Up kiran,Digital Desk : आंध्र प्रदेश की नई राजधानी के भविष्य पर लगा अनिश्चितता का बादल अब पूरी तरह छंटने वाला है। केंद्र की एनडीए सरकार बुधवार, 1 अप्रैल को लोकसभा में 'आंध्र प्रदेश पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक, 2026' पेश करने जा रही है। इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य अमरावती को कानूनी तौर पर आंध्र प्रदेश की एकमात्र और स्थायी राजधानी घोषित करना है। मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू के नेतृत्व वाली टीडीपी-एनडीए सरकार के लिए इसे एक बड़ी जीत माना जा रहा है, जो लंबे समय से अमरावती को विश्व स्तरीय शहर बनाने की वकालत कर रही थी।
कानूनी पेंच होगा दूर, हैदराबाद से खत्म होगा रिश्ता
दरअसल, यह कदम 'आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014' की कमियों को दूर करने के लिए उठाया जा रहा है। साल 2014 में जब तेलंगाना अलग हुआ था, तब व्यवस्था दी गई थी कि हैदराबाद 10 वर्षों तक दोनों राज्यों की साझा राजधानी रहेगा। जून 2024 में यह अवधि समाप्त हो गई, लेकिन मूल कानून में आंध्र प्रदेश की नई राजधानी के रूप में 'अमरावती' के नाम का स्पष्ट उल्लेख नहीं था। इसी कानूनी अस्पष्टता का फायदा उठाकर पिछली सरकारों ने 'तीन राजधानी' का विवाद खड़ा किया था। अब नए संशोधन बिल के जरिए कानून में स्पष्ट रूप से 'अमरावती' का नाम जोड़ दिया जाएगा, जिससे भविष्य में किसी भी तरह के कानूनी विवाद की गुंजाइश खत्म हो जाएगी।
विधानसभा से पहले ही पारित हो चुका है प्रस्ताव
बता दें कि इसी साल 28 मार्च को आंध्र प्रदेश विधानसभा में अमरावती को इकलौती राजधानी बनाने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया गया था। मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने खुद सदन में यह प्रस्ताव रखा था, जिसे बाद में केंद्र सरकार और लोकसभा अध्यक्ष को भेजा गया। सीएम नायडू ने सदन में दहाड़ते हुए कहा था कि दुनिया की कोई भी ताकत अब अमरावती से राजधानी का दर्जा नहीं छीन सकती। इस विधेयक के कानून बनते ही अमरावती के विकास कार्यों में और तेजी आने की उम्मीद है।
2028 तक 'ब्लू-ग्रीन सिटी' के रूप में निखरेगी अमरावती
मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू का विजन अमरावती को एक आधुनिक और सस्टेनेबल 'ब्लू-ग्रीन सिटी' के रूप में विकसित करना है। सरकार का लक्ष्य है कि साल 2028 तक अमरावती एक शानदार राजधानी के रूप में बनकर तैयार हो जाए। इस प्रोजेक्ट के लिए केंद्र सरकार से बड़े बजट और विदेशी निवेश की भी उम्मीदें जताई जा रही हैं। कल संसद में बिल पेश होने के बाद आंध्र प्रदेश के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ जाएगा और राज्य को अपनी स्थायी पहचान मिल जाएगी।




