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Up Kiran, Digital Desk: लंबे इंतजार के बाद कुमाऊं मंडल के उन कर्मचारियों के चेहरे खिल उठे जिन्होंने सालों तक चौकीदार, चपरासी या माली जैसे काम किए। शुक्रवार को शिक्षा विभाग ने एक साथ 86 चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को लिपिक वर्ग में प्रमोट कर दिया। सबसे खास बात ये कि ज्यादातर कर्मचारी तो उत्तराखंड राज्य बनने से भी पहले नौकरी में आ गए थे।

इन सभी ने हाल ही में विभाग की पदोन्नति परीक्षा पास की थी। नियम के मुताबिक हाईस्कूल पास करने वालों के लिए 15 फीसदी और इंटर पास करने वालों के लिए 10 फीसदी कोटा रखा गया है। इसी कोटे के तहत ये प्रमोशन हुए।

खुशी की दूसरी वजह ये कि प्रमोट हुए कर्मचारियों में 10 महिलाएं भी शामिल हैं। साथ ही 14 दिव्यांग कर्मचारी भी अब बाबू बन गए। विभाग ने साफ कहा है कि ये नियुक्ति खाली पड़े पदों के हिसाब से उसी स्कूल या कहीं और दी गई है।

अपर शिक्षा निदेशक (प्रारंभिक) गजेंद्र सिंह सौंन के आदेश में लिखा है कि सभी कर्मचारियों को अपने शैक्षणिक प्रमाण-पत्र नोटरी से सत्यापित करवाने हैं। इसके बाद 15 दिन के अंदर नए कार्यालय में जाकर चार्ज लेना होगा। वरना पदोन्नति अपने आप रद्द हो जाएगी।

एक और जरूरी बात – ये सारी पदोन्नतियां फिलहाल अस्थायी हैं। अगर कोर्ट में कोई केस चल रहा है तो उस फैसले के हिसाब से बदला जा सकता है।

पदोन्नति सूची देखते ही कर्मचारियों में खुशी की लहर दौड़ गई। कई पुराने कर्मचारियों ने बताया कि 20-25 साल से ज्यादा हो गए चौकीदारी करते हुए। अब पहली बार कुर्सी और टेबल पर बैठकर काम करने का मौका मिलेगा। सबने शिक्षा मंत्री और विभाग के अफसरों का शुक्रिया अदा किया।