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Up kiran,Digital Desk : ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव अब एक बेहद आक्रामक मोड़ पर पहुंच गया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेश के बाद अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ 'नेवल ब्लॉकेड' (समुद्री नाकाबंदी) को बेहद सख्त कर दिया है। इस अभियान को अंजाम देने के लिए अमेरिका ने 12 युद्धपोत, 100 से ज्यादा लड़ाकू विमान और 10,000 से अधिक सैनिकों को तैनात कर दिया है। अमेरिका के इस कदम से वैश्विक बाजार में तेल संकट और गहराने की आशंका बढ़ गई है।

अब बंदरगाहों तक सीमित नहीं नाकाबंदी: 'कहीं भी' होगी तलाशी

'ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ' के अध्यक्ष जनरल डैन केन ने पेंटागन में संवाददाताओं को बताया कि अमेरिका अब केवल ईरान के बंदरगाहों को ही नहीं रोक रहा, बल्कि दुनिया के किसी भी कोने में तैनात अमेरिकी सेना को ईरान से जुड़े जहाजों को रोकने की अनुमति दे दी गई है।

सक्रिय पीछा: अमेरिकी बल ईरानी झंडे वाले किसी भी जहाज या उन जहाजों का सक्रिय रूप से पीछा करेंगे, जिन पर ईरान को हथियार, तेल, धातु या इलेक्ट्रॉनिक उपकरण पहुंचाने का शक होगा।

प्रशांत क्षेत्र पर नजर: जनरल केन ने स्पष्ट किया कि उन जहाजों को भी निशाना बनाया जाएगा जो इस सप्ताह नाकाबंदी लागू होने से पहले होर्मुज जलडमरूमध्य से बाहर निकल चुके थे।

प्रतिबंधित सामानों की लंबी सूची जारी

अमेरिकी सेना ने एक नोटिस जारी कर बताया है कि वह "किसी भी स्थान पर" वाणिज्यिक जहाजों पर चढ़कर उनकी तलाशी ले सकती है।

पूर्ण प्रतिबंधित: हथियार, गोला-बारूद और सैन्य उपकरण।

शर्तीय प्रतिबंधित: कच्चा तेल, लोहा, इस्पात, एल्युमिनियम और भारी मशीनरी।

इलेक्ट्रॉनिक्स: बिजली उत्पादन उपकरण और इलेक्ट्रॉनिक सामान भी जब्त किए जा सकते हैं यदि उनके सैन्य उपयोग का थोड़ा भी संदेह हुआ।

भागे तो चलेगी गोली: अमेरिकी सेना की सख्त चेतावनी

नाकाबंदी लागू करने के लिए तैनात 10,000 अमेरिकी सैनिकों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं। 'यूएस सेंट्रल कमांड' के अनुसार:

बल प्रयोग: यदि कोई जहाज तलाशी देने से मना करता है या भागने की कोशिश करता है, तो चेतावनी के तौर पर गोली चलाई जा सकती है।

खौफ का असर: सैन्य कार्रवाई के पहले तीन दिनों के भीतर ही 14 जहाज नाकाबंदी का सामना करने के बजाय समुद्र से वापस लौट गए हैं।

क्यों बढ़ रहा है दबाव?

यह सख्त कार्रवाई ऐसे समय में हो रही है जब वर्तमान युद्धविराम कुछ ही दिनों में समाप्त होने वाला है। अमेरिका इस नाकाबंदी के जरिए ईरान को बातचीत की मेज पर अपनी शर्तों (खासकर परमाणु कार्यक्रम और यूरेनियम संवर्धन पूरी तरह बंद करने) पर लाने का दबाव बना रहा है।

वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज ऊर्जा आपूर्ति का सबसे महत्वपूर्ण मार्ग है। अमेरिका की इस 'टोटल नाकाबंदी' से तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं और खाद्य आपूर्ति शृंखला बुरी तरह प्रभावित हो सकती है। सामरिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम खाड़ी क्षेत्र में संघर्ष को और लंबा खींच सकता है।