Up Kiran, Digital Desk: आज के डिजिटल दौर में, जहाँ हर जानकारी बस एक क्लिक पर मौजूद है, हायर एजुकेशन यानी कॉलेजों और यूनिवर्सिटीज़ के लिए उनकी ऑनलाइन साख या 'डिजिटल रेप्युटेशन' किसी खज़ाने से कम नहीं है. यह अब सिर्फ़ एक मार्केटिंग का तरीका नहीं, बल्कि एक ऐसी ज़रूरी चीज़ बन गई है, जो यह तय करती है कि कौन सा संस्थान आगे बढ़ेगा और कौन सा पीछे रह जाएगा.
आज कोई भी छात्र या उनके माता-पिता किसी कॉलेज में एडमिशन लेने से पहले क्या करते हैं? वे सबसे पहले गूगल पर उस कॉलेज के बारे में सर्च करते हैं, उसके सोशल मीडिया पेज देखते हैं, और वहां पढ़ रहे छात्रों के रिव्यूज़ पढ़ते हैं. अगर ऑनलाइन जानकारी अच्छी, भरोसेमंद और पॉजिटिव है, तो एडमिशन लेने का फैसला आसान हो जाता है.
क्यों ज़रूरी है डिजिटल साख? छात्रों का भरोसा जीतना: अच्छी ऑनलाइन साख से छात्रों और अभिभावकों का भरोसा बनता है. उन्हें लगता है कि वे एक अच्छे और सुरक्षित संस्थान को चुन रहे हैं.
बेहतर शिक्षकों को जोड़ना: आजकल अच्छे प्रोफेसर और शिक्षक भी किसी संस्थान से जुड़ने से पहले उसकी ऑनलाइन रेप्युटेशन देखते हैं.
फंडिंग और पार्टनरशिप में आसानी: जिन संस्थानों की डिजिटल साख अच्छी होती है, उन्हें दूसरी कंपनियों और संस्थाओं से फंड या पार्टनरशिप मिलने में आसानी होती है.
कैसे बना सकते हैं अच्छी डिजिटल साख?
किसी कॉलेज के लिए अपनी वेबसाइट को आकर्षक और जानकारी से भरपूर बनाना, सोशल मीडिया पर छात्रों से जुड़ना, और ऑनलाइन मिलने वाले फीडबैक (चाहे अच्छा हो या बुरा) पर ध्यान देना बहुत ज़रूरी है. यह एक ऐसा निवेश है, जो लंबे समय तक फायदा देता है. यह ठीक वैसा ही है जैसे सालों से चली आ रही किसी दुकान की बाज़ार में अच्छी साख होती है, ठीक उसी तरह आज के ज़माने में कॉलेजों के लिए उनकी डिजिटल साख मायने रखती है.
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