Up Kiran, Digital Desk: बिहार में नीतीश कुमार की अगुवाई वाली एनडीए ने जो धमाकेदार जीत हासिल की है उसने उत्तर प्रदेश की सियासत में हड़कंप मचा दिया है। सबसे ज्यादा बेचैन समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव दिख रहे हैं। 2024 लोकसभा चुनाव में अच्छा प्रदर्शन करने के बाद 2027 के विधानसभा चुनाव में सत्ता वापसी का सपना देख रहे अखिलेश अब पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गए हैं। पार्टी कार्यकर्ताओं को साफ-साफ हिदायत दे दी गई है कि बिहार वाली कोई गलती यहां नहीं दोहराई जाएगी।
बिहार से सबक: अब यूपी में बवाली गाना बनाने की इजाजत नहीं!
अखिलेश यादव ने रविवार को मीडिया से बात करते हुए साफ कहा कि हमारे कलाकार भाई कोई बिहार जैसा गाना न बना दें। उन्होंने प्रेस वालों से भी अपील की कि अगर कोई गाना बनता भी है तो उसे सपा से मत जोड़िएगा। अखिलेश ने हंसते हुए कहा कि अब तो AI का जमाना है कुछ ही मिनटों में गाना तैयार हो जाता है इसलिए सभी लोग सतर्क रहें।
दरअसल बिहार चुनाव में आरजेडी के समर्थन में बने गानों ने महागठबंधन की साख को भारी नुकसान पहुंचाया था। “मारबो सिक्सर के… छाती में छह गोली” जैसे बोल वाले गाने को पीएम मोदी ने खूब लपेटा था। मोदी ने कहा था कि जंगलराज वाले फिर कट्टा लेकर आने को बेताब हैं। जनता ने इसे हाथों हाथ लिया और आरजेडी को भारी नुकसान हुआ। अखिलेश नहीं चाहते कि यूपी में भी कोई ऐसा गाना बन जाए जिसे बीजेपी उनके गले पड़ जाए।
रैली में हुड़दंग बंद! वरना वोट भाग जाएंगे
बिहार में तेजस्वी यादव की रैलियों में जो हुड़दंग हुआ उसने भी महागठबंधन की लुटिया डुबो दी। यादव बाहुल्य इलाकों में समर्थक सड़क पर बाइक दौड़ाते स्टंट करते पहुंचते थे। लोग कहते थे कि अभी सत्ता में नहीं आए हैं और इतना गुंडाराज तो सत्ता में आए तो क्या होगा। कहा जाता है कि तेजस्वी की रैली में जितने लोग आते थे उससे दोगुने वोट घट जाते थे।
2022 में भी सपा के कुछ बड़बोले समर्थकों की वजह से अखिलेश सत्ता से चूक गए थे। अब अखिलेश ने अपने नेताओं और कार्यकर्ताओं को सख्त मैसेज दे दिया है कि रैली में शांति बनाए रखें। कोई आक्रामकता नहीं दिखानी है नहीं तो दूसरे समुदाय के लोग दूर हो जाएंगे।
SIR पर नया दांव: अब विरोध नहीं बल्कि निगरानी
बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर आरजेडी-कांग्रेस ने खूब हल्ला मचाया था लेकिन फायदा कुछ नहीं हुआ। उल्टा लोगों ने इसे राजनीतिक ड्रामा मान लिया। सपा ने यूपी में पहले इसका विरोध किया था लेकिन अब रणनीति बदल दी है।
अब सपा ने गांव-गांव में PDA प्रहरी तैनात कर दिए हैं जो SIR की पूरी प्रक्रिया पर नजर रख रहे हैं। सपा सांसद राजीव राय ने कहा कि पिछड़े दलित अल्पसंख्यक वोटरों के नाम काटने की साजिश चल रही है। हम सबूत इकट्ठा कर रहे हैं ताकि चुनाव आयोग से नाम वापस जुड़वाए जा सकें। अखिलेश और डिंपल यादव ने तो यहां तक कह दिया कि SIR की समय सीमा बढ़ा दी जाए क्योंकि अभी चुनाव में ढेर सारा वक्त बाकी है।

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