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Up Kiran, Digital Desk: दुनिया की सबसे पुरानी और सबसे उन्नत सभ्यताओं में से एक थी सिंधु घाटी सभ्यता। आज भी लोग हैरान होते हैं कि इतनी शानदार सभ्यता रातों-रात गायब कैसे हो गई। हड़प्पा, मोहनजोदड़ो, लोथल, राखीगढ़ी जैसे शहरों में मिले अवशेष बताते हैं कि ये लोग पक्की सड़कें बनाते थे, बेहतरीन पानी निकासी का इंतजाम था, धातु का इस्तेमाल करते थे और खेती में माहिर थे।

लेकिन अब एक नया शोध सबके होश उड़ा रहा है। आईआईटी गांधीनगर के वैज्ञानिकों ने 11 पन्नों की रिसर्च में साफ-साफ बता दिया है कि इस सभ्यता को किसी बाढ़ या भूकंप ने नहीं मारा। बल्कि लगातार सैकड़ों साल तक चलने वाले भयंकर सूखे ने इसे खत्म कर दिया।

प्रोफेसर विमल मिश्रा की टीम ने पाया कि करीब 4200 साल पहले मॉनसून में भारी कमी आ गई थी। बारिश 10 से 20 फीसदी तक कम हो गई। तापमान भी आधा डिग्री बढ़ गया। नतीजा ये हुआ कि सिंधु नदी और उसकी सहायक नदियां सूखने लगीं। खेती बर्बाद हो गई। लोग गेहूं-जौ छोड़कर दूसरी फसलें उगाने लगे लेकिन वो भी नहीं हो पाई।

सबसे डराने वाली बात ये है कि 85 साल के अंदर कम से कम चार बहुत बड़े सूखे पड़े। एक सूखा तो पूरा 164 साल तक चला! इतना लंबा सूखा कि बड़े-बड़े शहर खाली हो गए। लोग या तो मर गए या पूर्व की तरफ भाग गए। धीरे-धीरे शानदार शहर छोटे-छोटे गांवों और कबीलों में बदल गए।

वैज्ञानिकों ने पुरानी झीलों, गुफाओं और पौधों के अवशेषों का अध्ययन किया। सबूत साफ बताते हैं कि पानी की भयंकर कमी हो गई थी। उत्तरी अटलांटिक में ठंड बढ़ने और हिंद-प्रशांत महासागर के गर्म होने से भारत का मॉनसून कमजोर पड़ गया। समुद्र और जमीन के तापमान का फर्क कम होने से बादल ही नहीं बन पाते थे।

यानी जो सभ्यता पांच हजार साल पहले दुनिया से सैकड़ों साल आगे थी, उसे प्रकृति ने धीरे-धीरे इतना कमजोर कर दिया कि वो उठ नहीं पाई। ये शोध बताता है कि जलवायु परिवर्तन कोई नई बात नहीं है। हजारों साल पहले भी ये सभ्यताओं को मिटा चुका है।