Up Kiran, Digital Desk: आप सुबह से लेकर शाम तक एक मल्टीटास्किंग एक्सपर्ट की तरह काम करते हैं। ऑफिस की मीटिंग्स, डेडलाइन्स, घर की ज़िम्मेदारियाँ, सोशल लाइफ आप हर मोर्चे पर कामयाब दिखते हैं। बाहर से देखने वालों के लिए आप एक सफल और प्रोडक्टिव इंसान हैं। लेकिन जैसे ही आप रात को बिस्तर पर जाते हैं, आपकी सारी सफलता धरी की धरी रह जाती है और आपका दिमाग है कि रुकने का नाम ही नहीं लेता। कल की मीटिंग, बच्चों की फीस, अधूरे काम हज़ारों ख्याल एक साथ दौड़ने लगते हैं और नींद कोसों दूर चली जाती है।
अगर यह आपकी कहानी है, तो हो सकता है आप 'हाई-फंक्शनिंग स्ट्रेस' के शिकार हों। यह एक ऐसी छुपी हुई मानसिक स्थिति है जो बाहर से सफलता का मुखौटा पहने रहती है, लेकिन अंदर ही अंदर आपकी नींद और सुकून को खत्म कर रही है।
क्या है ये हाई फंक्शनिंग स्ट्रेस ?
यह बर्नआउट या डिप्रेशन नहीं है। 'हाई-फंक्शनिंग स्ट्रेस' से जूझने वाला व्यक्ति अक्सर बहुत सफल और ऊर्जा से भरा हुआ दिखता है। वह हमेशा 'ऑन' मोड में रहता है और कभी रुकता नहीं। लेकिन अंदर ही अंदर, वह लगातार एक बेचैनी और दबाव महसूस करता है।
इसके कुछ आम लक्षण हैं
यह आपकी नींद को कैसे बर्बाद करता है?
जब हम तनाव में होते हैं, तो हमारा शरीर कोर्टिसोल और एड्रेनालाईन जैसे स्ट्रेस हॉर्मोन छोड़ता है। ये हॉर्मोन हमें किसी खतरे का सामना करने के लिए तैयार करते हैं, जिसे 'फाइट-या-फ्लाइट' मोड कहते हैं।
आमतौर पर, रात के समय कोर्टिसोल का स्तर गिर जाता है ताकि हमारा शरीर और दिमाग आराम कर सकें और हम सो सकें। लेकिन 'हाई-फंक्शनिंग स्ट्रेस' में आपका दिमाग दिनभर एक्टिव रहने का आदी हो जाता है। वह खतरे और काम के बीच का फ़र्क भूल जाता है। नतीजा? रात में भी आपका कोर्टिसोल लेवल बढ़ा रहता है और आपका शरीर आराम करने की बजाय 'अलर्ट' मोड में फँसा रहता है। इससे सोना तो दूर, बिस्तर पर शांत लेटना भी मुश्किल हो जाता है।
तो इसका समाधान क्या है? अपनी नींद वापस कैसे पाएं?
अच्छी खबर यह है कि आप इस साइकिल को तोड़ सकते हैं। इसके लिए आपको अपनी दिनचर्या में कुछ आसान लेकिन असरदार बदलाव करने होंगे:
याद रखें, हमेशा भागते रहना और व्यस्त रहना सफलता की निशानी नहीं है। असली सफलता वह है जहाँ काम के साथ-साथ मन का सुकून और रात की गहरी नींद भी शामिल हो।




