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Up Kiran, Digital Desk: आंध्र प्रदेश की नई सरकार कर्मचारियों के मुद्दों को सुलझाने के लिए एक्शन में आ गई है. पिछले कई सालों से लंबित मांगों को लेकर कर्मचारी संगठनों में बढ़ते गुस्से को शांत करने के लिए शुक्रवार को सरकार द्वारा बनाई गई कैबिनेट सब-कमेटी ने यूनियन नेताओं के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की.

इस सब-कमेटी में वित्त मंत्री पय्यावुला केशव, शिक्षा मंत्री नारा लोकेश और आवास मंत्री वी. सत्यनारायण जैसे बड़े नाम शामिल थे. बैठक का मुख्य एजेंडा कर्मचारियों की समस्याओं को सुनना और उनका जल्द से जल्द समाधान निकालना था.

कर्मचारियों की मुख्य मांगें क्या थीं: कर्मचारी यूनियन के नेताओं ने बैठक में अपनी कई पुरानी और बड़ी मांगों को सरकार के सामने रखा. इसमें सबसे प्रमुख मांगें थीं:

CPS (अंशदायी पेंशन योजना) को रद्द करना: यह कर्मचारियों की सबसे बड़ी और पुरानी मांग है. वे चाहते हैं कि सरकार CPS को खत्म करके पुरानी पेंशन योजना (OPS) को फिर से बहाल करे.

कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों को नियमित करना: सालों से कॉन्ट्रैक्ट पर काम कर रहे हजारों कर्मचारियों को परमानेंट करने की मांग भी जोर-शोर से उठाई गई.

स्वास्थ्य कार्ड (Health Cards) में सुधार: कर्मचारियों ने शिकायत की कि मौजूदा स्वास्थ्य कार्ड से उन्हें कैशलेस इलाज मिलने में बहुत परेशानी होती है और कई बड़े अस्पताल इसे स्वीकार नहीं करते हैं. वे एक बेहतर और असरदार हेल्थ स्कीम की मांग कर रहे हैं.

लंबित डीए (महंगाई भत्ता) का भुगतान: कर्मचारियों के रुके हुए महंगाई भत्ते और दूसरे बकाया पैसों का तुरंत भुगतान करने की भी मांग की गई.

सरकार ने क्या दिया भरोसा: करीब तीन घंटे तक चली इस बैठक के बाद वित्त मंत्री पय्यावुला केशव ने मीडिया को बताया कि सरकार कर्मचारियों के सभी मुद्दों को लेकर बहुत गंभीर है. उन्होंने कहा, "आज की बैठक बहुत सकारात्मक रही. हमने सभी संगठनों की मांगों को ध्यान से सुना है. हम मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू के साथ चर्चा करके इन समस्याओं का एक-एक करके समाधान निकालेंगे."

मंत्री ने भरोसा दिलाया कि सरकार जल्द ही इन मुद्दों पर ठोस फैसले लेगी. उन्होंने यह भी संकेत दिए कि कुछ मांगों पर जल्द ही अच्छी खबर मिल सकती है.

यह बैठक सिर्फ एक शुरुआत मानी जा रही है. अब देखना यह होगा कि क्या सरकार अपने वादों पर खरी उतरती है और कर्मचारियों की नाराजगी को दूर कर पाती है या नहीं.