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Up Kiran, Digital Desk: भारत और जापान की दोस्ती कितनी गहरी है, इसकी एक शानदार झलक आज तब देखने को मिली जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान के प्रधानमंत्री शिगेरु इशिबा ने एक साथ विश्व प्रसिद्ध शिंकनसेन (बुलेट ट्रेन) में सफ़र किया। यह सिर्फ़ एक ट्रेन यात्रा नहीं थी, बल्कि यह भारत के उस सपने की ओर बढ़ता हुआ एक मज़बूत क़दम था, जिसका इंतज़ार हर भारतीय कर रहा है। लेकिन इस सफ़र का सबसे यादगार पल वो था, जब पीएम मोदी की मुलाक़ात उन भारतीय नौजवानों से हुई जो इस कमाल की टेक्नोलॉजी को चलाने की ट्रेनिंग ले रहे हैं।

ट्रेन की रफ़्तार और रिश्तों की मज़बूती

टोक्यो से क्योटो के बीच रफ़्तार से दौड़ती बुलेट ट्रेन में दोनों नेताओं की मुस्कुराहटें बता रही थीं कि यह दोस्ती अब सिर्फ़ कागज़ी समझौतों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आपसी विश्वास और सम्मान की पटरी पर दौड़ रही है। दोनों नेताओं ने यात्रा के दौरान भारत में चल रहे बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट पर बात की और जापान ने भारत को हर संभव तकनीकी मदद देने का भरोसा दोहराया। यह यात्रा इस बात का प्रतीक थी कि जापान, भारत के विकास में एक भरोसेमंद साथी बनकर साथ खड़ा है।

वो पल जब हर भारतीय का सीना गर्व से चौड़ा हो गया

इस यात्रा का सबसे ख़ास और भावुक पल तब आया, जब पीएम मोदी की मुलाक़ात उन भारतीय ड्राइवरों और इंजीनियरों से हुई, जो जापान में बुलेट ट्रेन चलाने की ट्रेनिंग ले रहे हैं। अपने बीच अपने प्रधानमंत्री को देखकर उन युवाओं की ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा।

पीएम मोदी ने उनसे हाथ मिलाया, बात की और उनके अनुभव के बारे में पूछा। उन्होंने कहा, "आप सिर्फ़ ट्रेन चलाना नहीं सीख रहे, आप भारत का भविष्य चलाना सीख रहे हैं।" यह सुनकर उन युवाओं की आँखों में एक अलग ही चमक आ गई। यह एक ऐसा पल था जो दिखाता है कि भारत अब सिर्फ़ टेक्नोलॉजी का आयातक नहीं, बल्कि उसे चलाने और संभालने की महारत भी हासिल कर रहा है। जल्द ही यही युवा ड्राइवर भारत में बुलेट ट्रेन के पहले ड्राइवर बनेंगे और एक नया इतिहास रचेंगे।

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