Up kiran,Digital Desk : प्रयागराज में आयोजित माघ मेला के दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े विवाद ने संत समाज में विभाजन पैदा कर दिया है। रामनगरी अयोध्या के कई संत इस मामले में दो खेमों में दिखाई दिए।
मुख्यमंत्री योगी के समर्थक संत
कुछ संत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समर्थन में खड़े हैं। उनका कहना है कि प्रयागराज प्रशासन की कार्रवाई उचित थी और शंकराचार्य का व्यवहार मर्यादा के विपरीत रहा। इन संतों का मानना है कि माघ मेले में अनुशासन बनाए रखना आवश्यक था।
शंकराचार्य का समर्थन कर रहे संत
वहीं कुछ अन्य संत स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थन में हैं। उनका कहना है कि मेला प्रशासन और पुलिस का शंकराचार्य के प्रति व्यवहार उचित नहीं था। इनका मानना है कि विवाद को गलत तरीके से बढ़ाया गया और इसे शांतिपूर्वक सुलझाया जाना चाहिए।
विवाद की गंभीरता और पदवी तक पहुंचा मामला
माघ मेले के मौनी अमावस्या के अवसर पर हुए स्नान और प्रशासनिक टकराव के बाद यह विवाद व्यापक हो गया। विवाद अब केवल मेला प्रशासन तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि शंकराचार्य की पदवी तक पहुंच गया है। संत समाज में इसे लेकर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।




