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UP Kiran,Digital Desk: एमपी में आगामी 1 मई से शुरू हो रही जनगणना को लेकर प्रशासन की तैयारियों में तेज़ी आ गई है। इस बार जनगणना प्रक्रिया को पहले से अधिक सुगम और पारदर्शी बनाने के लिए डिजिटल तकनीक का भी उपयोग किया जाएगा। नागरिकों को अपनी जानकारी खुद ऑनलाइन पोर्टल के जरिए दर्ज करने का मौका मिलेगा, जिससे न केवल समय की बचत होगी बल्कि प्रक्रिया में पारदर्शिता भी आएगी।

डिजिटल प्लेटफॉर्म से आम जनता को मिलेगा लाभ

कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने जानकारी दी कि अब नागरिक इंडियन सेंसस डाटा कलेक्शन पोर्टल पर जाकर अपनी जानकारी अपडेट कर सकेंगे। हालांकि, इसके साथ ही पारंपरिक डोर-टू-डोर सर्वे भी जारी रहेगा। इस बार इस अभियान में करीब 8,000 कर्मचारियों को प्रशिक्षित किया जाएगा, ताकि वे सही तरीके से जनगणना के कार्य को अंजाम दे सकें। प्रशिक्षण का कार्यक्रम 16 फरवरी से शुरू हो चुका है, और कर्मचारी जल्द ही घर-घर जाकर सर्वे करेंगे।

आंकड़ों का जुटाना: क्या पूछे जाएंगे महत्वपूर्ण सवाल?

जनगणना के दौरान नागरिकों से कई महत्वपूर्ण सवाल पूछे जाएंगे। इनमें घर की स्थिति, निर्माण सामग्री, परिवार के सदस्य, मुखिया का नाम और लिंग, सामाजिक वर्ग (SC/ST/अन्य), स्वामित्व स्थिति, कमरे की संख्या, शौचालय की स्थिति, रसोई का प्रकार, एलपीजी/पीएनजी कनेक्शन और इंटरनेट की उपलब्धता जैसी जानकारियां शामिल होंगी। ये सभी आंकड़े सरकार को योजनाओं और संसाधनों के सही वितरण में मदद करेंगे।

लगभग 10 लाख घरों की जियो-टैगिंग

इस जनगणना अभियान के तहत लगभग 10 लाख घरों की जियो-टैगिंग और मैपिंग की जाएगी, जो एक तकनीकी कदम है। इसके बाद, कर्मचारियों को सर्वे के लिए तैनात किया जाएगा। यह कदम इस बात की पुष्टि करता है कि मध्यप्रदेश डिजिटल परिवर्तन की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है।

मुख्यमंत्री का संदेश: जनगणना को लेकर सरकार का दृष्टिकोण

भोपाल में आयोजित राज्य स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में चीफ मिनिस्टर डॉ. मोहन यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में होने वाली इस ऐतिहासिक जनगणना को लेकर सकारात्मक टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि यह जनगणना देश के लिए एक मॉडल बनेगी और मध्यप्रदेश इस प्रक्रिया में एक आदर्श राज्य के रूप में उभरेगा। मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि जनगणना के आंकड़े सरकारी योजनाओं, संसाधन वितरण और विकास की योजनाओं को आकार देंगे।