Up kiran,Digital Desk : हरियाणा के सियासी गलियारों में एक बार फिर भूचाल आ गया है। जननायक जनता पार्टी (JJP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अजय सिंह चौटाला ने एक ऐसा दावा किया है जिसने सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं। चौटाला के अनुसार, हालिया राज्यसभा चुनाव के दौरान उन्हें भारतीय जनता पार्टी (BJP) की ओर से चुनाव लड़ने का गुप्त प्रस्ताव मिला था। इस खुलासे के बाद अब प्रदेश की राजनीति में गठबंधन की पुरानी यादें और नए समीकरणों की चर्चा तेज हो गई है।
मनोहर लाल ने दिया था ऑफर! अजय चौटाला ने खोलीं परतें
अजय चौटाला ने मीडिया से रूबरू होते हुए साफ तौर पर कहा कि उन्हें राज्यसभा भेजने की पेशकश किसी और ने नहीं, बल्कि पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने दी थी। चौटाला ने दावा किया कि भाजपा के रणनीतिकारों ने उन्हें समर्थन देने का पूरा मन बना लिया था। उनके मुताबिक, इस 'पॉलिटिकल गेम प्लान' के तहत उन्हें निर्दलीय या साझा उम्मीदवार के तौर पर मैदान में उतारने की तैयारी थी, ताकि चुनावी गणित को भाजपा के पक्ष में साधा जा सके।
जीत का समीकरण: 'कांग्रेस के 9 विधायकों का भी था भरोसा'
इस खुलासे में सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि अजय चौटाला ने केवल भाजपा ही नहीं, बल्कि विपक्षी खेमे में भी सेंधमारी का दावा किया है। उन्होंने कहा, "मेरे पास भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के 9 विधायकों के समर्थन का पक्का भरोसा था। अगर मैं चुनाव लड़ता, तो ये विधायक मेरे पक्ष में वोट करने को तैयार थे।" यह दावा हरियाणा कांग्रेस के भीतर गुटबाजी और क्रॉस वोटिंग के खतरों की ओर इशारा करता है, जो आने वाले विधानसभा चुनावों के लिए पार्टी की चिंता बढ़ा सकता है।
इनेलो की 'ना' ने बिगाड़ा खेल: क्यों पीछे हटे चौटाला?
इतना समर्थन मिलने के बावजूद अजय चौटाला ने चुनाव मैदान में उतरने से इनकार क्यों किया? इस सवाल पर उन्होंने स्थिति स्पष्ट की। चौटाला ने बताया कि उनकी जीत की राह में सबसे बड़ा रोड़ा उनके परिवार की ही पुरानी पार्टी इंडियन नेशनल लोकदल (INLD) बनी। उन्होंने कहा, "इनेलो के दो विधायकों का समर्थन मुझे नहीं मिलने वाला था। बिना उनके समर्थन के जीत का समीकरण अधूरा रह जाता और मैं हारने के लिए चुनाव नहीं लड़ना चाहता था।" इस बयान से साफ है कि चौटाला परिवार के बीच की राजनीतिक खाई अब भी काफी गहरी है।
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