Up Kiran, Digital Desk: मुंबई में बीएमसी (बृहन्मुंबई महानगरपालिका) चुनावों में ऐतिहासिक जीत के बाद, राजनीतिक हलकों में अब एक सवाल सबसे ज़्यादा उठ रहा है: अगला मेयर कौन होगा? 227 सीटों वाली इस नगर निगम में बीजेपी ने सबसे बड़ी पार्टी के रूप में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है, लेकिन असली दांव मेयर पद को लेकर खेला जा रहा है। इस बार मेयर का पद महिला के लिए आरक्षित होने से मुकाबला और भी दिलचस्प हो गया है।
महिला आरक्षण: राजनीतिक समीकरणों में बदलाव
इस बार के चुनावों में महिला आरक्षण ने एक नया मोड़ लिया है। महाराष्ट्र के 29 नगर निगमों में 15 शहरों में महिला मेयर का चुनाव होगा, और मुंबई का मेयर पद भी महिला के लिए आरक्षित है। इसने बीजेपी में कई महिला उम्मीदवारों को आगे बढ़ने का मौका दिया है। हालांकि, कुछ बड़े नाम जो पारंपरिक रूप से इस पद के लिए दावेदार माने जाते थे, अब महिला आरक्षण के कारण बाहर हो गए हैं।
बीजेपी में कौन होगा अगला चेहरा?
बीजेपी के भीतर इस समय कई महिला नेता मेयर पद की रेस में हैं। इन नामों में सबसे प्रमुख हैं तेजस्वी घोसालकर, ऋतु तावड़े, राजश्री शिरवडकर, और शीतल गंभीर।
तेजस्वी घोसालकर: राजनीतिक विरासत और जनसमर्थन
तेजस्वी घोसालकर का नाम इस रेस में सबसे आगे है। 38 वर्षीय तेजस्वी ने शिवसेना (UBT) छोड़कर बीजेपी जॉइन की और दहिसर से शानदार जीत दर्ज की। वे दिवंगत अभिषेक घोसालकर की पत्नी और पूर्व विधायक विनोद घोसालकर की बहू हैं। उनका राजनीतिक अनुभव और उनके परिवार का जनसमर्थन उन्हें मेयर पद के लिए एक मजबूत उम्मीदवार बना देता है।
ऋतु तावड़े: पार्टी संगठन में मजबूत पकड़
53 वर्षीय ऋतु तावड़े घाटकोपर से दूसरी बार पार्षद चुनी गई हैं। वे मराठा समाज से आती हैं और अपनी लोकप्रियता का परिचय देने के लिए गुजराती बहुल इलाके से जीत हासिल की। बीजेपी संगठन में उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती है और उन्हें प्रशासनिक समझ रखने वाली नेता के रूप में देखा जाता है।
राजश्री शिरवडकर और शीतल गंभीर: अनुभवी चेहरे
बीजेपी के अंदर राजश्री शिरवडकर को एक अनुभवी और ज़मीनी कार्यकर्ता के तौर पर जाना जाता है, जबकि शीतल गंभीर का नाम पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में भी भरोसेमंद माना जाता है। दोनों नामों को अंतिम दौर की चर्चा में रखा जा रहा है, हालांकि फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि इनमें से कौन सी नेता बीजेपी का चेहरा बनेगी।
गठबंधन की राजनीति: बीजेपी और शिंदे गुट की जंग
बीजेपी के पास इस समय 89 सीटें हैं, जबकि शिंदे गुट की शिवसेना ने 29 सीटें जीती हैं। दोनों दलों ने मिलकर बहुमत हासिल किया है, लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या बीजेपी मेयर का पद अपने पास रखेगी या फिर गठबंधन धर्म निभाते हुए यह पद शिवसेना को सौंपेगी। फिलहाल बीजेपी के भीतर से संकेत मिल रहे हैं कि पार्टी खुद ही मेयर पद पर काबिज होना चाहती है।

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