Up kiran,Digital Desk : बांग्लादेश में 12 फरवरी को हुए आम चुनाव के नतीजों में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) की शानदार वापसी तो हो गई है, लेकिन देश में शांति की उम्मीदें फिलहाल धुंधली नजर आ रही हैं। चुनाव परिणाम आने के बाद देश के पांच अलग-अलग जिलों में भीषण हिंसा भड़क उठी है। बीएनपी और जमात-ए-इस्लामी के कार्यकर्ताओं के बीच हुई इन झड़पों में अब तक कई लोग घायल हुए हैं, जबकि उपद्रवियों ने घरों और संपत्तियों को आग के हवाले कर दिया है।
बीएनपी के दो गुटों में 'गृहयुद्ध', चलीं बंदूकें
नटोर जिले के लालपुर उपजिला में शनिवार रात स्थिति तब बेकाबू हो गई जब बीएनपी के ही दो गुट आपस में भिड़ गए। वर्चस्व की इस लड़ाई में छह लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। स्थानीय पुलिस स्टेशन के प्रभारी मोहम्मद मोजिबर रहमान के अनुसार, पुलिस ने मौके से एक बंदूक बरामद की है और दो संदिग्धों को गिरफ्तार किया है। यह आपसी रंजिश पार्टी की जीत के बाद स्थानीय पावर कंट्रोल को लेकर बताई जा रही है।
जमात और बीएनपी कार्यकर्ताओं के बीच खूनी संघर्ष
हिंसा की आग केवल एक पार्टी तक सीमित नहीं रही। शेरपुर जिले में जमात-ए-इस्लामी के सदस्यों ने बीएनपी कार्यकर्ता गियासुद्दीन रसेल (35) पर जानलेवा हमला किया। रसेल बीएनपी उम्मीदवार के चुनाव एजेंट के रूप में काम कर रहे थे। वहीं, फेनी जिले में पलटवार करते हुए बीएनपी समर्थकों ने जमात कार्यकर्ता नूरुल अबसार बेलाल को उनके घर में घुसकर निशाना बनाया। बेलाल की हालत गंभीर बनी हुई है और वे अस्पताल में भर्ती हैं।
रिपोर्टिंग कर रहे पत्रकार को पीटा, घर में लगाई आग
जमालपुर जिले में लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर भी हमला हुआ। स्थानीय पत्रकार शमसुल हुदा रतन जब चुनावी हिंसा की रिपोर्टिंग कर रहे थे, तब बीएनपी की युवा शाखा 'जुबो दल' के नेताओं ने उन्हें बेरहमी से पीटा। इसके अलावा, खुलना जिले के मशियाली गांव में उपद्रवियों ने जमात समर्थक शोकोर अकुंजी के घर को आग के हवाले कर दिया। शोकोर के परिवार का आरोप है कि हमलावरों ने अचानक धावा बोला, जिससे उन्हें संभलने का मौका नहीं मिला।
HRSS की डरावनी रिपोर्ट: 10 मौतें और 2500 घायल
मानवाधिकार संस्था 'ह्यूमन राइट्स सपोर्ट सोसाइटी' (HRSS) ने अपनी ताजा रिपोर्ट में बांग्लादेश की चुनावी हिंसा के भयावह आंकड़े पेश किए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक:
अवधि: अक्टूबर 2025 से 14 फरवरी 2026 के बीच।
हताहत: कम से कम 10 लोगों की मौत और 2,503 लोग घायल हुए हैं।
नुकसान: 500 से अधिक घरों, दुकानों, वाहनों और चुनावी कार्यालयों में तोड़फोड़ या आगजनी की गई।
मीडिया पर हमले: 17 महीनों में पत्रकारों के खिलाफ 427 हिंसक घटनाएं दर्ज की गई हैं।
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