
jaisalmer violence: रेगिस्तान की सुनहरी धरती जैसलमेर एक बार फिर सुर्खियों में है। मगर इस बार वजह विकास या पर्यटन नहीं बल्कि रॉयल्टी को लेकर छिड़ा खूनी विवाद है। आज सवेरे सदर इलाके के सम रोड पर काहला फांटा रॉयल्टी नाके पर हुई हिंसक झड़प ने पूरे शहर को हिलाकर रख दिया। इस घटना में बीजेपी विधायक छोटू सिंह भाटी के बेटे भवानी सिंह भाटी पर रॉयल्टी ठेकेदार से जुड़े लोगों ने हमला कर दिया, जिसमें उन्हें गंभीर चोटें आईं।
हमलावरों ने उनकी फॉर्च्यूनर गाड़ी में तोड़फोड़ की और नाके को आग के हवाले कर दिया। पुलिस ने आनन फानन कार्रवाई करते हुए 24 लोगों को हिरासत में लिया है, मगर सवाल ये है कि क्या ये हिंसा महज एक झड़प थी या इसके पीछे गहरी साजिश छिपी है?
विवाद की जड़, रॉयल्टी का पुराना खेल
ये सब शुरू हुआ सुबह के वक्त जब रॉयल्टी ठेकेदार के लोगों ने पत्थरों से लदे ट्रकों को काहला फांटा पर रोक लिया। ठेकेदारों ने रॉयल्टी की मांग की, जिसका ट्रक ड्राइवरों ने विरोध किया। मामला बढ़ा तो ट्रक चालकों ने विधायक छोटू सिंह भाटी के छोटे भाई नखत सिंह को सूचना दी। नखत सिंह अपने भतीजे भवानी सिंह और कुछ सहयोगियों के साथ मौके पर पहुंचे। मगर बातचीत सुलझने की बजाय बिगड़ गई। भवानी सिंह के मुताबिक, "हम शांतिपूर्वक बात करने गए थे, मगर ठेकेदार पक्ष ने अचानक हमला बोल दिया। लाठी और तलवारों से मारपीट की गई।"
बता दें कि ये विवाद कोई नया नहीं है। जैसलमेर में रॉयल्टी को लेकर ठेकेदार यूनियन और रॉयल्टी ठेकेदारों के बीच लंबे समय से तनातनी चल रही थी। ठेकेदार यूनियन का आरोप है कि रॉयल्टी ठेकेदार मनमानी करते हैं और माइनिंग नियमों को ताक पर रखकर ज्यादा राशि वसूलते हैं। इसी सिलसिले में 1 अप्रैल को यूनियन ने जिला कलेक्टर प्रताप सिंह को ज्ञापन सौंपकर कार्रवाई की मांग की थी। मगर प्रशासन की निष्क्रियता ने इस आग में घी डालने का काम किया। फिलहाल मामले की जांच जारी है।
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