img

Up Kiran, Digital Desk: सोचिए जरा। दो साल से आपका चेहरा सूजा हुआ है। दर्द इतना कि मुंह ठीक से नहीं खुलता। डॉक्टर एंटीबायोटिक पर एंटीबायोटिक लिखते जा रहे हैं लेकिन आराम नाममात्र भी नहीं। देवरिया की एक 23 साल की लड़की के साथ ठीक यही हो रहा था। आखिरकार जब वह दिल्ली के एम्स पहुंची तो पता चला कि उसकी मांसपेशियों में एक जीवित कीड़ा रह रहा है। नाम है मायोसिस्टीसरकोसिस। यह बीमारी इतनी रेयरेस्ट ऑफ रेयर है कि चेहरे में तो शायद ही कभी देखी गई हो।

गाँव से एम्स तक का दर्द भरा सफर

लड़की बीटीसी कर रही है। पिता खेतों में मेहनत करते हैं। दो साल पहले चेहरा फूलना शुरू हुआ। पहले लगा कोई इंफेक्शन होगा। देवरिया गोरखपुर फिर लखनऊ तक के बड़े अस्पताल घूम लिए। हर जगह डॉक्टरों ने इंफेक्शन समझकर दवाइयाँ ठूंसीं। हालत सुधरने की बजाय बिगड़ती चली गई। किसी ने सलाह दी कि एम्स चलो। वहां दंत चिकित्सा विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ शैलेश कुमार से मिलो।

डॉ शैलेश ने जब स्कैन और जांच कराई तो सब हैरान रह गए। दाहिनी तरफ की चबाने वाली मांसपेशियों में सिस्टिसरकस का लार्वा जिंदा था। यह वही कीड़ा है जो सूअर के मांस या गंदगी में उगे सब्जियों से इंसान के शरीर में घुसता है। अगर यह दिमाग तक पहुंच जाए तो झटके आने शुरू हो जाते हैं। आंख में गया तो अंधापन हो सकता है।

चेहरा बचाने की अनोखी सर्जरी

सामान्य तौर पर ऐसे कीड़ों को निकालने के लिए चेहरे पर चीरा लगता है। निशान जीवन भर रह जाता है। लड़की जवान है। शादी की उम्र है। डॉक्टरों ने फैसला किया कि चेहरा बिल्कुल नहीं छूएंगे। पूरा ऑपरेशन मुंह के अंदर से किया जाएगा।

कार्यकारी निदेशक मेजर जनरल (रिटायर्ड) डॉ विभा दत्ता को पूरी रिपोर्ट दी गई। फिर ऑपरेशन थिएटर में लड़की को बेहोश किया गया। डॉ शैलेश कुमार की टीम ने मुंह के भीतरी हिस्से से पहुंचकर कीड़े को पूरी तरह बाहर निकाल दिया। चेहरे पर एक खरोंच तक नहीं आई।

ये डॉक्टर बने हीरो

सीनियर रेजिडेंट डॉ प्रवीण कुमार  

जूनियर रेजिडेंट डॉ सुमित  

एनेस्थीसिया विभागाध्यक्ष डॉ संतोष शर्मा  

एसोसिएट प्रोफेसर डॉ गणेश निमजे  

एकेडेमिक जूनियर रेजिडेंट डॉ रिया  

और नर्सिंग स्टाफ पंकज देवी दिव्या ध्रुव प्रतिभा।

एम्स की कार्यकारी निदेशक ने दंत रोग विभागाध्यक्ष डॉ श्रीनिवास और पूरी टीम को बधाई दी। विभाग अब इस अनोखे केस को अंतरराष्ट्रीय जर्नल में प्रकाशित करने की तैयारी कर रहा है।