मतों से पास करवाना होगा. राष्ट्रपति के पास इसे अस्वीकृत करने का अधिकार है, लेकिन यदि संसद दोबारा इस प्रस्ताव को भेजती है तो राष्ट्रपति को इसे मंजूरी देने पर विवश होना होगा.

जीव के आने से हुआ बदलाव

मेसेडोनिया के पीएम जीव की पार्टी 2017 में सत्ता में आई. चूंकि ग्रीस इस बात पर अड़ गया था कि वह मेसेडोनिया को यूरोपीय संघ  नाटो जैसे अहम वैश्विक मंचों में शामिल नहीं होने देंगे जब तक कि वह नाम नहीं बदलता. अर्थशास्त्री रहे जीव अपने राष्ट्र के नाटो  यूरोपियन संघ में शामिल होने की महत्ता पहचानते थे. इसी कारण जीव ने इस संधि पर हस्ताक्षर किये.

ग्रीस का तर्क

मेसेडोनिया शब्द ग्रीस के लोगों के लिए खास महत्व रखता है. ईसा से तीन शताब्दी पहले यहां के शासक सिकंदर ने लगभग पूरी संसार को ही फतह कर लिया था. इस कारण यह शब्द जगह यहां के लोगों के लिए विशेष लगाव का कारण है.

खास भूमिका

इस टकराव को सुलझाने में संयुक्त देश के वार्ताकार मैथ्यू निमेत्ज की खास किरदार रही. निमेत्ज 1994 से इस टकराव को हल कराने में लगे थे. तबवे अमेरिका के राजदूत हुआ करते थे.17 जून को ही निमेत्ज का 79 वां जन्मदिन था.

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