Up kiran,Digital Desk : मणिपुर में शांति बहाली की कोशिशों को एक बार फिर बड़ा झटका लगा है। महीनों से जारी मैतेई और कुकी समुदायों के संघर्ष के बीच अब राज्य में एक नया मोर्चा खुल गया है। उखरुल जिले में शुक्रवार को नगा और कुकी समुदायों के बीच भड़की भीषण हिंसा में कम से कम तीन लोगों की जान चली गई है। गोलीबारी की इन घटनाओं ने सीमावर्ती जिले में तनाव को चरम पर पहुंचा दिया है, जिसके बाद सुरक्षा बलों को हाई अलर्ट पर रखा गया है।
तड़के शुरू हुआ मौत का तांडव, गांव वालों में दहशत
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, उखरुल जिले के सीनाकेइथेई गांव के पास शुक्रवार तड़के तांगखुल नगा और कुकी समुदाय के सशस्त्र गुटों के बीच आमना-सामना हुआ। दोनों ओर से हुई भारी गोलीबारी में 29 वर्षीय तांगखुल युवक होरशोकमी जमांग की मौके पर ही मौत हो गई। वह मूल रूप से कामजोंग जिले का निवासी था। इस हिंसक झड़प में तीन अन्य नागरिक भी गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिन्हें स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
नगा संगठनों का आरोप: सोओ (SoO) उग्रवादियों ने किया हमला
तांगखुल नगा लॉन्ग (TNL) जैसे प्रमुख नगा संगठनों ने इस हमले के लिए कुकी उग्रवादियों को जिम्मेदार ठहराया है। संगठन का दावा है कि 'सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशन' (SoO) समझौते के दायरे में आने वाले कुकी उग्रवादी क्षेत्र में अशांति फैला रहे हैं। उनके अनुसार, जब नगा विलेज गार्ड इलाके में गश्त कर रहे थे, तभी कुकी उग्रवादियों ने घात लगाकर हमला किया, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई की गई।
मुल्लम गांव में भी भारी हिंसा, दो कुकी युवकों की गई जान
पहली घटना के कुछ ही घंटों बाद कुकी बहुल मुल्लम गांव से भी खूनी संघर्ष की खबर आई। यहां हुई गोलीबारी में दो कुकी युवकों—लेतलाल सितल्हो और पाओमिनलुन हाओलाओ—की मौत हो गई। मुल्लम ग्राम प्राधिकरण का आरोप है कि तांगखुल उग्रवादियों ने सुबह करीब 5:30 बजे गांव पर धावा बोला और अंधाधुंध फायरिंग की। कुकी संगठनों ने दावा किया है कि इस हमले के दौरान मुल्लम और सोंगफाल गांवों में कई घरों को आग के हवाले कर दिया गया है।
क्यों बढ़ रहा है नगा और कुकी समुदायों में तनाव?
उखरुल जिला पारंपरिक रूप से तांगखुल नगाओं का गढ़ माना जाता है। हालांकि, फरवरी 2026 से यहां तांगखुल और कुकी समुदायों के बीच जमीनी वर्चस्व और आपसी अविश्वास को लेकर तनाव लगातार बढ़ रहा है। पिछले हफ्ते भी इसी जिले में दो तांगखुल व्यक्तियों की हत्या कर दी गई थी। जानकारों का मानना है कि यदि इस नए संघर्ष को तुरंत नहीं रोका गया, तो मणिपुर में जातीय हिंसा का दायरा और अधिक भयावह हो सकता है।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम, शांति की अपील
घटना के बाद उखरुल और आसपास के इलाकों में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात कर दिए गए हैं। जिला प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने और अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है। फिलहाल पुलिस और अर्धसैनिक बल संवेदनशील इलाकों में फ्लैग मार्च कर रहे हैं, लेकिन दोनों समुदायों के बीच पैदा हुई खाई ने प्रशासन की चुनौती को कई गुना बढ़ा दिया है।




