Up Kiran,Digital Desk : भारत हर साल 26 जनवरी को अपनी गणराज्य की नींव को याद करता है। यह दिन न सिर्फ देश की सैन्य शक्ति और विकास की शान को प्रदर्शित करता है, बल्कि यह राष्ट्र की विविधताओं, एकता और आत्मनिर्भरता के संदेश को भी सामने लाता है। इस बार का गणतंत्र दिवस खास है क्योंकि यह ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्षों के योगदान को समर्पित है, जो भारतीय स्वतंत्रता संग्राम और राष्ट्रभक्ति की भावना का प्रतीक बन चुका है।
गणतंत्र दिवस: मात्र एक परेड नहीं
गणतंत्र दिवस की परेड केवल एक सैन्य शक्ति का प्रदर्शन नहीं है, यह भारतीय समाज की एकता और विविधता का उत्सव भी है। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की अद्भुत झांकियां इस दिन देश की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर और नई उपलब्धियों का सम्मिलित रूप से प्रदर्शन करती हैं। इस बार के आयोजन में ‘आत्मनिर्भर भारत’ का विषय भी प्रमुख रहेगा, जो राष्ट्र की नई दिशा और आत्मनिर्भरता के प्रति भारतीय जनता के जज़्बे को प्रकट करेगा।
आत्मनिर्भर भारत की दिशा में प्रगति
इस साल की गणतंत्र दिवस परेड में खासतौर पर ‘आत्मनिर्भर भारत’ के विचार को समर्पित किया गया है। देशभर से आए अद्भुत झांकियों और आधुनिक सैन्य प्रदर्शनों से यह संदेश जाएगा कि भारत अपनी ताकत और आत्मनिर्भरता में दिन-प्रतिदिन आगे बढ़ रहा है। यह विचार न केवल तकनीकी और सैन्य दृष्टिकोण से बल्कि सामाजिक और आर्थिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है, जिससे भारत के नागरिकों में गर्व और एकता की भावना पैदा होगी।
इस साल की विशेष थीम
गणतंत्र दिवस 2026 के लिए दो प्रमुख थीम तय की गई हैं:
स्वतंत्रता का मंत्र: वंदे मातरम्
समृद्धि का मंत्र: आत्मनिर्भर भारत
इन दोनों थीमों के अंतर्गत कुल 30 झांकियां प्रस्तुत की जाएंगी, जिनमें विभिन्न राज्य, केंद्र शासित प्रदेश और मंत्रालय शामिल होंगे।
झांकियों में देखने को मिलेगा इतिहास और आधुनिकता का संगम
इस बार की परेड में दर्शकों को भारत के स्वतंत्रता संग्राम से लेकर आज के तकनीकी और कृषि क्षेत्र में हुई प्रगति तक का सफर दिखाया जाएगा। 'वंदे मातरम्' और स्वतंत्रता संग्राम की गूंज झांकियों में सुनाई देगी, साथ ही रक्षा, विज्ञान, उद्योग और कृषि में भारत की प्रगति की भी झलक मिलेगी।
झांकियों में शामिल राज्यों का चयन
इस साल गणतंत्र दिवस परेड में जिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की झांकियां शामिल होंगी, उनका चयन बहुत सोच-समझ कर किया गया है। इनमें प्रमुख हैं- उत्तर प्रदेश, राजस्थान, पंजाब, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु, केरल, पश्चिम बंगाल, असम और गुजरात। साथ ही केंद्र सरकार के 13 मंत्रालय अपनी उपलब्धियों को दर्शाएंगे।
मंत्रालयों की झांकियां: सरकार की प्रगति का प्रदर्शन
केंद्र सरकार के 13 मंत्रालय इस साल अपनी झांकियों के माध्यम से देश की प्रगति को प्रदर्शित करेंगे। विशेष रूप से संस्कृति मंत्रालय की झांकी ‘वंदे मातरम्: राष्ट्र की आत्मा’ परेड का आकर्षण रहेगी। इसके अलावा रक्षा, शिक्षा, आयुष और गृह मंत्रालय (NDRF) जैसी अन्य मंत्रालयों की झांकियां भी देश के सामाजिक और आर्थिक विकास को प्रदर्शित करेंगी।
रोटेशन नीति और राज्यों की सहभागिता
गणतंत्र दिवस परेड में शामिल होने वाले राज्यों की सूची हर साल बदलती है ताकि हर राज्य को समान अवसर मिल सके। इस बार कुछ राज्यों जैसे अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम, गोवा और तेलंगाना की झांकियां परेड का हिस्सा नहीं होंगी। यह रोटेशन नीति सुनिश्चित करती है कि सभी राज्यों को समय-समय पर अपनी संस्कृति और उपलब्धियों को प्रदर्शित करने का अवसर मिले।
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