Up Kiran, Digital Desk: झारखंड राज्य निर्वाचन आयोग ने शुक्रवार को राज्य के विभिन्न नगर निकायों के लिए मेयर, उपमेयर, नगर परिषद और नगर पंचायत अध्यक्ष पदों के आरक्षण को लेकर एक अहम अधिसूचना जारी की। यह कदम आगामी चुनावों की दिशा में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है, क्योंकि इससे राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में आरक्षित सीटों का निर्धारण हो गया है। आयोग ने कुल 46 नगर निकायों के लिए आरक्षित पदों की सूची सार्वजनिक की है, जिससे उम्मीदवारों के लिए अपनी राजनीतिक रणनीति तैयार करना आसान होगा।
विभिन्न नगर निकायों में आरक्षण का बंटवारा
यह आरक्षण सूची विशेष रूप से महिला, अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और पिछड़े वर्ग (OBC) के लिए आरक्षित सीटों पर केंद्रित है। जैसे कि मानगो नगर निगम में मेयर पद को सामान्य महिला के लिए आरक्षित किया गया है। वहीं आदित्यपुर नगर निगम को अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित कर दिया गया है, जो इस समुदाय के उम्मीदवारों के लिए एक अहम अवसर है।
कुछ अन्य महत्वपूर्ण नगर निकायों के लिए आरक्षण की स्थिति निम्नलिखित है:
जुगसलाई नगर परिषद: सामान्य महिला के लिए आरक्षित
मेदिनीनगर नगर निगम: महिला सामान्य
हजारीबाग नगर निगम: अत्यंत पिछड़ा वर्ग 1 के लिए आरक्षित
गिरीडीह नगर निगम: अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित
देवघर नगर निगम: अनारक्षित
चास नगर निगम: अनारक्षित
इन बदलावों का बड़ा असर आगामी चुनावों में उम्मीदवारों के चयन और उनके समर्थकों की रणनीतियों पर पड़ने वाला है।
चुनावी तिथियां और उम्मीदें
सूत्रों के मुताबिक, चुनाव मार्च तक संपन्न हो सकते हैं। यह आरक्षण की घोषणा इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है क्योंकि इससे संबंधित नगर निकायों में चुनावी अभियान तेज हो जाएगा। उम्मीदवारों को अब अपनी तैयारी में तेजी लानी होगी, ताकि वे आरक्षित और अनारक्षित सीटों के अनुसार अपने अभियान को सही दिशा दे सकें।
आरक्षण की सूची में अन्य प्रमुख बदलावों में निम्नलिखित नगर निकाय शामिल हैं:
गढ़वा नगर परिषद: अनारक्षित
विश्रामपुर नगर परिषद: महिला सामान्य
चतरा नगर परिषद: सामान्य
झुमरीतिलैया नगर परिषद: पिछड़ा वर्ग 2
मधुपुर नगर परिषद: अत्यंत पिछड़ा वर्ग 1 महिला
इसके अतिरिक्त कई अन्य नगर परिषदों और पंचायतों में भी आरक्षण की स्थिति स्पष्ट की गई है, जिनमें सामान्य महिला, अनुसूचित जाति, और अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित सीटें शामिल हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि राज्य के छोटे और बड़े शहरों में राजनीतिक दल और उम्मीदवार अब इन बदलावों को ध्यान में रखते हुए अपने चुनावी रणनीति तैयार करेंगे।




