img

Up Kiran, Digital Desk: भारतीय समाज में संतान को लेकर कई मान्यताएँ प्रचलित हैं, जिनमें इकलौती संतान को लेकर अलग-अलग विचार हैं। कुछ लोग इसे अशुभ मानते हैं, जबकि कुछ इसे एक साधारण स्थिति समझते हैं। खासकर जब समाज में "दो हमारा, एक तुम्हारा" जैसे परिवारिक ट्रेंड्स बढ़ रहे हैं, तो यह सवाल और भी ज़्यादा प्रासंगिक हो जाता है। ज्योतिषीय दृष्टिकोण से इसे समझना भी ज़रूरी है। तो क्या इकलौती संतान होना सच में अशुभ है या यह केवल एक मिथक है? आइए जानें, शास्त्र और ज्योतिष क्या कहते हैं।

क्या एकल संतान होना अशुभ है?

इकलौती संतान को लेकर सबसे बड़ा भ्रम यह है कि इसे अशुभ माना जाता है। लेकिन ज्योतिष शास्त्र इस विचार को पूरी तरह नकारता है। इसे 'एक संतान योग' कहा जाता है, जो कि किसी दोष का संकेत नहीं है। यह तो केवल व्यक्ति के भाग्य और उसके जीवन में किए गए कर्मों का फल है। अक्सर पितृ दोष या अन्य ग्रहों की स्थितियों के कारण दूसरी संतान में देरी हो सकती है, जिसे लोग अशुभ समझने की भूल कर लेते हैं। ज्योतिष के अनुसार, एकल संतान को माता-पिता का पूरा प्यार, देखभाल, और संसाधन मिलता है, जिससे वह जीवन में अधिक आत्मविश्वासी और सफल बनते हैं।

कुंडली में एकल संतान योग बनने के ज्योतिषीय कारण

ज्योतिष शास्त्र में कुंडली के पाँचवे घर का संतान से सीधा संबंध होता है। जब इस घर पर कुछ खास ग्रहों का प्रभाव होता है, तो व्यक्ति को केवल एक ही संतान का सुख प्राप्त होता है।

देवगुरु बृहस्पति का प्रभाव

गुरु ग्रह को संतान का कारक माना जाता है। यदि गुरु अपनी मूल राशि (धनु या मीन) में पांचवे भाव में स्थित होता है, तो यह एकल संतान के योग को मजबूत करता है। ऐसे में व्यक्ति को जीवन में एक ही श्रेष्ठ संतान मिलती है।

सूर्य का प्रभाव

सूर्य को अग्नि तत्व और सीमित फल देने वाला ग्रह माना जाता है। यदि सूर्य पंचम भाव में स्थित हो, तो यह भी एकल संतान का संकेत देता है, क्योंकि सूर्य का प्रभाव संतान की संख्या को सीमित कर सकता है।

शनि और मंगल का दृष्टिकोण

अगर पंचम भाव पर शनि की दृष्टि ठंडी होती है या मंगल की दृष्टि तीव्र होती है, तो यह भी दूसरी संतान के योग में रुकावट डाल सकता है। इन ग्रहों का प्रभाव संतान वृद्धि में कठिनाई ला सकता है।

पंचमेश का दुर्बल होना

अगर पाँचवे घर का स्वामी छठे, आठवें, या बारहवें घर में स्थित हो, तो यह वंश वृद्धि के मार्ग में अवरोध डाल सकता है। ऐसे में व्यक्ति को एक ही संतान पर संतुष्ट होना पड़ सकता है।

ज्योतिषीय उपाय और वंश वृद्धि

अगर कोई व्यक्ति संतान संबंधित समस्याओं का सामना कर रहा है, तो ज्योतिष में कुछ विशेष उपायों का उल्लेख है। भगवान कृष्ण के बाल रूप की पूजा और संतान गोपाल मंत्र का जाप विशेष रूप से प्रभावशाली माना जाता है। साथ ही, कुंडली में गुरु की स्थिति को सुधारने के लिए गुरुवार को पीली वस्तुओं का दान करना और बड़ों का आशीर्वाद प्राप्त करना लाभकारी हो सकता है। यही नहीं, हरिवंश पुराण का श्रवण या पाठ भी संतान संबंधित दिक्कतों को दूर करने में मददगार साबित हो सकता है।