चेन्नई: बिहार में मतदाता सूची (voter list) से 47 लाख अपात्र मतदाताओं को हटाने के सफल अभियान के बाद, चुनाव आयोग अब यही 'महा-सफाई' अभियान तमिलनाडु में शुरू करने जा रहा है। अगले हफ्ते से, राज्य में विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision - SIR) की प्रक्रिया शुरू होगी ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि आने वाले विधानसभा चुनावों के लिए वोटर लिस्ट पूरी तरह से साफ-सुथरी और सटीक हो।
यह जानकारी चुनाव आयोग ने मद्रास हाई कोर्ट को दी है। आयोग ने बताया कि तमिलनाडु के बाद, चुनाव की तैयारी कर रहे अन्य राज्यों में भी इसी तरह की कवायद की जाएगी।
क्या है यह 'SIR' और क्यों है यह जरूरी?
SIR यानी विशेष गहन पुनरीक्षण, वोटर लिस्ट को अपडेट करने का एक बहुत ही सघन और विस्तृत तरीका है। इसमें बूथ लेवल के अधिकारी घर-घर जाकर वोटरों का वेरिफिकेशन करते हैं। इसका मुख्य उद्देश्य होता है:
मृतकों और हमेशा के लिए कहीं और बस चुके लोगों के नाम हटाना।
डुप्लीकेट (एक से अधिक जगह) वोटरों के नाम काटना।
यह सुनिश्चित करना कि कोई भी योग्य नागरिक वोट देने से वंचित न रह जाए।
बिहार में हाल ही में हुए SIR के दौरान, इस प्रक्रिया के माध्यम से मतदाता सूची से 47 लाख अपात्र नाम हटाए गए थे, जिससे इस अभियान की महत्ता साबित होती है।
AIADMK की शिकायत पर भी होगी कार्रवाई
चुनाव आयोग ने अदालत को यह भी आश्वासन दिया है कि इस पुनरीक्षण के दौरान AIADMK के एक पूर्व विधायक द्वारा की गई शिकायत पर भी ध्यान दिया जाएगा। पूर्व विधायक ने आरोप लगाया था कि चेन्नई के टी. नगर विधानसभा क्षेत्र में लगभग 13,000 AIADMK समर्थकों के नाम जानबूझकर वोटर लिस्ट से हटा दिए गए थे ताकि सत्तारूढ़ DMK को फायदा पहुंचाया जा सके।
चुनाव आयोग का यह कदम स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा और महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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