UP Kiran,Digital Desk: अक्सर यह समझा जाता है कि केवल महिलाओं की प्रजनन क्षमता उम्र के साथ घटती है, जबकि पुरुष किसी भी उम्र में पिता बन सकते हैं। लेकिन चिकित्सा विज्ञान अब इस धारणा को चुनौती दे रहा है। हालिया शोध बताते हैं कि पुरुषों की प्रजनन क्षमता भी उम्र के साथ प्रभावित होती है, हालांकि यह बदलाव महिलाओं के मुकाबले धीरे-धीरे होता है।
पुरुष भी नहीं हैं उम्र से अछूते
महिलाओं की तुलना में पुरुषों का शरीर अधिक समय तक प्रजनन क्षमता बनाए रखता है। पुरुषों में शुक्राणु का निर्माण किशोरावस्था से शुरू होता है और यह पूरी जिंदगी जारी रह सकता है। इस कारण, तकनीकी रूप से पुरुष 60 या 70 साल की उम्र में भी पिता बन सकते हैं, और इस तरह के उदाहरण भी देखने को मिलते हैं। लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि उम्र बढ़ने के साथ उनके शरीर में कोई बदलाव नहीं होता।
उम्र के साथ क्या बदलाव आते हैं?
विशेषज्ञों के मुताबिक, 35 से 40 वर्ष के बाद पुरुषों में शुक्राणु की गुणवत्ता में कमी आने लगती है। इनमें प्रमुख बदलावों में शामिल हैं:
शुक्राणु की संख्या में कमी
शुक्राणु की गति में गिरावट
डीएनए में टूट-फूट का बढ़ता जोखिम
टेस्टोस्टेरोन हार्मोन के स्तर में कमी
हालांकि यह बदलाव हर व्यक्ति में एक जैसे नहीं होते, लेकिन 45 से 50 वर्ष के बाद इन समस्याओं के सामने आने का खतरा बढ़ जाता है।
उम्रदराज पिता बनने से जुड़ी संभावित स्वास्थ्य चिंताएँ
कुछ अंतरराष्ट्रीय शोधों में यह पाया गया है कि ज्यादा उम्र में पिता बनने से शिशु में कुछ स्वास्थ्य जोखिम बढ़ सकते हैं। इनमें शामिल हैं:
ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर का खतरा
आनुवंशिक विकारों का जोखिम
गर्भधारण में देरी
लेकिन विशेषज्ञ यह स्पष्ट करते हैं कि ये जोखिम संभावना के स्तर पर होते हैं और हर मामले में ऐसा नहीं होता।
आदर्श उम्र: पुरुषों के लिए सर्वोत्तम समय
वैज्ञानिक दृष्टि से, 25 से 35 वर्ष के बीच की उम्र पुरुषों के लिए सबसे उपयुक्त मानी जाती है, जब उनका शुक्राणु और हार्मोन स्तर सामान्यतः उच्चतम होते हैं। हालांकि, आजकल के बदलते सामाजिक और पेशेवर परिप्रेक्ष्य में कई पुरुष इस उम्र के बाद भी पिता बनने का निर्णय लेते हैं। इस स्थिति में, जीवनशैली में सुधार और नियमित स्वास्थ्य जांच बेहद महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
पिता बनने के लिए क्या करें?
अगर कोई पुरुष 35 से 40 वर्ष की आयु के बाद पिता बनने का विचार कर रहा है, तो विशेषज्ञों की सलाह है कि वह पहले एक फर्टिलिटी टेस्ट करवा लें। इस परीक्षण से उनकी प्रजनन क्षमता का मूल्यांकन किया जा सकता है, जैसे शुक्राणु की संख्या, गति और संरचना की जांच। साथ ही, संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और तनाव प्रबंधन जैसी आदतें उनकी प्रजनन क्षमता को बेहतर बनाए रख सकती हैं।




