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Up kiran,Digital Desk : आम आदमी पार्टी (AAP) के 7 राज्यसभा सांसदों के एक साथ भाजपा में शामिल होने से भारतीय राजनीति में आया भूचाल थमने का नाम नहीं ले रहा है। इस महा-बगावत पर अब समाजसेवी अन्ना हजारे की तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। अन्ना, जिनके आंदोलन से अरविंद केजरीवाल और राघव चड्ढा जैसे नेता निकले थे, उन्होंने इस पूरी घटना के लिए सीधे तौर पर 'आप' के नेतृत्व और उनकी कार्यशैली को जिम्मेदार ठहराया है। अन्ना ने दो टूक कहा कि यदि पार्टी अपने मूल सिद्धांतों पर अडिग रहती, तो आज उसे यह दिन नहीं देखना पड़ता।

अन्ना हजारे का बड़ा हमला: 'नेतृत्व की गलती का नतीजा है ये टूट'

महाराष्ट्र के अहिल्यानगर में मीडिया से बात करते हुए अन्ना हजारे ने कहा कि लोकतंत्र में हर किसी को अपनी राय रखने और रास्ता चुनने का अधिकार है। उन्होंने कहा, "इन सांसदों को पार्टी के भीतर जरूर कुछ बड़ी परेशानियां हुई होंगी, तभी उन्होंने इतना बड़ा कदम उठाया है। यह आम आदमी पार्टी के नेतृत्व की हार है। अगर केजरीवाल और उनकी टीम सही रास्ते पर चलती, तो उनके सबसे पुराने साथी आज उनका साथ छोड़कर नहीं जाते।" अन्ना ने संकेत दिया कि पार्टी के भीतर सबकुछ ठीक नहीं चल रहा था और संवाद की कमी ने इस फूट को जन्म दिया।

सोमनाथ भारती ने दागे सवाल: 'संदीप पाठक, आपने ये क्या किया?'

सांसदों के पलायन के बाद 'आप' के भीतर भी जबरदस्त घमासान मचा है। पार्टी के वरिष्ठ नेता सोमनाथ भारती ने सोशल मीडिया पर संदीप पाठक को टैग करते हुए तीखे सवाल पूछे। भारती ने लिखा, "संदीप भाई, आपने ऐसा क्यों किया? आप तो वही शख्स हैं जो भाजपा को देश के लिए सबसे बड़ा खतरा बताते थे, फिर आज उसी के साथ कैसे खड़े हो गए?" भारती ने यह भी कहा कि इस तरह के फैसले से पार्टी के कार्यकर्ताओं के भरोसे को गहरी चोट पहुंची है।

एक्शन में सिसोदिया: राजकोट से दिल्ली तक की दौड़

शुक्रवार रात को दिल्ली की राजनीति में हलचल तब और बढ़ गई जब मनीष सिसोदिया आनन-फानन में गुजरात से दिल्ली लौटे। सिसोदिया राजकोट में निकाय चुनाव के प्रचार में जुटे थे, लेकिन दिल्ली में पार्टी के बिखरने की खबर मिलते ही वे सब छोड़-छाड़ कर केजरीवाल से मिलने पहुंचे। सूत्रों के अनुसार, दोनों नेताओं के बीच देर रात तक रणनीति पर चर्चा हुई। सिसोदिया की वापसी का मुख्य मकसद पार्टी के बचे हुए विधायकों और कार्यकर्ताओं को एकजुट रखना है ताकि पंजाब और दिल्ली की सरकारों पर कोई आंच न आए।

राज्यसभा चेयरमैन से शिकायत: 'आप' की कानूनी जवाबी कार्रवाई

आम आदमी पार्टी इस टूट को आसानी से स्वीकार करने के मूड में नहीं है। पार्टी अब तकनीकी आधार पर बागी सांसदों को घेरने की तैयारी कर रही है:

दलबदल कानून: पार्टी का तर्क है कि आधिकारिक तौर पर केवल राघव चड्ढा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल ने ही मंच पर भाजपा की सदस्यता ली है। ऐसे में वे बहुमत साबित नहीं कर सकते।

एनडी गुप्ता का पत्र: पार्टी के मुख्य सचेतक (Chief Whip) एनडी गुप्ता जल्द ही राज्यसभा सभापति को पत्र सौंपेंगे। इस पत्र में इन तीनों प्रमुख नेताओं की सदस्यता रद्द करने की मांग की जाएगी। 'आप' का कहना है कि यह सामूहिक विलय नहीं, बल्कि निजी स्वार्थ के लिए की गई बगावत है।

क्या कहती है 'इनसाइड स्टोरी'?

जानकारों का मानना है कि राघव चड्ढा को राज्यसभा उप-नेता पद से हटाना और उनकी जगह अशोक मित्तल को लाना ही इस पूरी बगावत की अंतिम वजह बना। चड्ढा, जो अन्ना आंदोलन के समय से केजरीवाल के खास रहे थे, उन्होंने इसे अपमान के तौर पर लिया। अब देखना यह है कि क्या केजरीवाल की कानूनी चुनौती इन सांसदों की सदस्यता बचा पाएगी या राज्यसभा में 'आप' का ग्राफ हमेशा के लिए नीचे गिर जाएगा।