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Up kiran,Digital Desk : सर्दियों का मौसम... गरमा-गरम चाय की प्याली, आरामदायक रजाई और दोस्तों के साथ महफिलें... सब कुछ कितना अच्छा लगता है, है न? पर इस खूबसूरत मौसम में एक परेशानी लगभग हर किसी को होती है - बर्फ जैसे ठंडे हाथ-पैर!

कभी सोचा है आपने, कि मोटे-मोटे स्वेटर और जैकेट पहनने के बाद भी, जब हमारा बाकी शरीर गर्म होता है, तब भी हमारे हाथ, पैर और कान ही क्यों सबसे पहले 'कुल्फी' बन जाते हैं? क्या ये शरीर के सौतेले अंग हैं? जी नहीं! असल में यह आपके शरीर का एक बहुत ही έξυπνο (स्मार्ट) प्लान है। चलिए, आज इस राज़ से पर्दा उठाते हैं और जानते हैं कि हमारा शरीर सर्दियों में ऐसा क्यों करता है।

कहानी का हीरो है - आपका शरीर का 'सिक्योरिटी सिस्टम'

जैसे ही बाहर का तापमान गिरता है, हमारा शरीर एक 'हाई-अलर्ट' मोड में चला जाता है। उसका सबसे पहला और सबसे ज़रूरी काम होता है हमारे सबसे VIP अंगों को गर्म और सुरक्षित रखना।
कौन हैं ये VIP अंग?

  • दिल (Heart)
  • दिमाग (Brain)
  • किडनी (Kidneys)
  • लिवर (Liver)

आपका शरीर एक समझदार मैनेजर की तरह सोचता है - "चाहे कुछ भी हो जाए, इन VIPs तक गर्मी पहुंचनी ही चाहिए!"

और यहीं से शुरू होता है हाथ-पैरों के साथ 'भेदभाव'

अपने VIP अंगों तक गर्मी पहुंचाने के लिए, शरीर एक ट्रिक अपनाता है। वह शरीर के बाहरी और कम ज़रूरी हिस्सों, जैसे हमारे हाथ, पैर, कान और नाक की तरफ जाने वाली खून की नसों (Blood Vessels) को सिकोड़ देता है।

  • परिणाम: इन अंगों में खून का बहाव (ब्लड सर्कुलेशन) कम हो जाता है।
  • असर: खून ही तो शरीर में गर्मी लेकर दौड़ता है! जब खून ही कम आएगा, तो गर्मी भी कम पहुंचेगी और ये अंग ठंडे पड़ने लगेंगे।

तो असल में, आपका शरीर आपकी जान बचाने के लिए जानबूझकर आपके हाथ-पैरों को ठंडा रखता है!

हाथ-पैर क्यों बनते हैं सबसे पहले शिकार? इसकी 4 और बड़ी वजहें हैं:

  1. शरीर के 'बॉर्डर' पर हैं ये अंग: हाथ, पैर, कान और नाक हमारे शरीर के सबसे बाहरी हिस्से हैं। ये ठंडी हवा के सीधे संपर्क में आते हैं और अपनी गर्मी सबसे जल्दी खो देते हैं।
  2. सुरक्षा कवच (फैट) की कमी: इन अंगों में शरीर के दूसरे हिस्सों के मुकाबले फैट (चर्बी) की परत बहुत पतली होती है। फैट गर्मी को बाहर निकलने से रोकता है, और यहां फैट कम होने की वजह से ठंड ज़्यादा लगती है।
  3. आलस भी है एक कारण: सर्दियों में हम सब थोड़े 'आलसी' हो जाते हैं, चलना-फिरना कम कर देते हैं। कम एक्टिविटी का मतलब है कम ब्लड सर्कुलेशन, और नतीजा? ठंडे हाथ-पैर!
  4. कभी-कभी हो सकते हैं अंदरूनी कारण भी: अगर आपके हाथ-पैर ज़रूरत से ज़्यादा ठंडे रहते हैं, तो कभी-कभी इसके पीछे खून की कमी (एनीमिया) या थायरॉयड जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं।

तो क्या करें? कैसे रखें इन 'बेचारे' अंगों को गर्म?

  • उन्हें 'आर्मी' दीजिए: अपने हाथ-पैरों को अच्छी क्वालिटी के गर्म दस्तानों और ऊनी मोजों की 'सुरक्षा' दीजिए। कान को टोपी या मफलर से ढककर रखें।
  • थोड़ी 'हरकत' में लाएं बरकत: एक जगह बैठे न रहें। थोड़ा चलिए, टहलिए या घर पर ही हल्की-फुल्की एक्सरसाइज करें। इससे ब्लड सर्कुलेशन बढ़ेगा और शरीर में गर्मी आएगी।
  • अंदर से दें गर्मी: अपनी डाइट में ड्राई फ्रूट्स, सूप और गर्म तासीर वाली चीजें (जैसे अदरक, हल्दी) शामिल करें।
  • गर्म पानी की सिकाई: जब भी मौका मिले, अपने हाथ-पैरों को गुनगुने पानी में डुबोकर सिकाई करें। इससे तुरंत राहत मिलेगी।

तो अगली बार जब आपके हाथ-पैर ठंडे पड़ें, तो उन पर गुस्सा होने के बजाय याद रखिएगा कि आपका शरीर आपकी ही हिफाज़त कर रहा है!