Up kiran,Digital Desk : सुरों की मल्लिका और भारतीय संगीत जगत की अनमोल धरोहर आशा भोंसले अब हमारे बीच नहीं रहीं। रविवार, 12 अप्रैल 2026 को मुंबई के एक अस्पताल में 92 वर्ष की आयु में उन्होंने अंतिम सांस ली। करीब आठ दशकों तक अपनी जादुई आवाज से करोड़ों दिलों पर राज करने वाली आशा ताई के जाने से संगीत के एक स्वर्णिम युग का अंत हो गया है। हालांकि, हजारों रिकॉर्ड्स और सैकड़ों पुरस्कारों से नवाजी गईं आशा जी के मन में एक ऐसी कसक बाकी रह गई, जिसे वह जीवनभर पूरा नहीं कर सकीं।
दुनिया जीती पर शिक्षा की कमी का रहा मलाल
आशा भोंसले ने अपने करियर में 100 से भी अधिक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मान हासिल किए, लेकिन उनकी एक इच्छा हमेशा अधूरी रही। उन्हें इस बात का गहरा दुख था कि वह अपनी पढ़ाई पूरी नहीं कर पाईं। एक साक्षात्कार के दौरान उन्होंने स्वीकार किया था कि बचपन में काम के बोझ और परिस्थितियों के चलते उन्हें स्कूल जाने का पर्याप्त अवसर नहीं मिला। यही वजह थी कि संगीत की बारीकियों को समझने वाली यह महान गायिका अंग्रेजी भाषा पर पकड़ न बना पाने के कारण खुद को थोड़ा अधूरा महसूस करती थीं।
विदेशी मंचों पर महसूस होती थी एक कमी
दुबई के ग्लोबल इंडियन इंटरनेशनल स्कूल (GIIS) में एक कार्यक्रम के दौरान आशा जी ने अपनी भावनाओं को साझा करते हुए कहा था कि जब भी वह अमेरिका या लंदन जैसे देशों में परफॉर्म करने जाती थीं, तो वहां के संगीत और भाषा को देखकर उन्हें अफसोस होता था। उन्होंने भावुक होते हुए कहा था, "मुझे आज भी बुरा लगता है कि मैं उनकी बोली नहीं सीख पाई। अगर मुझे सही शिक्षा मिली होती, तो शायद मैं अंग्रेजी गीतों के क्षेत्र में भी नए कीर्तिमान स्थापित करती। हमारा गायन का स्टाइल और अंग्रेजी शब्दों का संगम मुझे और भी ऊंचाइयों पर ले जाता।"
गाते-गाते विदा होने की थी आखिरी ख्वाहिश
आशा ताई के लिए संगीत महज एक पेशा नहीं, बल्कि उनकी सांसों की तरह था। एक हालिया पॉडकास्ट में उन्होंने अपनी अंतिम इच्छा का जिक्र करते हुए सबको भावुक कर दिया था। उन्होंने कहा था, "मैंने बचपन से सिर्फ गाना ही सीखा है। गाना ही मेरी जिंदगी है। अब मुझे और कुछ नहीं सीखना, बस मेरी यही इच्छा है कि मैं गाते-गाते ही इस दुनिया से विदा लूं।" आज जब वह हमारे बीच नहीं हैं, तो उनके गाए गीत और उनकी वो मासूम इच्छाएं उनके प्रशंसकों की आंखों में नमी छोड़ गई हैं।




