Up Kiran, Digital Desk: कल्पना कीजिए, आप अपनी उबर ऐप से कैब बुक करते हैं और आपके दरवाज़े पर एक ऐसी कार आकर रुकती है जिसमें कोई ड्राइवर ही नहीं है! यह अब कोई साइंस फिक्शन फिल्म का सीन नहीं, बल्कि जल्द ही हकीकत बनने वाला है। दुनिया की सबसे बड़ी राइड-शेयरिंग कंपनी उबर (Uber) ने AI चिप बनाने वाली दिग्गज कंपनी एनवीडिया (NVIDIA) के साथ हाथ मिलाया है ताकि 2027 तक 1 लाख सेल्फ-ड्राइविंग यानी बिना ड्राइवर वाली कारों को सड़कों पर उतारा जा सके।
यह सेल्फ-ड्राइविंग टेक्नोलॉजी के इतिहास में अब तक की सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण डील्स में से एक मानी जा रही है।
कैसे काम करेगा यह 'फ्यूचरिस्टिक' सिस्टम?
इस मेगा-पार्टनरशिप में दोनों कंपनियों की भूमिकाएं साफ हैं:
एनवीडिया (NVIDIA): वहीं, एनवीडिया इन कारों का 'दिमाग' तैयार करेगा। ये सेल्फ-ड्राइविंग कारें एनवीडिया के सबसे पावरफुल DRIVE PX Pegasus AI कंप्यूटिंग प्लेटफॉर्म से लैस होंगी। यह एक सुपर कंप्यूटर जैसा है जो कार में लगे दर्जनों कैमरों और सेंसर्स से आने वाले डेटा को रियल-टाइम में प्रोसेस करके कार को सुरक्षित रूप से चलाने का फैसला करता है।
यह टेक्नोलॉजी इतनी एडवांस है कि यह 360-डिग्री व्यू में सड़क पर मौजूद दूसरी गाड़ियों, पैदल चलने वालों और किसी भी तरह की रुकावट को पहचान सकती है और तुरंत प्रतिक्रिया दे सकती है।
क्यों है यह डील एक 'गेम-चेंजर'?
इस डील के सफल होने से पूरी ट्रांसपोर्टेशन इंडस्ट्री की तस्वीर बदल सकती है:
बढ़ेगी सुरक्षा: माना जाता है कि 90% से ज़्यादा सड़क दुर्घटनाएं इंसानी गलती से होती हैं। सेल्फ-ड्राइविंग कारें इस आंकड़े को बहुत कम कर सकती हैं।
24/7 उपलब्धता: बिना थके ये कारें दिन-रात सर्विस दे सकेंगी।
हालांकि, इन कारों को रेगुलेशन, कानूनी और सुरक्षा से जुड़ी कई चुनौतियों का सामना अभी भी करना पड़ेगा। लेकिन उबर और एनवीडिया का यह कदम दिखाता है कि सेल्फ-ड्राइविंग कारों का भविष्य अब ज़्यादा दूर नहीं है। तैयार हो जाइए, भविष्य की सवारी बस आने ही वाली है!




